SrijanGatha

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अन्तरराष्ट्रीय मंच


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जोशीजी का घोडा


अगली पीढ़ी को अपनी जिंदगी जीने न देने से ऐसे नुकसान

हिन्दुस्तान के बाहर भी ब्रिटेन जैसे देश में बसे हुए हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी मां-बाप इस किस्म की ऑनर-किलिंग कहे जाने वाले जुर्म में सजा पा चुके हैं। भारतीय समाज को इस किस्म की हिंसा से उबरना होगा। हम इन सौतेले भाई-बहनों की आपसी शादी की बात नहीं कर रहे, इस संबंध में और भी बहुत से लोगों को आपत्ति हो सकती है
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विश्व हिन्दी मेले के तीन दशक

भारत सरकार में हिंदी के कार्यान्वयन का काम गृह मंत्रालय को सौंपा गया है, जहाँ के राजभाषा विभाग में तदर्थ नियुक्तियों पर तैनात अधिकारियो की विशाल फौज है। मगर वह फौज क्या काम करता है , वह कहीं दिखता नहीं। विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजन का भार विदेश मंत्रालय को दिया गया है,जिसके पास न इसके लिए पर्याप्त जनशक्ति है और न ही इच्छाशक्ति
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बिहार चुनाव : अग्निपरीक्षा किसकी?

यह संयोग मात्र नहीं है कि भाजपा के रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूढ़ी, राधामोहन सिंह, गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव और सहयोगी दलों के रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मंत्री हैं। बावजूद इसके अनंत कुमार और धर्मेंद्र प्रधान जैसे दो अन्य मंत्री भी बिहार के मैदान में उतारे गए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और गुजरात के सांसद सीआर पाटिल भी बिहार में सक्रिय हैं। शाहनवाज हुसैन को भागलपुर रैली का प्रभारी बनाया गया तो जदयू में रहे साबिर अली को ऐन चुनाव के पहले पार्टी ने प्रवेश दिया
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मेरा दोस्त प्रोफेसर पुष्पपाल सिंह

इसी वर्ष मार्च के महीने में मेरा सपत्नीक पटियाला विश्वविद्यालय जाना हुआ। वहाँ के “गुरु गोबिन्द सिंह धर्म अध्ययन विभाग” के संयोजकत्व में “आचार्य तुलसी स्मारक व्याख्यानमाला” के प्रसंग में, मुझे विश्विद्यालय में व्याख्यान देना था। मुझे और मेरी पत्नी को पुष्प पाल सिंह और उनकी धर्मपत्नी की पटियाला में कमी बहुत महसूस हुई। लौटकर मेरी पुष्प पाल से बात हुई। बता रहे थे कि रिकवरी बहुत अच्छी है। मन को संतोष हुआ
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आरक्षण की बहस के बीच क्रीमीलेयर हटाने की जरूरत

हम आज की बहस में आरक्षण की व्यवस्था पर ऐसे हर मौके पर छिड़ जाने वाली बहस को भी यहां छूना नहीं चाहते कि देश में आरक्षण होना चाहिए या नहीं। हम इनके बीच केवल एक पहलू पर आज बात करना चाहते हैं कि आरक्षित तबकों के बीच जो क्रीमीलेयर कही जाती है, उस मलाईदार तबके का क्या किया जाना चाहिए? यह तबका आदिवासियों के बीच भी है, दलितों के बीच भी है, और ओबीसी में इनके मुकाबले कुछ और अधिक है
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सूरीनाम का सृजनात्मक हिंदी साहित्य

यह वेदना जब जब शब्दों में व्यक्त हुई, साहित्य का सृजन हुआ है। लेकिन प्रवास की पीड़ा समेटे इस साहित्य से, इस वेदना से, सूरीनाम के बाहर की दुनिया आज भी उतनी परिचित नहीं है। प्रवास की यही पीड़ा इस पुस्तक की विषय-वस्तु भी है और विशेषता भी। इसे विश्व के हिंदी भाषी समाज के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त डॉ. विमलेश कांति वर्मा और राजनयिक के रूप में सूरीनाम के हिंदी सेवियों के संपर्क में रहीं श्रीमती भावना सक्सैना ने
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भाषाई अकादमी का दुरुपयोग?

इतना अवश्य हुआ कि केजरीवाल- नीतीश को एक साथ मंच पर लाकर अकादमी ने अपने अध्यक्ष का काम कर दिया। मैथिली भोजपुरी अकादमी के मंच के इस दुरुपयोग पर मुझे हरिशंकर परसाईं का एक लेख – हम बिहार से चुनाव लड़ रहे हैं - का स्मरण हो आया है। अपने उस लेख में परसाईं जी ने कई चुटीले वाक्य लिखे हैं जो आज भी वर्षों बाद मौजूं हैं – ‘मेरे नाम, काम,, धाम सब बदल गए हैं। मैं राजनीति में शिफ्ट हो गया हूं
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शास्त्री जी का बयान

शास्त्री जी को सामने देख वे औरों को डांटना छोड़ उन पर पिल पड़े, ‘ क्यों शास्त्री जी! मन तो करता है तुम लोगों का वेतन ही बंद कर दूं पर ..... ये मैं क्या सुन रहा हूं? यार! हद हो गई! शिच्छामित्र कहलाते हो, शिक्षा के नाम की पूरी कचैरी खाते हो और शिच्छा को ही चूना लगाते हो? यार, सच कहूं , तुम लोगों के अपना तो नाक है ही नहीं, पर तुम लोगों ने तो शिच्छा विभाग की नाक भी कटवा कर रख दी
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हमला

सिनेमा में रंगीन युग आने के बाद किए गए वादे ' कलर्ड ' तितलियों के रूप में चारो ओर मँडरा रहे थे। इसी तरह पूरा दिन निकल गया और इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। पर रात के बारह बजते ही सभी तितलियों का कायांतरण हो गया और वे टिड्डियाँ बनकर लोगों पर हमले करने लगीं। उनके निशाने पर विशेष करके मंत्री , राजनेता , और अधिकारी थे। वे घरों में घुस-घुस कर सोए हुए लोगों पर हमले करने लगीं। चारो ओर हाहाकार मच गया
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पाकिस्तान में घुसकर दाऊद को मारना भारत की जिम्मेदारी

यह दुनिया के इतिहास में कोई नया या अनोखा काम नहीं होगा, अधिकतर देश अपना बस चलने पर ऐसा करते हैं, और हमारा मानना है कि अगर दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान में रखा गया है, तो भारत को एक फौजी कार्रवाई करने का, या किसी भाड़े के हत्यारे को लेकर दाऊद इब्राहिम को खत्म करने का एक राष्ट्रीय-हक भी बनता है, और ऐसा करना उसकी राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी बनती है। अब ऐसा करना कूटनीति के खिलाफ हो सकता है, नैतिकता के खिलाफ हो सकता है
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मेरी कैलाश मानसरोवर यात्रा

वहाँ के डाक्टर तीर्थयात्रियों को ऊँचे पर्वत पर होने वाली सामान्य बीमारियों की जानकारी और उनसे बचाव की जानकारी देते है। तीसरे दिन भारत के विदेश मंत्रालय के सक्षम अधिकारी तीर्थयात्रियों को संबोधित करते है। तत्पश्चात प्रत्येक तीर्थयात्री को भारत में परिवहन, आवास, भोजन हेतु शुल्क एस। टीडीसी (20,000 रू नाथुला दर्रा के लिए) / के एम वी एन (30,000 रू। लिपुलेक दर्रा के लिए) जमा करवाया जाता है
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कौन है वह अदृश्य शक्ति!

दूसरी चीज है, वह है खुफिया सूचनाओं की कमी। इसका एक ताजा उदाहरण हाल में जंगलमहल में देखने को मिला, जहाँ माओवादी पुनः सर उठा रहे हैं। माओवादियों के उपस्थित होने की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं, पर उनके नेता कौन हैं, यह खुफिया विभाग को पता नहीं है। यह एक विचित्र बात है, लेकिन अपनी रणनीति में जो परिवर्तन वे लाए हैं, वही शायद इसके लिए जवाबदेह है
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महाकवि और महात्मा ही नहीं, महान लोक-शिक्षक भी थे तुलसी

पटना। राम को जन-जन के मन-प्राण में प्रतिष्ठित कर, भारतीय समाज को गहरे अवसाद से निकाल कर जीवन के प्रति सकारात्मक उत्साह भरनेवाले संत-शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास, एक महाकवि और महात्मा ही नहीं, महान लोक-शिक्षक भी थे। उनकी अद्भुत साहित्यिक-प्रतिभा और कवित्त-शक्ति का हीं परिणाम है कि श्री राम समाज के एक आदर्श और मर्यादा के पर्याय के रूप में ही नही अपितु ‘ब्रह्म’ के साकार रूप में प्रतिष्ठित हो गये
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इसके दाम सरहद के दोनों तरफ महज गरीब चुकाने जा रहे हैं

दोनों देशों के हर तरह के शांतिपूर्ण संबंध चाहती है, वहीं पर गिने-चुने बड़बोले-बकवासी, हमलावर तेवरों वाले लोगों को सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने का सामान दोनों देशों ने दे दिया है। कहां तो एक तरफ आतंक को खत्म करने के लिए दोनों देशों के दो सबसे बड़े सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत होने जा रही थी
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रामशरण शर्मा ने धर्मनिरपेक्ष व वैज्ञानिक इतिहास लेखन का सूत्रपात किया

पटना। रामशरण शर्मा ऐसे इतिहासकार थे जिन्होंने इतिहास लेखन के लिए पहले टेक्स्ट, फिर सिक्कों, अभिलेखों एवं पुरातात्विक श्रोतों केा आधार बनाकर लिखा। वे अपने छात्रों से भी कहा करते थे कि मौलिक श्रोतों की तलाश करो क्योंकि इतिहास में सबसे बड़ी चीज साक्ष्य होता है। बिना साक्ष्य के इतिहास पर बात होगी तो इतिहास कमजोर हो जाएगा
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आओ, हिंदी की भी सोच लें भाई

हिंदी आज भी देश की राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी तो इसके कारणों पर विचार करना होगा। देश की आजादी के बाद आखिर क्या हमारी सोच, एकता और सद्भावना के सूत्र बदल गए हैं? क्या आज हम ज्यादा विभाजित हैं और अपनी क्षेत्रीय अस्मिताओं को प्रति ज्यादा आस्थावान हो गए हैं? राष्ट्रीयता का भाव और उसकी भावना कम हो रही है? अगर ऐसा हुआ है तो क्या इन आजादी के सालों में हमने अपनी जड़ों से दूर जाने का काम किया है
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पढ़ो पढ़ो


मोदी के मस्जिद चले जाने पर हड़बड़ाए आलोचक समझें, डाका तो नहीं डाला, चोरी तो..

ऐसे में भारत के बहुत से समझदार लोगों का यह भी मानना है कि चाहे प्रधानमंत्री के ओहदे की वजह से ही सही, अगर मोदी देश और दुनिया के मुस्लिमों को कुछ बेहतर समझ रहे हैं, तो यह नई समझ मोदी के अपने समुदाय, और बाकी समुदायों के बीच एक बेहतर तालमेल में मददगार होगी। कुछ वामपंथियों का यह मानना है कि धार्मिक आधार पर भेदभाव करने वाले कुछ आक्रामक हिंदू संगठन हिंदुओं को मुस्लिमों से इतने परे रखने की रीति-नीति का इस्तेमाल करते हैं
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निज निज पानीपत का विमोचन

बैंगलुरु। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा बैंगलुरु की होटल ललित अशोक में नेवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन के सौजन्य से आयोजित प्रथम राजभाषा सम्मेलन के भव्य आयोजन में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड,लिंगराज क्षेत्र के राजभाषा अधिकारी श्री दिनेश कुमार माली द्वारा ओड़िया भाषा के प्रख्यात लेखक स्वर्गीय जगदीश मोहंती के उपन्यास 'निज निज पानीपत' का हिन्दी अनुवाद “अपना-अपना कुरुक्षेत्र” का लोकार्पण कोल सचिव श्री अनिल स्वरूप व नेवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन के अध्यक्ष-सह-प्रबंध श्री बी.सुरेन्द्र मोहन के कर कमलों द्वारा हुआ
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नाग पंचमी, मुलायम और नारायण दत्त तिवारी

लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तारी से नाराज भाजपा ने केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार से और उत्तर प्रदेश में मुलायम सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई थी तब। मुलायम ने धर्म निरपेक्षता की दुहाई दे कर अपनी सरकार बचाने के लिए राजीव गांधी से मिल कर कांग्रेस का समर्थन मांगा
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