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वर्ष- 2, अंक - 15, अगस्त, 2007

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   बचपन

 

संजय द्विवेदी की तीन बाल कविताएँ

 

राष्ट्र-धर्म

देश धर्म का पालन करके, बनते हैं सब लोग महान ।

देश धर्म अपनाया जिसने, वही बन गया पूज्य महान ।

 

देश धर्म की बलिबेदी पर, मिटे-मरे जो बने महान

पर गद्दारों को यह दुनिया, घोषित कर देती शैतान ।

 

देश धर्म से जो भी हिचका, जो करता माँ का अपमान

वह कृतघ्न कहलाता जग में, सब करते उसका अपमान ।

 

आओ देश धर्म अपनाकर करें देश सेवा का काम

 

परी न देखा, भूत न देखा

परी कथाएँ भूत कथाएँ

बंद करो अब नानी जी ।

परी न देखी, भूत न देखा

क्यों इसको सच माने जी ।

 

कोई दूजी कथा न मिलती

भूत-प्रेत करती रहतीं

कोई अच्छी कथा-कहानी

क्यों न कभी नानी कहतीं ।

 

बंद करो, तुम प्रेत-परी अब

मुझको खाना खाना जी

नानी तुमसे ठीक कहानी

कह लेते हैं नाना जी ।

 

अखबार

दूर-दूर की खबरें लेकर, रोज सुबह आता अखबार

देश-देश की गतिविधियों को, हमको बतलाता अखबार ।

 

रोज खबर अच्छी लाता है, बुरी कभी लाता अखबार

पापा-मम्मी दादा सबका, मनभावन प्यारा अखबार ।

 

और कभी रविवारी के संग, चला आ रहा है अखबार

बच्चों की भी कई कहानी, कविताएँ लाता अखबार ।

 

रोज सुबह हॉकर दे जाता, हमको नया-नया अखबार ।

संजय द्विवेदी

संपादक, दैनिक हरिभूमि

रायपुर, छत्तीसगढ

 

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