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हो सकता भ्रष्टाचार का सफाया:जगजीत

प्रकाशन :शनिवार, 8 अक्टूबर 2011
रायगढ़ से प्रदीप की रपट

रायगढ़।जगजीत सिंह पद्भ भूषण जगजीत सिंह भी भष्ट्राचार के विरोध में आंदोलन का समर्थन करते हैं,लेकिन उनका मानना है कि जब तक लोगों के मन में भ्रष्टाचार की प्रवृति है, उसका सफाया नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आधुनिक संगीत के बढ़ते प्रभाव के पीछे आधुनिकता व मीडिया है। लोगों को जिस तरह से आधुनिक संगीत परोसे जा रहे हैं, उस स्थिति में भी खतरा ग़ज़ल को नहीं,बल्कि आधुनिक संगीत को है। जगजीत सिंह ने स्वीकार किया कि उर्दू जुबान बोलने व समझने वालों की तादाद कम हो रही। ऐसी स्थिति में उन जैसे लोगों से ग़ज़ल की समझ की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है। 27 वें गणेश मेला चक्रधर समारोह में शिरकत करने हिन्दुस्तान के ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह भी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रग-रग में समा चुका है।

लोगों के करेक्टर में भ्रष्टाचार रहेगा, तब तक इसके समाप्त होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के आंदोलन का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के विरोध में होने वाले हर आंदोलन का समर्थन करते हैं। उन्होंने संगीत सम्राट चक्रधर सिंह की स्मृति में आयोजित 10 दिवसीय समारोह की तारीफ करते हुए कहा कि यह देश में अपने तरह का एक श्रेष्ठ सांस्कृतिक उत्सव है। जगजीत सिंह ने कहा कि रायगढ़ जहां महाराजा चक्रधर सिंह के नाम से प्रसिद्ध है। वहीं एशिया में जिंदल स्टील के नाम से भी प्रसिद्घि हासिल कर रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ग़ज़ल की जुबान उर्दु है,लेकिन इस जुबान को बोलने व समझने वालों की तादाद कम हो रही है। इस स्थिति में ऐसे लोगों से ग़ज़ल की समझ रखने की उम्मीद करना मुनासिब नहीं।

जगजीत सिंह ने कहा कि आधुनिक संगीत का ग़ज़ल पर प्रभाव नहीं पड़ा। ग़ज़ल उसी स्थिति में है। इतना जरूर है कि आधुनिक संचार साधनों में रैम्प संगीत की भरमार है। इसकी वजह भी उन्होंने मीडिया व आज के दौर के फ़िल्मों को माना। उन्होंने कहा कि इससे ग़ज़ल को खतरा नहीं, बल्कि रैम्प संगीत को है।

रियल्टी शो के बाद भटकाव की स्थिति

ग़ज़ल के कद्रदानों के लिए उन्होंने अक्टूबर में नई गजलों का कलेक्शन उपलब्ध होने की बात कही है। जगजीत सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी भी ग़ज़ल के लिए तैयार है। यदि ऐसा नहीं होता तो ग़ज़ल के नए कलेक्शन ही नहीं आते। टेलीविजन के रियलिटी शो को उचित बताते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के शो से निश्चित तौर पर नए लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, लेकिन शो के बाद ऐसा नहीं हो पाता।

  रायगढ़ से प्रदीप की रपट

 
         
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