बड़े दिनों के बाद गगन में
आये बदरा छाये ।
आते ही झट लगा खेलने
सूरज आँख-मिचौली
घुले-मिले तो ऐसे-जैसे
मिश्री के संग नैनी
बाट जोहते रहे बटोही
धूप-छाँव के साये ।
हुआ मगन मन गाये कजरी
गाये बारहमासी
लहकी-थिरकी है पुरवईया
देख पक्षाभ-कपासी
औंचक-भौंचक ढोल-मंजीरा
मौसम धूम मचाये ।
करो हरी तुम कोख धरा की
आओ बदरा बरसो
क्या रक्खा है कल करने में
या करने में परसों
उम्मीदों की फसल उगाओ
हमने दीप जगाये ।
बड़े दिनों के बाद गगन में
आये बदरा छाये ।

आये बदरा छाये ।
आते ही झट लगा खेलने
सूरज आँख-मिचौली
घुले-मिले तो ऐसे-जैसे
मिश्री के संग नैनी
बाट जोहते रहे बटोही
धूप-छाँव के साये ।
हुआ मगन मन गाये कजरी
गाये बारहमासी
लहकी-थिरकी है पुरवईया
देख पक्षाभ-कपासी
औंचक-भौंचक ढोल-मंजीरा
मौसम धूम मचाये ।
करो हरी तुम कोख धरा की
आओ बदरा बरसो
क्या रक्खा है कल करने में
या करने में परसों
उम्मीदों की फसल उगाओ
हमने दीप जगाये ।
बड़े दिनों के बाद गगन में
आये बदरा छाये ।
अवनीश सिंह चौहान
ग्राम/पो.-चन्दपुरा (निहाल सिंह),
जनपद-इटावा (उ.प्र.)-206127
मो.- 09456011560.
abnishsinghchauhan@gmail.com
जनपद-इटावा (उ.प्र.)-206127
मो.- 09456011560.
abnishsinghchauhan@gmail.com


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