SrijanGatha

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अन्तरराष्ट्रीय मंच


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शहरों को डूब से बचाना आसान इसलिए नहीं है...

खाली पड़ी किसी सरकारी जमीन पर कई-कई मंजिल की इमारत ऐसे इस्तेमाल के लिए बनाने की योजनाएं चल रही हैं जिनके बन जाने पर वहां रोजाना दसियों हजार लोगों का आना-जाना बढ़ जाएगा। इनका बोझ, वहां पर रहने और काम करने वालों का बोझ आसपास की जो सड़कें आज भी जाम हैं, उन्हीं पर पड़ेगा। लेकिन जिन संस्थाओं को ऐसी योजनाओं से कमाई होगी, वहां बैठे लोग कमाई की किसी संभावना को छोडऩा नहीं चाहते हैं। अब यह कमाई संस्था की होगी या निजी होगी
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पानी के बूटे

मैं और मेरी बेटी सुमन अकेले डरे हुए से चीख रहे है मैं घबरा कर चारों ओर देखती हूँ खोजती हूँ। कहां चले गए सोमेश !! हमें ऐसे अकेले छोड़ कर। नाव लहरों से टकरा कर डूबने को हें, तभी सुमन अपने छोटे छोटे हाथों से पतवार थाम कर नाव सम्हाल लेती है
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मजदूर के बच्चों ने आईआईटी पहुंचकर खड़े किए कुछ सवाल

भारतीय संविधान के मुताबिक यहां के बच्चों को अवसरों की समानता की जो बात कही जाती है, वह बात महज बात है, और असल जिंदगी में उसका कोई मतलब नहीं है। जब एक मजदूर के बच्चे उन बच्चों से मुकाबला करते हैं जिनको लाखों रुपये साल की कोचिंग नसीब है, तो फिर मजदूर के कोई एक-दो बच्चे भले ही कामयाबी पा जाएं
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कला, संस्कृति से जुड़े संस्थाओं का भगवाकरण बंद करो

पटना। कला व संस्कृति के देश भर में जितने संस्थान हैं उन सबका भगवाकरण व सांप्रदायिकरण किया जा रहा है। पूणे फिल्म इंस्टीट्यूट, चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी, सेंटर बोर्ड फाॅर फिल्म सर्टिफिकेशन में ऐसे – ऐसे लोगों केा सर्वोच्च पदों पर बिठाया गया है जिनका कला-संस्कृति के क्षेत्र में केाई योगदान नहीं है।
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ऐसे कीबोर्ड होंगे तो मॉनिटर की ज़रूरत कहां रह जाएगी!

एक नए कीबोर्ड का प्रयोग करके आप कंप्यूटर के साथ मॉनिटर के प्रयोग की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त हो सकते हैं। 'किबोजेट' नाम का यह कीबोर्ड इसलिए खास है क्योंकि उसमें एक प्रोजेक्टर लगा हुआ है। यह प्रोजेक्टर आपके सामने वाली दीवार पर ठीक वही चित्र प्रोजेक्ट करने में सक्षम है, जो आप अब तक अपने मॉनिटर में देखते आए हैं
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हिंदी के चंबल का एक बाग़ी मुद्राराक्षस

माकपा एम को वह भाजपा एम कहने से भी नहीं चूके। सब जानते हैं कि मुद्राराक्षस एक समय अमृतलाल नागर के शिष्य थे। न सिर्फ़ शिष्य बल्कि उन का डिक्टेशन भी लेते थे। नागर जी की आदत थी बोल कर लिखवाने की। बहुत लोगों ने नागर जी का डिक्टेशन लिया है। मुद्रा भी उन में से एक हैं। मुद्रा नागर जी के प्रशंसकों में से एक रहे हैं।
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पुर्नप्रकाशन से क्या हासिल?

इसका एक और पहलू भी है वो यह है कि हिंदी में इस वक्त कम से कम सौ साहित्यक पत्रिकाएं निकल रही होंगी। जितनी रफ्तार से साहित्यक पत्रिकाएं बंद हो रही हैं उसी रफ्तार से नए लोग नई साहित्यक पत्रिकाओं का प्रकाशन भी कर रहे हैं। इसका अपना एक अलग अर्थशास्त्र है। बाजार को पानी पी पी कर कोसनेवाले लोग बाजार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साहित्यक पत्रिकाओं के मार्फत अपनी साहित्यक दुकान सजाने के लिए बेताब नजर आते हैं
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अशोक माहेश्वरी वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोनीत

दिल्ली। हिंदी के प्रतिष्ठित प्रकाशन राजकमल, राधाकृष्ण और लोक-भारती के निदेशक श्री अशोक माहेश्वरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए विगत 10 वर्ष से सक्रिय संस्था 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन' का वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है
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यह मोदी का दिन है, लेकिन किसी पर थोपने का नहीं...

उसे तमाम लोगों पर बलपूर्वक या नियम-कानून बनाकर नहीं लादा जा सकता। यह कुछ उसी तरह का होगा जिस तरह की अमरीका इराक जैसे देशों पर अपने लड़ाकू विमानों से बमों के साथ लोकतंत्र बरसाने का दावा करता है। भारत के लोकतंत्र में लोगों के सामने विकल्प रखे जा सकते हैं, लेकिन उनको न मानने वाले लोगों को गद्दार कहना, देश छोड़कर जाने को कहना, उनको डूब मरने को कहना एक बहुत ही हिंसक साम्प्रदायिकता है
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लातेहर मुठभेड़

यह निशानी है उनके कमजोर होने की। लेवी का घुन माओवादी पार्टी को काफी हद तक चाट चुका है। फिर भी आज भी वे इसे पार्टी चलाने का एकमात्र जरिया मानते हैं। कैसे? यह वे स्वंय बता सकते हैं। लेवी सुरक्षा देने के एवज में दी जाती है। क्या माओवादी पार्टी ने सेठ-साहूकारों केा सुरक्षा देने का बीड़ा उठाया है
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जापान का लैंडमार्क है माउंट फ्यूजी

मैं उस स्वप्न गली से गुजरना चाहती थी जो बरसों पहले मैंने जापान के नक्शे में खुद ही बना ली थी। बस एक घने जंगल के बीच से बनाई सड़क पर से गुजर रही थी। ऊँचे ऊँचे दरख्तों के विस्तार में माकोहारी, एडो और आरा नदियों का शोर हलका हलका सुनाई दे रहा था। मैंने खिड़की के उस पार नदियों को देखना चाहा पर वे कहीं दिखी नहीं लेकिन हवा के जरिए अपनी बूँदे भेज जैसे उन्होंने जापान में मेरा स्वागत किया हो। मैंने आँखें मूँदकर गहरी साँस ली और खुद को एक पल के सुकून में पहुँचा दिया
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उम्र साठ की


क्या मोदी के मन की बात में कभी देश के मन की बात को भी जगह मिलेगी?

नरेन्द्र मोदी तो इतना-इतना बोलते हैं कि उनके एक भाषण में से सुर्खियां ढूंढने में अखबार वालों की जान निकल जाती है। लेकिन इसके बाद भी वे अपनी पार्टी के, अपनी सरकार के लोगों के बारे में उन मुद्दों पर कुछ नहीं बोलते, जिन मुद्दों पर बोलने की सबसे अधिक जरूरत है, और जिन मुद्दों पर देश-विदेश के लोग सचमुच ही यह जानना चाहते हैं कि इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्या कहना है
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रोहंगिया समुदाय की अंतहीन त्रासदी

ब तस्कर अंतरराष्ट्रीय समुद्र में बड़े जहाजों में लोगों को रख कर उनसे और उनके रिश्तेदारों से फिरौती में मोटी रकम वसूलते हैं। खबरों के अनुसार, तस्कर छोटे बच्चों को भी चालाकी से बंधक बना लेते हैं। इन जहाजों से बचाये गये लोगों ने तस्करों द्वारा अमानवीय शोषण की अंतहीन कहानियां सुनायी हैं। हजारों लोग अभी भी इन जहाजों पर फंसे हुए हैं
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हिंदी साहित्य और भारतीयता का सार

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के शब्दों में कहें तो ‘असल में दक्षिण का वैष्णव मतवाद ही भक्ति आंदोलन का मूल प्रेरक है। बारहवीं शताब्दी के आसपास दक्षिण में सुप्रसिद्ध शंकराचार्य के दशवनार्क मत अद्वैतवाद की प्रतिक्रिया शुरू हो गई थी। अद्वैतवाद में, जिसे बाद के विरोधी आचार्यों ने मायावाद भी कहा है, जीव और ब्रह्म की एकता भक्ति के लिए उपयुक्त नहीं थी, क्योंकि भक्ति के लिए दो चीजों की उपस्थिति आवश्यक है, जीव की और भगवान की। प्राचीन भागवत धर्म इसे स्वीकार करता था
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स्कूलें शुरू, और समाज की जिम्मेदारी

समाज की यह जिम्मेदारी मानते हैं कि अपने आसपास के सभी बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की एक सामूहिक और सामाजिक जिम्मेदारी पूरी करे। ऐसा न होने पर कम पढ़े-लिखे बच्चे अगर राह से भटकते हैं, तो वे बाकी समाज के लिए भी एक दिक्कत बन सकते हैं। इसलिए किसी भी समाज के ताकतवर और संपन्न तबके के लिए भी यह जरूरी है कि कमजोर और विपन्न तबका भी अपनी पूरी संभावनाओं का मौका पा सके
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ऋषितुल्य, तपस्वी दिवाकर त्रिपाठी से मिलना

बीते पैतीस सालों से उन का यह क्रम कभी टूटा नहीं है, आगे भी भला क्या टूटेगा ! अब तो वह जैसे इस हनुमान मंदिर के लिए ही जीते हैं। आप हनुमान मंदिर अगर जाएंगे तो वह कोई साधारण काम भी करते दिख सकते हैं, वहां की सफाई जैसे काम भी, जूठे पत्तल अदि उठाते भी देख सकते हैं। और जो इस हनुमान मंदिर का नवीनीकरण और इस का बदला स्वरूप, बदली व्यवस्था आप को अच्छी लगे तो आप एक बार दिवाकर त्रिपाठी को ज़रुर याद कर लीजिए
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गिरा दो, गिरा दो जनकवि का घर !

बांदा। यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिवंगत जनकवि केदारनाथ अग्रवाल के बांदा स्थित घर को व्यावसायिक प्रयोजनों से ज़मींदोज़ करने की तैयारियाँ चल रही हैं। केदार बाबू ने जिस घर में जीवन के 70 साल गुज़ारे, जहाँ हिंदी के सभी प्रमुख साहित्यकारों का लगातार आना-जाना रहा, जिस घर में आज भी उस महान कवि का पुस्तकों-पत्रिकाओं का संचयन-बदतर हाल में ही सही - मौजूद है
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क्यों नहीं मिलते मुसलमान अंगदाता?

ये अंगदाता इस्लाम मानने वाले अफ्रीका, एशिया या ब्रिटेन के निवासी हो सकते हैं। लेकिन सबसे गंभीर सवाल ये आड़े आता है कि क्या इस्लाम में अंगदान की इजाज़त है? इस बारे में मुस्लिम धार्मिक नेताओं की क्या राय है?
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दर्शक और विज्ञापनदाता दोनों के अनुकूल डिजिटल मीडिया

टेलीविजन के लिए अस्तित्व के संकट जैसी कोई चीज़ आने वाली है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कारोबार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। तकनीकी माध्यम सिर्फ दर्शकों को ही आकर्षित नहीं कर रहे, वे वहाँ चोट कर रहे हैं जहाँ दर्द ज्यादा होता है, यानी विज्ञापन। डिजिटल मीडिया ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विज्ञापनों से एक बड़ा टुकड़ा काट लिया है
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किस लालगढ़ पर फिल्म बननी चाहिए

ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस दुर्घटना में जिन निरपराधों ने अपनी जानें गवाईं क्या उनपर फिल्म नहीं बननी चाहिए? जनअदालत लगाकर जिनकी हत्या की गई क्या उन पर फिल्म नहीं बननी चाहिए? किसी कालखंड को उसकी सार्विकता में देखनी चाहिए, न कि एकांगी रूप में। एक गलत और दिगभ्रमित नेतृत्व में ”मसीहा“ ढूढ़ने से भी कोई फायदा नहीं है
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