वर्ष 8 माह 7 दिन 11
 चौथा नवगीत महोत्सव     स्वप्नदर्शी बाल-साहित्यकार सम्मेलन     कॉरपोरेट लूट और फासीवाद के खिलाफ कवियों और शायरों का बड़ा जुटान     सामुदायिक रेडियो की प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन     समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी ने कला रसिकों का मन मोहा     समकालीन साहित्य की चुनौतियाँ : एक चर्चा     मंटो का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
<< 1 2 3 >>

क्या शारदा घोटाले की राशि से आतंकियों को मदद पहुँचाई गई थी?
पोन्जी स्कीम के साथ यह खासियत है। पश्चिम बंगाल में भी इससे पहले कई चिट फंड कम्पनियाँ लोगों को ठग चुकी है। अतः शारदा प्रकरण अपने आप में आश्चर्यजनक नहीं है। जो बात आश्चर्यजनक है वह है तृणमूल नेताओं का इसमें संलिप्त होना। इतने बड़े पैमाने पर शासक दल के नेता किसी घोटाले में अब तक शामिल नहीं हुए थे। अब तक की स्थिति यह है कि सी.बी.आई. दूसरा आरोप पत्र पेश करने जा रही है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 24 नवम्बर 2014,
विश्वजीत सेन

मने करि एईखाने शेष
वीन्द्र संगीत के नाम से यहाँ तक कि नितान्त ही घरु गोष्ठियों में भी गीतान्जलि के गीतों का गायन होता है। बंगला भाषा भाषियों में यह गौरव का विषय है कि वे इन गीतों का गान कर सकते हैं। दूसरा कारण है नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत गीतान्जलि की विश्व व्यापी ख्याति। मैं समझता हुँ विश्व में कोई भी भाषा ऐसी नहीं बची होगी जिसमें गीतान्जलि का अनुवाद न हुआ होगा ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 23 नवम्बर 2014,
सुरेश कुमार पंडा

दहेज
वे एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। बिना नहीं रह सकने का मतलब अकेले रहने से है.... अकेलेपन से बचने हेतु वे साथी बदल लेते थे, समय आने पर मां-बाप ने लड़के की शादी दहेज के लिए कर दी। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, लघुकथा, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 23 नवम्बर 2014,
यशवन्त कोठारी

धर्म, आध्यात्म के नाम पर हिंदुस्तान में जुर्म, आतंक
दूर दक्षिण के चेन्नई में शंकराचार्य को कत्ल के एक मामले में गिरफ्तार करके जेल में रखा गया है। धार्मिक मतभेदों को लेकर भी सिखों के दो समुदायों के बीच हिंसा इतनी बढ़ी कि निरंकारी गुरू की हत्या कर दी गई थी। और एक धर्म के भीतर अगर देखें तो धर्म की मंजूरी से चलती जाति व्यवस्था के तहत दलितों की हत्या आए दिन होती है, और शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है कि किसी दलित महिला से गैरदलित बलात्कार न करें ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 22 नवम्बर 2014,
सुनील कुमार

चौथा नवगीत महोत्सव
लखनऊ । विभूति खण्ड स्थित 'कालिन्दी विला’ के परिसर में दो दिवसीय 'नवगीत महोत्सव - 2014' का शुभारम्भ 15 नवम्बर को हुआ। 'अनुभूति', 'अभिव्यक्ति' एवं 'नवगीत की पाठशाला' के माध्यम से वेब पर नवगीत का व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु प्रतिबद्ध 'अभिव्यक्ति विश्वम' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल अपनी रचनात्मकता एवं मौलिकता के लिए जाना जाता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 22 नवम्बर 2014,
-

प्रेमचंद ने 'यहां से हासिल की थी शिक्षा'
आरोप लगने लगे कि हिंदू छात्र सिर्फ़ कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए मदरसे की डिग्री का सहारा लेते हैं। लेकिन इन आरोपों का खंडन करते हुए मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि एक हिंदू छात्र ने उनसे आकर शिकायत की थी कि उसे 'आलिम' के इम्तेहान का प्रवेश पत्र नहीं मिला ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 21 नवम्बर 2014,
सलमान रावी

कूड़ा
उसी शाम श्री मान चाँद जब स्कूटर पर सवार होकर आफिस से घर आ रहे थे, तो उनके दिमाग में कूड़े की समस्या के साथ-साथ बांग्ला-देशी ठेली वाले की बेईमानी भी मंडरा रही थी। स्कूटर चलाते-चलाते उनका ध्यान बंट गया और वे एक साइकिल वाले से टकराने के कारण जमीन पर गिर गए। हेल्मट की वजह से सर तो बच गया पर टांग में चोट आ गयी तो वे उठ नहीं पाये ... पढ़िए
0 टिप्पणी, लघुकथा, (33 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 20 नवम्बर 2014,
सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

किससे जांच कराएं और कितना मुआवजा दें?
इस जुर्र्म के बाद सरकार के दो फैसलों को लेकर कुछ सोचने की जरूरत है। एक तो यह कि न्यायिक जांच जिस रिटायर्ड महिला जज को दी गई है, उसे दी गई पिछली जांच का क्या तजुर्बा रहा है, और उसके चलते क्या राज्य सरकार को कोई सबक लेना चाहिए था? दूसरी बात यह कि इस नसबंदी-हादसे के बाद हर मृतक महिला के परिवार को पहले चार लाख रूपए की घोषणा हुई, और अब उनके बच्चों के नाम दो-दो लाख रूपए और जमा करने की घोषणा की गई है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (20 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 20 नवम्बर 2014,
सुनील कुमार

कन्टेन्ट, मोटीवेशन और बिजनेस मॉडलः हिंदी वेब की चिंताएँ
नतीजा है, हिंदी में नई-नई, ताजगी से भरी वेबसाइटों का आगमन। इनमें मोहल्ला, भड़ास4मीडिया, विस्फोट, तरकश, नुक्कड़, मीडिया खबर, देशकाल, जनादेश, डेटलाइन इंडिया, परिकल्पना, हस्तक्षेप, प्रवक्ता, हिंदी होमपेज, सामयिकी, हिंद युग्म, मीडिया दरबार, चौराहा, मीडिया सरकार, चौराहा, फुरसतिया, सृजनगाथा, युगजमाना, जनता जनार्दन, अर्थ काम, साहित्य कुंज, साहित्य शिल्पी, तकनीक.ऑर्ग वगैरह शामिल हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, टेक-वर्ल्ड, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 19 नवम्बर 2014,
बालेन्दु शर्मा दाधीच

स्वप्नदर्शी बाल-साहित्यकार सम्मेलन
तालचेर। नेशनल थरमल पावर प्लांट, कनिहा के दुर्गा-मंडप में 9 नवंबर 2014 को “चंद्रमा राज्य स्तरीय सांवत्सरिक महोत्सव 2014” मेरे लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। तीन कारणों से। पहला, ओड़िया भाषा के महान प्रबुद्ध समीक्षक डॉ॰ प्रसन्न कुमार बराल का बाल-साहित्य पर दिया जाने वाला उद्बोधन। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (72 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 19 नवम्बर 2014,
दिनेश माली

नेहरू की पार्टी वाले प्रणब द्वारा मंदिर का शिलान्यास...
भारत की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल न उठे इसलिए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के नवीनीकरण और पुनस्र्थापन कमेटी से खुद को अलग कर लिया था। नेहरू ने सौराष्ट्र (गुजरात के गठन से पहले) के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मंदिर निर्माण और उद्घाटन में सरकारी पैसा खर्च न करने का निर्देश दिया था। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से मंदिर का उद्घाटन न करने का आग्रह किया था ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (27 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 18 नवम्बर 2014,
सुनील कुमार

चारु मजुमदार के जमाने में पुलिस के अनुभव
स्थानीय स्तर पर स्थायी कमिटियाँ नहीं होती थी, दस्ते होते थे। चरम रूप से अराजक इस अवधारणा के जन्मदाता भी आप उन्हें कह सकते हैं। आजतक उनकी अन्य अराजकताओं के साथ इस अराजकता को भी लोग ढो रहे हैं। हिटलर के युग में कम्युनिस्ट भूमिगत थे, फिर भी इन परिपाटियों को वे बरकरार रखे थे। केवल चारु बाबु ने ही इसे असंभव पाया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 18 नवम्बर 2014,
विश्वजीत सेन

बिगाड़ के डर से पुरस्कार का सच न कहें?
धंधा है। शुद्धरूप से धंधा। आखिर ज्ञानपीठ हो या अज्ञानपीठ या कोई भी पीठ, यदि वह सचमुच साहित्य को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार देती है तो अपने समय के कवियों को क्यों ? क्यों नहीं जो पहले के महान कवि हैं उनके वंशजों और उत्तराधिकारियों में जो हों उन्हें बुलाकर सबसे पहले सम्मानित करती ? उसे भी छोड़िये। पहले के कवियों को पुरस्कार नहीं तो अब क्यों ? यह उम्र के आखिरी पड़ाव पर या शुरू में ही कवियों को पुरस्कृत करने की जरूरत क्यों ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (37 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 17 नवम्बर 2014,
गणेश पाण्डेय

नसबंदी जैसा हादसा सरकार के लिए सबक और सुधार का भी
अगर अपने आपको यह सरकार इस बार के तजुर्बे से सुधारती है, तो ये मौतें प्रदेश के बाकी मरीजों की भलाई के लिए शहादत की तरह होंगी, वरना तो सरकार का यह विभाग पिछले दस बरस से ऐसा ही चल ही रहा है। गलतियों और गलत कामों के तजुर्बों से सीखना मानो सरकार ने सीखा ही नहीं है, इसीलिए कुछ विभागों में लगातार बदहाली चलती है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (27 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 16 नवम्बर 2014,
सुनील कुमार

अगर-मगर किंतु -परंतु करना छोड़िए भी बिटिया है नहीं है कोई जंतु
कुंडली वगैरह की भूल भुलैया में घूमते-घुमाते किसी पुल, सड़क या किसी बिल्डिंग का टेंडर हों। इन्हीं और ऐसी ही तमाम प्रवृत्तियों पर चोट करती बेटी के प्यार में पगी पिता की बेचैनी को बांचती शैलेंद्र की यह छोटी-छोटी कविताएं बड़े-बड़े घाव ले कर जीती हुई कविताएं हैं। यह कविताएं इस समाज के मुंह पर एक बड़ा जूता भी हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (50 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 15 नवम्बर 2014,
दयानंद पांडेय

ईश्वर : एक अवैज्ञानिक धारणा-1
बा॓यस के सूत्र को ईश्वर की परिगणना के लिए आधार बनाते समय अनविन यह दावा कतई नहीं करता कि उसने जो सूत्र दिया है, उससे सभी सहमत होंगे। वह स्वयं मानता है कि विज्ञान और गणित के माध्यम से ईश्वर की संभाव्यता को सिद्ध करना बहुत मुश्किल भरा काम है। उसका बस इतना दावा है कि वे लोग जो ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखते हैं, उसके तथाकथित गणितीय सूत्र का सहारा लेकर अपने मत को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आखर-अनंत, (46 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 15 नवम्बर 2014,
ओमप्रकाश कश्यप

एशिया पर ध्यान केंद्रित करें ओबामा
ओबामा की समस्याएं मोटेतौर पर उनकी अपनी पार्टी में ही है, जिसने पराजयवादी और संरक्षणवादी नजरिया अपना लिया है। यानी उन्होंने टिप्पणीकार पैट बुकानन के लिए फ्रेंकलीन रूजवेल्ट अौर जॉन केनेडी की परंपरा को त्याग दिया है। अब तक तो ओबामा चुनौती लेने के प्रति उदासीन रहे हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (42 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 14 नवम्बर 2014,
फरीद ज़कारिया

सरकार को चिकित्सा सेवा की बदहाली पर सोचना चाहिए...
प्रदेश के सैकड़ों निजी अस्पताल इस कार्ड के आधार पर इलाज के लिए मान्यता प्राप्त हैं। नतीजा यह हुआ कि हजारों महिलाओं के गर्भाशय निकालकर फेंक दिए गए, क्योंकि उनके परिवार के कार्ड पर खर्च की ताकत बची हुई थी। अब आंखों के ऑपरेशन और नसबंदी ऑपरेशन में सरकारी शिविरों और अस्पतालों की बदहाली की खबरों से यह बात और होने जा रही है कि अब लोग इन साधारण ऑपरेशनों के लिए भी निजी अस्पतालों की तरफ जाएंगे ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (38 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 14 नवम्बर 2014,
सुनील कुमार

बाल पत्रकारिता : संभावना एवं चुनौतियां
मध्यप्रदेश सहित देश के अनेक हिस्सों में पत्रकारिता के नये हस्ताक्षर अपनी प्रतिभा से समाज को परिचित करा रहे हैं। अभी वे उडऩा सीख रहे हैं। जब वे उड़ान भरने लायक हो जायेंगे तो दुनिया उनके हुनर की कायल हो जायेगी। अलग अलग हिस्सों में, अलग अलग लोगों से चर्चा करने पर यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि पत्रकारिता के ये नये हस्ताक्षर नगरों और महानगरों में तैयार नहीं हो रहे हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (45 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 14 नवम्बर 2014,
मनोज कुमार

बहरी अलंग का त्याग-सुख
वह पंजीकृत गरीब नहीं है,इसलिए उसे अपना राशन पंजीकृत गरीबों से चौगुने मूल्य पर खरीदना पड़ता है।उन्हें जो चावल दो रुपये में मिलता है,उसे वे मंगरू को आठ रुपये में बेचते हैं।मंगरू को बाजार में कोई भी चावल इसके दुगुने दाम पर भी नहीं मिलता है,इसलिए वह खुश है कि सरकार उसे भले ही गरीब न मानती हो ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जाग मछिन्दर गोरख आया, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 13 नवम्बर 2014,
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

कॉरपोरेट लूट और फासीवाद के खिलाफ कवियों और शायरों का बड़ा जुटान
लखनऊ।16 मई के बाद केन्द्र में अच्छे दिनों का वादा कर आई नई सरकार ने जिस तरह से सांप्रदायिकता और कॉरपोरेट लूट को संस्थाबद्ध करके पूरे देश में अपने पक्ष में जनमत बनाने की आक्रामक कोशिश शुरू कर दी है, उसके खिलाफ जनता भी अलग-अलग रूपों में अपनी चिन्ताओं को अभिव्यक्ति दे रही है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (50 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 13 नवम्बर 2014,
शाहनवाज़ आलम

<< 1 2 3 >>

Everyday, New Posts, Like, News, Poet, Story, Gazal, Song, novel, blog, Article, music, lyrics, books, review,conference, training etc. On srijangatha Magazine


स्याह सफ़ेद पुस्तक-संसार नया नज़रिया विचारार्थ कभी नीम-नीम कभी शहद-शहद
जाग मछिन्दर गोरख आया
बुद्धिनाथ मिश्र
बुद्धिनाथ मिश्र
विचारार्थ
बृजकिशोर कुठियाला
बृजकिशोर कुठियाला
स्याह सफ़ेद
सुनील कुमार
सुनील कुमार
समय-समय पर
अखिलेश शुक्ल
अखिलेश शुक्ल
ओडिया-माटी
दिनेश माली
दिनेश माली
नया नज़रिया
जगदीश्वर चतुर्वेदी
जगदीश्वर चतुर्वेदी
अतिक्रमण
संजय द्विवेदी
संजय द्विवेदी