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दिल से दिल तक जुड़ी हुई है ग़ज़ल।

प्रकाशन :बुधवार, 30 नवम्बर 2011
देवी नागरानी
दिल से दिल तक जुड़ी हुई है ग़ज़ल।
बीच में उनके पुल बनी है ग़ज़ल।

छू ले पत्थर तो वो पिघल जाए,
ऐसा जादू भी कर गई है ग़ज़ल।

सात रंगों की है धनुष जैसी,
स्वप्न-संसार रच रही है ग़ज़ल।

सोच को अपनी क्या कहूँ यारो,
रतजगे करके कह रही है ग़ज़ल।

रूह को देती है सुकूं ‘देवी’,
ऐसी मीठी-सी रागिनी है ग़ज़ल।
  देवी नागरानी
देवी नागरानी
9-डी, कार्नर व्यू सोसायटी
15/33 रोड, बान्द्रा, मुंबई-400050
dnangrani@gmail.com
 
         
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