तेरे जाने पे भी आंखों में वो पल जिंदा है,
तेरी आवाज में हर एक ग़ज़ल जिंदा है।
कब फना होते हैं जो लोग दिलों में जीते,
खाक बस खाक में लौटी है असल जिंदा है।
आंखें हैं जिनसे कि बच्चे की किलक झांके है,
और हंसी में वही मासूम सा कल जिंदा है।
वक्त के आगे क्या औकात किसी पत्थर की,
ये मुहब्बत ही है जो ताजमहल जिंदा है।
हों भरी पलकें रहे दिल में हरा कुछ हरदम,
इनके चलते ही तो सपनों की फसल जिंदा है।
उम्र कटने को तो कुछ ऐसे भी कट जाएगी,
दफन हम खुद में कहीं अपना बदल जिंदा है।
जिंदगी मौत से हारी न कभी हारेगी,
उसकी ये दरियादिली है कि अजल जिंदा है।
एक बस तेरी कमी है चले आओ "अनिमेष"
देख तो कितनी चहल कितनी पहल जिंदा है।
तेरी आवाज में हर एक ग़ज़ल जिंदा है।
कब फना होते हैं जो लोग दिलों में जीते,
खाक बस खाक में लौटी है असल जिंदा है।
आंखें हैं जिनसे कि बच्चे की किलक झांके है,
और हंसी में वही मासूम सा कल जिंदा है।
वक्त के आगे क्या औकात किसी पत्थर की,
ये मुहब्बत ही है जो ताजमहल जिंदा है।
हों भरी पलकें रहे दिल में हरा कुछ हरदम,
इनके चलते ही तो सपनों की फसल जिंदा है।
उम्र कटने को तो कुछ ऐसे भी कट जाएगी,
दफन हम खुद में कहीं अपना बदल जिंदा है।
जिंदगी मौत से हारी न कभी हारेगी,
उसकी ये दरियादिली है कि अजल जिंदा है।
एक बस तेरी कमी है चले आओ "अनिमेष"
देख तो कितनी चहल कितनी पहल जिंदा है।


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