संजय द्विवेदी की तीन बाल कविताएँ
राष्ट्र-धर्म
देश धर्म का पालन करके, बनते हैं सब लोग महान ।
देश धर्म अपनाया जिसने, वही बन गया पूज्य महान ।
देश धर्म की बलिबेदी पर, मिटे-मरे जो बने महान
पर गद्दारों को यह दुनिया, घोषित कर देती शैतान ।
देश धर्म से जो भी हिचका, जो करता माँ का अपमान
वह कृतघ्न कहलाता जग में, सब करते उसका अपमान ।
आओ देश धर्म अपनाकर करें देश सेवा का काम
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परी न देखा, भूत न देखा
परी कथाएँ भूत कथाएँ
बंद करो अब नानी जी ।
परी न देखी, भूत न देखा
क्यों इसको सच माने जी ।
कोई दूजी कथा न मिलती
भूत-प्रेत करती रहतीं
कोई अच्छी कथा-कहानी
क्यों न कभी नानी कहतीं ।
बंद करो, तुम प्रेत-परी अब
मुझको खाना खाना जी
नानी तुमसे ठीक कहानी
कह लेते हैं नाना जी ।
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अखबार
दूर-दूर की खबरें लेकर, रोज सुबह आता अखबार
देश-देश की गतिविधियों को, हमको बतलाता अखबार ।
रोज खबर अच्छी लाता है, बुरी कभी लाता अखबार
पापा-मम्मी दादा सबका, मनभावन प्यारा अखबार ।
और कभी रविवारी के संग, चला आ रहा है अखबार
बच्चों की भी कई कहानी, कविताएँ लाता अखबार ।
रोज सुबह हॉकर दे जाता, हमको नया-नया अखबार ।
संजय
द्विवेदी
संपादक, दैनिक हरिभूमि
रायपुर, छत्तीसगढ
