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संचार साधनों ने दुनियाँ को बहुत छोटा बना दिया है, तार-बेतार, टेलीफोन, रेडियो, दूरदर्शन ने बहुत हद तक भौगौलिक दूरियों का मतलब ही बदल दिया है। संचार और संपर्क के आधुनिक कौए अब हर सुबह नहीं बल्कि हर पल दुनियाँ की खैरियत, उसके हर्ष-विशाद और उसकी उपलब्धियों की खबरें देते रहते हैं। जो हो, सूचना का जिन्न बोतल के बाहर है। अगला दशक चमत्कारी होगा। सस्ते, सरल और उत्कृष्ट दूर संचार साधनों से पूरी दुनियॉं पटी रहेगी। ‘जो मॉंगोगे वही मिलेगा’ की तर्ज पर हर तरह की सूचना अँगुलियों पर होगी।1

सूचना क्रांति ने पूरी दुनियाँ को समेट कर ‘ग्लोबल विलेज’ अर्थात् ‘‘गांॅव में बदली दुनियाँ’’की अवधारणा को साकार कर दिया है। सूचना जगत में इस नयी क्रांति का सूत्रपात करने में टेलीफोन, फैक्स, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, प्रिंटर, सेल्युलर फोन, पेजर, ई-मेल, मल्टीमीडिया, इन्टरनेट, फोटो कॉपियर, वीडियो फोन जैसे उपकरणों व अवधारणाओं की महती भूमिका रही है। इसमें कम्प्यूटर अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका में है। कम्प्यूटर के बिना इस पूरे सूचना तंत्र की संकल्पना अधूरी है।2

इंटरनेट सूचना बैंक हैं। सूचना के स्तर पर हमने संपूर्ण धरती को ‘खगोलीय ग्राम’ में तब्दील कर एक छत और छाते के नीचे खड़ा कर दिया है। कुल मिलाकर सूचना प्रौद्योगिकी का यह अंतहीन संभावनाओं तथा उपयोगिता वाला क्षेत्र है। इसमें समाज का हर कुनबा और तबका, हर पेशे के लोग - वकील, डॉक्टर, अध्यापक, सामान्य गृहिणी, फैशन डिजाइनर- अपने-अपने मतलब की चीज या जरूरत को तलाश कर सकते है। रेल, जहाज पर टिकटों के आरक्षण के साथ चिकित्सा, विज्ञान, कृषि जमीन का मोलभाव, किसी वस्तु की खरीद-बेच और शिक्षा-रक्षा संबंधी हर तरह की ताजा टटकी सूचना इसके पास बिना ना-नुकुर के उपलब्ध है।3 

कम्प्यूटर के कारण समाचार- प्रेषण में क्रांति मची हुई है। एक समय था जबकि कबूतर, डाकिए, टेलीग्राम द्वारा संवाद भेजे जाते थे, जो मंथर गति से गन्तव्य तक कभी पहुँचते तो कभी कभी बीच में खो जाते थे। अब तो कम्प्यूटर के कारण वे तत्काल ही समाचार-पत्र कार्यालय में पहॅुच जाते हैं। उपग्रह कम्पयूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण संवादों का द्रुतगति से विस्तार हो रहा है जिससे मानव दिनानुदिन अधिक चैतन्य हो रहा है। पहले भुजा की शक्ति थी, पुनः भाषा की शक्ति,तत्पश्चात् तेल की शक्ति आज तो आणविक उपग्रह की शक्ति है। आज गति और विस्तार एकाकार हो चुके हैं, संचार साधनों में अप्रत्याशित परिवर्तन दृष्टिगत हे रहें हैं। नित- नूतन बदलते परिवेश में मानव-मन चमत्कृत और स्तब्ध है।4

अब गॉव भी खबर है। क्योंकि गॉव बेखबर नहीं हैं।गॉव में ब्रांड पहुँचे हैं। उनकी रिकॉल बढ़ी है, इन अखबारों में जो पास के शहर से आया है। राष्ट्रीय प्रादेशिक राजनीति की सुर्खियाँ हैं, रंगीन पन्ने हैं, जिनमें श्री देवी, कद्दू के कोफ्ते, साप्ताहिक भविष्य और न जाने क्या - क्या झाँक रहे है। आज हम देख रहे हैं कि सूचना क्रांति ने एक नये किस्म का उपभोक्ता वादी ऐक्य पैदा कर दिया है।5

आज सूचना प्रौद्योगिकी के विविध पहलुओं के चलते पत्रकारिता का दायरा वृहत् हो चला है। समाज के किसी भी क्षेत्र को देखें तो हमे इन्टरनेट के माध्यम से पत्रकारिता के विभिन्त्र पक्षों का समन्वय दिखाई देगा। आज कोई भी व्यक्ति साइबर-कैफे में बैठकर न केवल अखबार प्राप्त कर सकता है बल्कि समाचार पत्रों के कार्यालयों में एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक ऑनलाईन पत्रकारिता की प्रविधि भी संचालित कर सकता है। संपादन, समाचार चयन, फोटो-संयोजन से लेकर लेखन पठन-पाठन तक की समस्त गतिविधियाँ इस प्रविधि द्वारा संचालित की जा सकती है। पत्रकारिता के इलेक्ट्रॅानिक स्वरूप के चलते आज यह प्रविधि अत्यंत महत्वपूर्ण हो चली है। आज की दुनियाँ में सभी क्षेत्रों में क्रांतिकारी विकास हो रहे हैं।कम्प्यूटर के इस्तेमाल ने हर ओर क्रान्ति ला दी है। वर्तमान में लगभग सभी समाचार- पत्र जिनकी प्रसार संख्या बड़ी है वे अपने पृष्ठों को सीधे कम्प्यूटर स्क्रीन पर कम्पोज करते हैं। फोटो-विज्ञापन, सामग्री-फीचर, शीर्षक, ले आउट आदि सभी कार्य कम्प्यूटर स्क्रीन पर ही होते हैं। विज्ञापन भी उपग्रह के जरिए समाचार एजेन्सी या विज्ञापन एजेन्सी से सीधे समाचार पत्र के कार्यालय में आ उपस्थित होते हैं। स्कैनर, प्रिंटर और डिजिटल कैमरे के संयुक्त प्रयोगों से संपूर्ण समाचार-पत्र का कायाकल्प किया जा सकता है। कम्प्यूटर की यह क्षमता व उसका कम खर्च अखबारों के कई संस्करण निकालने का रास्ता खोल देगा। इससे ग्राहक संख्या पर भी असर होगा।6

इस प्रकार वेब पब्लिशिंग, पत्रकारिता जगत में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है। हमारा तकनीकी परिवेश उत्तरोतर परिवर्तन कामी है। इसकी पहुॅच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। इसकी समझ से पत्रकारों में पारम्परिक पत्रकारिता से इतर नवीन तकनीक का वैज्ञानिक ज्ञान विकसित होगा। ऑनलाइन पत्रकारिता सूचना का ‘सुपर हाईवे’ है। यह जहाँ एक ओर समाचार व सूचना सम्बन्धी उत्सुकता को शांत करता है वहीं दूसरी तरफ लोगों की बौद्धिक भूख से भी तृप्त करता है। विस्तृत संजाल के माध्यम से किसी विषय के विस्तार और गहराई को परत- दर- परत समझा जा सकता है साथ ही पाठक भी एक भागीदार के रूप में ईमेल के द्वारा तुरंत अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर सकता है।7

कुछ समय पहले तक बेब पत्रकारिता पर अँग्रेजी का एकाधिकार हुआ करता था पर अब हिन्दी समाचारों की वेबसाइटें भी दिखने लगी है। हिन्दी पत्रकारिता में इन्दौर की ‘नई दुनियाँ’ अखबार द्वारा ‘बेब दुनियाँ ’ के नाम से हिन्दी में पहला समाचार पोर्टल शुरू कर एक नए युग की शुरूआत की है। इसके पश्चात ‘नेट जाल’, ‘रिडिफ डॉट कॉम’, ‘सत्यम् ऑनलाईन डॉट कॉम’, ‘विमेन इन्फोलाइन डॉट कॉम’ आदि बड़े पोर्टल हिन्दी में खोले गए। वर्तमान में लगभग सभी हिन्दी समाचार पत्रों की अपनी साईटें हैं। बी. बी. सी. हिन्दी ने भी अपनी बेबसाइट शुरू की है।

व्यवसाय की दृष्टि से हिन्दी बेबसाइटों को अभी कुछ खास मुनाफा नहीं है पर धीरे-धीरे इसमें इजाफा हो रहा है। हिन्दी वेबसाईटें एक नवजात शिशु के रूप में पल-बढ़ रही हैं। भविष्य में हिन्दी की ये बेबसाईटें व्यापक होने पर निश्चित ही समाज को प्रभावित करेंगी। भारत में इंटरनेट पर हिन्दी के विकास की सबसे बड़ी समस्या तकनीकी स्तर पर है। याहू और गूगल जैसी बड़ी कम्पनियों ने हिन्दी में सर्च इंजन विकसित किये हैं जिनका प्रयोग अधिकतर भारतीय इंटरनेट उपभोक्ता कर रहे हैं। आज भी नेट पर हिन्दी के विकास का प्रयास विदेशी कम्पनियाँ कर रही हैं। हिन्दी की 10 सबसे बड़ी पॉपुलर बेवसाईटों में से दो (बी.बी.सी. को हिन्दी वेबसाइट और विकीपीडिया का हिन्दी संस्करण) विदेशी हैं। आज हिन्दी में इंटरनेट यूजरों की दिन-प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। हिन्दी में इंटरनेट का विकास हिन्दी भाषी समाज के लिए ज्ञान व सूचनाओं के असीमित द्वार खोल देगा।

वेब पत्रकारिता की चुनौतियों को समझने के लिए सबसे पहले हमें आज के दौर में मौजूद माध्यमों, उनके चरित्र और उनकी खासियत व कमियों पर ध्यान देना होगा। इंटरनेट के आने से पहले तक सभी माध्यमों की अपनी स्वतंत्र पहचान और स्पेस था, लेकिन इंटरनेट ने हमें पूरी तरह बदल डाला है। इंटरनेट पर स्वतंत्र समाचार साइंटें भी हैं तो अखबारों के अपने ई-संस्करण भी मौजूद हैं। स्वतंत्र पत्रिकाएँ भी हैं तो उनके ई-संस्करण भी आज कम्प्यूटर से महज एक क्लिक की दूरी पर मौजूद हैं। इसी तरह टेलीविजन और रेडियो के चैनल भी कम्प्यूटर पर मौजूद हैं। कम्प्यूटर का यह फैलाव सिर्फ लैपटॉप या डेस्कटॉप तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह आम-ओ-खास सबके हाथों में मौजूद पंडोरा बॉक्स तक में पहुँच गया है। 2003 में बीएसएनएल की मोबाइल फोन सेवा की लखनऊ में शुरुआत करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मोबाइल फोन को पंडोरा बॉक्स ही कहा था। भारत में मोबाइल तकनीक और फोन सेवा की संभावनाओं का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के बड़े टेलीकॉम ऑपरेटरों ने 3जी सेवाओं के लाइसेंस के लिए हाल ही में करीब 16 अरब डॉलर यानि 75600 करोड़ रूपये की बोली लगाई। एक अमरीकी संस्था ‘बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप’ द्वारा ‘इंटरनेट्स न्यू बिलियन’ नाम से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि इस समय भारत में 8.1 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। इस संस्था के मुताबिक 2015 में भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 23.7 करोड़ हो जायेगी।8

आज अखबारों की तरह वेब-पत्र और पत्रिकाओं का जाल अंतर्जाल पर पूरी तरह बिछ चुका है। इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में थोड़े ही समय में हमने बड़ा मुकाम पा लिया है, हालाँकि समय अभी शेष है और इसे अभी बहुत दूर जाना है। भारत में अभी भी वेब-पत्रकारिता की पहुँच प्रथम पंक्ति में खड़े लोगों तक ही सीमित है। धीरे-धीरे मध्यम वर्ग भी इसमें शामिल हो रहा है। जहाँ तक अंतिम कतार में खड़े लोगों तक पहुँचने की बात है तो अभी यह बहुत दूर है।9 

कुल मिलाकर वर्तमान में खबरों के मारा-मारी युग में वेब-खबरें सुकून के साथ संतुष्टि प्रदान करती हैं। वेब-पत्रकारिता ने बीड़ा उठाया है पत्रकारिता में सकारात्मक परिवर्तन करने का। आज का पत्रकार भी नई-नई तकनीक से युक्त होकर पाठकों को ज्ञानवर्द्धक सामग्री मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं और पाठक मनवांछित ग्रहण कर त्वरित टिप्पणी भी दे रहे हैं। पाठक वेब-पत्रकारिता के माध्यम से प्रसारित खबरों से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है और देश-विदेश के भिन्न-भिन्न विषय विशेषज्ञों के विचारों से एक जगह बैठकर, एक ही स्क्रीन पर परिचित होता रहता है। फिर भी वेब-पत्रकारिता से जुड़े व्यक्तियों को अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है। वह शनैःशनैः ही इस क्षेत्र में व्याप्त चुनौतियों से निपटकर वेब-पत्रकारिता की संभावनाओं को बलवती कर पायेंगे। परन्तु यह तय है कि इसका वर्तमान और भविष्य दोनों ही सुनहरे हैं।10

संदर्भ :
1. जनसंचारः विविध आयाम- बृजमोहन गुप्त, पृष्ठ 11-16 राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली- 1992
2. ”सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्रांति“- क्रॉनिकल इयर बुक 2000 से साभार क्रॉनिकल पब्लिकेशन, सफदर जंग, नई दिल्ली
3. प्रयोजनमूलक हिन्दी की नयी भूमिका - कैलाश नाथ पाण्डेय पृष्ठ - 399, लोक भारती प्रकाशन, इलाहबाद -1- 2009
4. जनसंचार और हिन्दी पत्रकारिता- डॉ. अर्जुन तिवारी- पृष्ठ-244-250- जय भारती प्रकाशन, इलाहाबाद-3- 2004
5. उत्तर आधुनिक मीडिया विमर्श - सुधीश पचौरी - पृष्ठ - 242 - वाणी प्रकाशन नई दिल्ली -2009
6. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया- डॉ. सुधीर सोनी पृष्ठ-76- युनिवर्सिटी पब्लिकेशन्स, जयपुर - 2007
7. प्रयोजन मूलक हिन्दी और पत्रकारिता- डॉ. दिनेश प्रसाद सिंह, पृष्ठ-217-218, वाणी प्रकाशन दिल्ली -2007
8. वेब-पत्रकारिता : चुनौतियाँ और संभावनाएँ - उमेश चतुर्वेदी, शुक्रवार 25 फरवरी 2011, द्वारा इंटरनेट
9. वेब-पत्रकारिता : चुनौतियाँ और संभावनाएँ - डॉ. सीमा अग्रवाल, द्वारा इंटरनेट 2011
10. वेब-पत्रकारिता : चुनौतियाँ और संभावनाएँ - अनुराग ढेंगुला, द्वारा इंटरनेट 2011