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न्यूट्रिनोज-वर्तमान और भूतकाल के बीच सीमारेखा को धुंधलाता

प्रकाशन :सोमवार, 10 अक्टूबर 2011
डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव
ब्रह्मांड का अस्तित्व

ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया? यह यक्ष प्रश्न आज भी पहेली बना हुआ है। ‘डार्क मैटर’, वीकली इंटैरिक्टंग मैसिव पार्टीकल्स ‘विंप्स’ और ‘न्यूटिनों’ का रहस्य क्या है? जानने के लिए प्रयोगशालाओं में शोध कार्य व गणितीय विवेचना जारी है। हाल ही प्रकाश से तेज गति कणों को प्रयोगशाला मे देखा गया। इसने भौतिकविज्ञानियों को भौंचक्का कर दिया। विवेचना जारी है। ब्रह्मांड का एक आधारभूत नियम है कि परमाणुओं के भीतर मौजूद ऊर्जा कणों से लेकर विशालतम पिंड तक कोई भी चीज प्रकाश के वेग से तेज नहीं चल सकती। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आंइस्टीन के सापेक्षतावाद के अनुसार 299792458 किलोमीटर प्रति सेकण्ड की गति वह अधिकतम सीमा है जिसे प्रकाश के अलावा कोई और नहीं छू सकता।

यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड और इसे संचालित करने वाले नियम कुछ इस तरह व्यवहार करते हैं कि कोई भी चीज प्रकाश के वेग का उल्लंघन न कर सके। यही वजह है कि ब्रह्मांड में हर चीज हमेशा आगे की ओर यानि भविष्य की ओर बढ़ रही है, क्योंकि सापेक्षतावाद के अनुसार प्रकाश के वेग का उल्लंघन करते ही भूतकाल की यात्रा शुरू हो जाएगी।

प्रकाश के वेग का उल्लंघन कर रहे न्यूट्रिनोज ने ब्रह्मांड के आधारभूत नियमों के बारे में मानवजाति की अब तक की सारी समझ को ही ध्वस्त कर डाला है। इटली के ग्रान सैसो में ओपेरा प्रयोग के समन्वयक एंटोनियो रेडिटाटो बताते हैं कि प्रयोग के नतीजों से हम भौंचक्के हैं। लेकिन इन नतीजों को हम तब तक नई खोज का नाम नहीं दे सकते, जब तक की दूसरे वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं में इन नतीजों की पुष्टि नहीं कर देते। इंडिसाना यूनीवर्सिटी में प्रकाश की गति से तेज चलने की संभावना तलाशने की एक रिसर्च में शामिल भौतिकशास्त्री डॉ. एलेन कॉस्टेलेकी और उनकी टीम ने 1985 में प्रस्तुत एक सिद्वांत में बताया था कि निर्वात में मौजूद अज्ञात क्षेत्र से सम्पर्क कर न्यूट्रिनो प्रकाश की गति सीमा को तोड़ सकते हैं। डॉ कॉस्टेलेकी कहते हैं कि, हालांकि भौतिकशास्त्री अब दूसरी जगहों पर पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन ऐसे नतीजों का आना ही अपने आप में काफी रोमांचक है। इस प्रयोग की पृष्ठभूमि में ये भी कहा जा सकता है कि हम ब्रह्मांड में जिस सबसे तेज रफ्तार की बात अब तक करते आये थे मुमकिन है कि वह रफ्तार प्रकाश की बजाय न्यूट्रिनोज की हो। देवी अहिल्याबाई विश्वविधालय से संबद्व पीजी कॉलेज धार के भौतिकशास्त्री डॉ बी.डी. श्रीवास्तव ने कहा कि हम अभी तक सबसे तेज रफ्तार का मालिक प्रकाश को समझते रहे लेकिन अब असलियत सामने आने को है कि सबसे तेज रफ्तार तो न्यूट्रिनोज की सिद्व होने जा रही है, यदि ऐसा होता है तो भौतिकी के आधारभूत नियमों को फिर से नये सिरे से परिभाषित करना होगा।

आज तक सम्पूर्ण ब्रह्मांड और इसे संचालित करने वाले नियम कुछ इस तरह व्यवहार करते हैं कि कोई भी चीज प्रकाश के वेग का उल्लंघन न कर सके। यही वजह है कि ब्रह्मांड में हर चीज हमेशा आगे की ओर यानि भविष्य की ओर बढ़ रही है, क्योंकि सापेक्षतावाद के अनुसार प्रकाश के वेग का उल्लंघन करते ही भूतकाल की यात्रा शुरू हो जाएगी। ऐसा किसी भी तरह संभव नहीं है। लेकिन सर्न के एक प्रयोग से इस असंभव के संभव होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे आइंस्टीन का सापेक्षतावाद भी सवालों के घेरे में आ गया है और दुनिया भर के भौतिकविज्ञानी भौंचक्के हैं। अगर सर्न के प्रयोग के नतीजे सही है तो फिर इसके नतीजे बड़े व्यापक होंगे और फिजिक्स के सारे नियम सारे सिद्वान्त फिर से लिखने पड़ेंगे। सर्न के इस प्रयोग के विवरण से पहले इस प्रयोग में शामिल ऊर्जा कणों न्यूट्रिनोज के बारे में जानना जरूरी है।

न्यूट्रिनोज क्या हैं -

सूरज एक खास ऊर्जा कण को जन्म देता है, जिसका नाम न्यूट्रिनो है। सौर विकिरण के तूफान के साथ अरबों-खरबों की तादाद में न्यूट्रिनो कण पूरे सौर मंडल में बिखर जाते हैं। न्यूट्रिनो की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कोई अन्य चीज इसे रोक नहीं पाती और यह सामने आनेवाली हर चीज के आरपार निकल जाते हैं। इस वक्त भी जब आप इन लाइनों को पढ़ रहे हैं, सूरज से निकलने वाले खरबों न्यूट्रिनो कणों की बौछार हर सेकण्ड बगैर नुकसान पहुचाये जारी है, और शरीर के आरपार निकल रही है। न्यूट्रिनो उच्च ऊर्जायुक्त कण हैं और इनकी मौजूदगी परमाणु के भीतर भी महसूस की गई है। न्यूट्रिनो इतने सूक्ष्म हैं कि किसी भी सूक्ष्मदर्शी से इन्हे देखा नहीं जा सकता, हॉ कुछ बेहद संवेदनशील सेंसर्स की मौजूदगी का अनुभव जरूर किया जा सकता है।

प्रयोगशाला में न्यूट्रिनो कण

सूरज के अलावा न्यूट्रिनो कणों को जेनेवा की भूमिगत प्रयोगशाला सेर्न में भी बनाया जाता है। सर्न की एक खास एक्सीलेरेटर मशीन सुपर प्रोटॉन सिंक्रोटान यानी एसपीएस से हर दिन अरबों खरबों न्यूट्रिनोज की ये ऊर्जा किरण सेर्न से 732 किलोमीटर दूर इटली के बीचोंबीच जमीन के नीचे मौजूद एक दूसरी प्रयोगशाला ग्रान सैसो पार्टिकल एक्सीलेरेटर की ओपेरा डिटेक्टर मशीन की ओर छोड़ी जाती है। करीब प्रकाश की गति 299792458 किलोमीटर प्रति सेकण्ड की रथ्तार वाली न्यूट्रिनोज की यह किरण मात्र ढाई मिली सेकण्ड में जेनेवा से इटली के बीच 732 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। सन और ग्रान सैसो के ओपेरा प्रयोग के नतीजों ने वर्तमान और भूतकाल के बीच की सीमारेखा को धुंधला दिया है। भले ही गणितीय रूप से सही, लेकिन समय के पीछे जा सकने और भूतकाल मे सूचना भेजने की संभावनाए दिखने लगी हैं।

ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया, यह यक्ष प्रश्न अब प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध कार्य व गणितीय विवेचना से सामने आने को है।

  डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव
शासकीय पी.जी. कॉलेज, धार
bdshrivastava@gmail.com
 
         
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