वर्ष 8 माह 4 दिन 18
 डॉ. मोटुरी सत्यनारायण पुरस्कार-2011     डॉ. गिरी के सामाजिक दृष्टिकोण पर चर्चा संपन्न     नामवर सिंह के जन्म दिन पर काव्य पाठ     सरकती परछाइयां का विमोचन     न्यू मीडिया ने प्रोडक्शन को बनाया आसान : डॉ. शशिकला     पत्रकारिता कोश का 14वां अंक विमोचित     मीडिया का सदुपयोग होना चाहिये: ज्ञान चतुर्वेदी   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
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गणेशोत्सव के उदार सांस्कृतिक पहलू से सीखने की जरूरत...
जिस उदार सोच के चलते सभी समाजों के लोग इसमें शामिल होते हैं। हिन्दू धर्म सहित सभी धर्म के लोगों के लिए इस त्यौहार को लेकर यह सोचने की जरूरत है कि क्या अलग-अलग धर्मों के त्यौहारों को सिर्फ उन धर्मों के मानने वाले लोगों तक सीमित रखना ठीक है? या फिर धर्मों के सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को बढ़ावा देकर उन धर्मों के प्रति भी बाकी लोगों की समझ बढ़ाना बेहतर है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 1 सितम्बर 2014,
सुनील कुमार

धार्मिक असहिष्णुता
सनातन धर्म जिन देवी देवताओं को मान्यता देता है उसमे शिरडी के साँई बाबा शामिल नहीं हैं, यदि यह मान कर चालें तो साँई भक्त सनातन धर्मी नहीं कहला सकते, फिर उनका धर्म हिन्दू नहीं है, तो क्या है? शिरडी मे सभी पूजा आरती और कर्मकाँड सनातन पद्धति से ही होते हैं। आर्य समाजी भी सब देवी देवताओं की पूजा छोड़कर केवल हवन करते हैं, वो भी हिन्दू तो हैं ही पर सनातनी नहीं। राधास्वामी मत को मानने वाले भी गुरु को भगवान का दर्जा देते हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 1 सितम्बर 2014,
बीनू भटनागर

सामाजिक विकास और साहित्य का संदर्भ
विकास का चेहरा विषमता की आँच से झुलसा हुआ है। विकास के बड़े-बड़े आंकड़े पढनेवाले लोग भी विकास के इस झुलसे हुए चेहरे को देखकर डर जाते हैं। यह डर उन्हें विषमता बढ़ानेवाली प्रवृत्ति को रोकने के लिए बहुत उद्योगी या तत्पर नहीं बनाता है तो इसका कारण यह नहीं कि उनका डर नकली या नाटक है बल्कि इसका कारण उनका अपना वर्ग-चरित्र है। विकसित होने के बावजूद विषम समाज में जीने के लिए बाध्य है आज का मनुष्य। इसलिए आज का मनुष्य पहले के मनुष्य से अधिक संपन्न होने के बावजूद पहले के मनुष्य से कहीं अधिक दुखी और विपन्न है। संपन्नता उसके दुख को कम करने में किसी भी प्रकार से मददगार नहीं हो पा रही है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जनमन, (6 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 1 सितम्बर 2014,
प्रफुल्ल कोलख्यान

सुशान्त सुप्रिय की कविताएँ
0 टिप्पणी, कविता, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 31 अगस्त 2014,
सुशांत सुप्रिय

अम्मा के नीलकंठ विषपायी होने की अनंत कथा
बाबू जी ने मेरे पिता जी को भी पढ़ाया और मुझे भी। उन का पूरे परिवार पर इतना स्नेह था, इतनी ज़िम्मेदारी उठाते थे वह कि क्या कहें। अदभुत था उन का भाव भी सब को साथ ले कर चलने का। और इतना कि बताते हुए ज़रा संकोच होता है कि हम हाई स्कूल तक यह जान ही नहीं पाए कि हमारे वास्तविक पिता कौन हैं? ताऊ जी को बाबू जी कहता और पिता जी को बबुआ। घर में सभी बच्चों का संबोधन इन दोनों के लिए यही था ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (7 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 31 अगस्त 2014,
दयानंद पांडेय

उनका जल, उनका जंगल, उनकी जमीन हैं आदिवासी महिलाएँ
तेलुगू साथियों में यौन विचलन के मुद्दे को भी, सव्यसाची ने उठाया था। प्रभात खबर ने उनके पक्ष को सार्वजनिक किया। सव्यसाची के अनुसार तेलुगू कमांडर हमेशा अपने शरीर के प्राइवेट पार्ट की शेविंग करते हैं। वे महिला कामरेडों को भी ऐसा ही करने को कहते हैं। वे सामंती मालिकों की तरह महिलाओं के कपड़े उतारकर नहाने को कहते हैं। कपड़े उतारकर नहाने व क्रांति में क्या संबंध है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 31 अगस्त 2014,
विश्वजीत सेन

साई बाबा का आवेदन शंकराचार्य के नाम
आपकी संसद ने अध्यादेश जारी किया है कि किसी भी मंदिर में मेरा पूजन नहीं किया जायेगा। मैं आभारी हूं। आपने वही किया है जो मैं कहता रहा था। आपके इस कार्य की सराहना करता हूं तथा आपके लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। प्रार्थना करने का हक तो मुझे हासिल है ही क्योंकि इस बाबत किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार श्रीमान की ओर से नहीं किया गया है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, व्यंग्य, (37 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 30 अगस्त 2014,
शशिकांत सिंह शशि

हमारे 'लालच' का लाभ उठाते हैं वायरस निर्माता
कई बार जिस मासूम से सॉफ्टवेयर को आपने डाउनलोड किया, वह तो प्रत्यक्ष में तो छोटा सा काम करता है (जैसे कोई एनालॉग क्लॉक या सुइयों वाली आकर्षक घड़ी जो समय बताती रहती है), लेकिन पीछे ही पीछे वह बहुत ताकतवर वायरस प्रोग्राम से लैस होता है जो आपकी निगाह में आए बिना आपके कंप्यूटर का नियंत्रण किसी साइबर अपराधी के हाथ में दे सकता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, टेक-वर्ल्ड, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 30 अगस्त 2014,
बालेन्दु शर्मा दाधीच

इतिहास को जिया है: कृष्णा सोबती
लेखक जब कुछ नहीं भी लिख रहा होता है, तो भी अनजाने में वह अंतर्मन में कुछ न कुछ संजोता रहता है। कोई बहुत सोच-समझकर लिखता है, तो कोई सिर्फ जो देखता है उसे ही लिखता है। एक कहानी को जब आप अपने अनुभव (मित्रो मरजानी की कहानी यथार्थ है) से लिखते हैं, वह कुछ और होता है। कल्पना से लिखने पर वह कुछ और होता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कथोपकथन, (6 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 30 अगस्त 2014,
कृष्णा सोबती से स्मिता

डॉ. मोटुरी सत्यनारायण पुरस्कार-2011
दिल्ली। प्रवासी भारतीय वरिष्ठ कहानीकार तेजेन्दर शर्मा डॉ. मोटुरी सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित किए गए। आप समकालीन हिंदी कथा-साहित्य के अग्रणी लेखकों में सम्मिलित हैं। मूलतः पंजाबी भाषी श्री शर्मा के लेखन की माध्यम भाषा हिंदी रही है। इनकी कथात्मक कृतियों में ‘काला सागर’, ‘ढिबरी टाइट’, ‘बेघर आंखें’, ‘दीवार में रास्ता’ और ‘क़ब्र का मुनाफ़ा’ आदि प्रमुख हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 29 अगस्त 2014,
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शहादत की इज्जत नहीं, दुनिया जीतने का घमंड
उनकी दिलवाई गई हिफाजत तले महफूज बैठे हुए लोग अपनी कुर्सियां तोड़ते हैं, और शहादत के बाद परिवार के हक के साथ वैसा ही सुलूक करते हैं,जैसा कि किसी भी आम सरकारी फाईल के साथ करते हैं। यह देश कहने के लिए अपनी संस्कृति पर एक बेबुनियाद घमंड करता है, यह देश राष्ट्रवाद के उन्मादी नारे लगाते हुए पूरी दुनिया पर जीत हासिल करने, और दुश्मन को चीर देने की बात करता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 29 अगस्त 2014,
सुनील कुमार

विभाजन की सोच धुंधली हो चली है
तब तक हत्या और लूट का तांडव कम हो चुका था। मैंने हिंदुओं और मुसलमानों को वास्तव में आपस में लड़ते-झगड़ते नहीं देखा। लेकिन मैंने दर्द भरे चेहरे, औरतों और मर्दों को अपनी छोटी-मोटी चीजों से भरी गठरियां माथे पर उठाए और उनके पीछे डर से सहमे बच्चों को जाते देखा। हिंदू और मुसलमान, दोनों अपने चूल्हा-चक्की, घर-बार, दोस्त और पड़ोसियों को छोड़कर आए ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 29 अगस्त 2014,
कुलदीप नैयर

पंडितों की परीक्षा में धोती का प्रमाणपत्र!
काशी में मैथिल विद्वानों का बहुत पहले से अलग पहचान रही है। इसी प्रकार का सर्वोच्च सम्मान दरभंगा महाराज के हाथों भी दिया जाता था ।दरभंगा राज के संस्थापक महेश ठाकुर स्वयं नैयायिक थे। उन्होने पंडितों की भावी पीढ़ी तैयार करने के लिए शास्त्रार्थ की एक नियमित परीक्षा शुरू की, जिसका नाम ‘धौत परीक्षा’ था। इस परीक्षा में उत्तीर्ण विद्वान को महाराजा अपने हाथों एक जोड़ा धोती देते थे। मिथिला में इस परीक्षा की मान्यता इतनी अधिक थी कि जबतक यह धोती नहीं मिलती ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जाग मछिन्दर गोरख आया, (24 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 28 अगस्त 2014,
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

अभूतपूर्व चुनाव का अहम दस्तावेज 'मोदी लाइव'
चुनाव के दौरान की परिस्थितियों का बयान करते आलेखों में मीडिया गुरु संजय द्विवेदी ने नरेन्द्र मोदी के नाम पर बौद्धिक प्रलाप कर रहे बुद्धिजीवियों के चयनित दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऐसे लेखकों को 'सुपारी लेखक' बताया है। लेखक ने लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक तरीके से एक व्यक्ति के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाने वाले यूआर अनंतमूर्ति, अशोक वाजपेयी, नामवर सिंह, के. सच्चिदानंद और प्रभात पटनायक जैसे स्वयंभू बुद्धिजीवियों को आड़े हाथ लिया है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (20 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 28 अगस्त 2014,
लोकेन्द्र सिंह राजपूत

अच्छी कविता और संकोच के सागर में समाया इन मित्रों का कविता पाठ
कविता सुनना और सुनाना दोनों ही सौभाग्य और संयोग से ही हो पाता है। विजय पुष्पम पाठक ने यह संयोग और सौभाग्य एच एल परिसर स्थित अपने घर पर परोसा। राजेश्वर वशिष्ठ की कविताएं और उन का पाठ तो आज की शाम का हासिल था ही, दिव्या शुक्ला, प्रज्ञा पांडेय और विजय पुष्पम पाठक की कविताएं भी आज की शाम को सुरमई बनाने में पूरे सुर के साथ उपस्थित थीं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 27 अगस्त 2014,
दयानंद पांडेय

प्रेम, विवाह, और जुर्म से भारत में उपजतीं सामाजिक जटिलताएँ
हम दो धर्मों के लोगों के बीच, या दो जातियों के लोगों के बीच शादियों के हिमायती हैं, लेकिन जब देश का माहौल तनाव से भरा हुआ है, तो ऐसे प्रेम-प्रसंगों या शादियों के बाद अगर किसी जुर्म की नौबत आती है तो उसका असर पूरे समाज की साख पर भी पड़ता है। ऐसा किसी एक जाति के भीतर अधिक कन्याभू्रण हत्या होने से, या दहेज प्रताडऩा होने से भी होता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 26 अगस्त 2014,
सुनील कुमार

सभ्यता फिर भी उम्मीद से है
जरूरी नहीं कि बाजार से गुजरनेवाला हर आदमी खरीददार हो ही! आज बाजार में खरीददार बनकर घूमने का समय है। खरीददार भी साधारण नहीं, अपनी क्षमता से कई-कई गुना अधिक की खरीददारी के लालच और दुस्साहस से लबालब खरीददार! विवशता यह कि कुछ खरीदना हो तो, कुछ बेचना भी पड़ता है। ऐसे खरीददारों के सपनों की सरहद पर एक और बाजार होता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जनमन, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 26 अगस्त 2014,
प्रफुल्ल कोलख्यान

उतावले समाज के बीच बचपन
प्लेटो की विलक्षण मेधा के बारे में जन्म से ही भविष्यवाणी कर दी गई थी। जेम्स मिल ने अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचाना था और जैसा उसे वह बनाना चाहता था, वैसा उसने किया। फलस्वरूप बेटा जॉन स्टुअर्ट मिल महान दार्शनिक बना। जन्म के समय हर बालक नचिकेता और अभिमन्यु की भांति ही प्रतिभाशाली होता है। जब वह दुनिया में आता है तो किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है। सीधे प्रकृति के साथ उसका जुड़ाव होता है। उसके अतिरिक्त यदि किसी दूसरे से उसका अपनापा होता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आखर-अनंत, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 25 अगस्त 2014,
ओमप्रकाश कश्यप

अरविन्द बछाड़ की गिरफ्तारी
मिदनापुर के गोपीबल्लभपुर से कलकत्ता पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एस.टी.एफ) ने उन्हें गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें ओड़िसा पुलिस को सुपूर्द कर दिया गया। ओड़िसा के बारिपदा केन्द्रीय कारा में वे 4 वर्ष रहे। उसके बाद इस वर्ष के 23 मई को रिहा होकर घर लौटे। उत्तर प्रदेश मूल के होने के बावजुद उन्होंने बादुड़िया के समीप रूद्रपुर में अपना घर बनाया है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (36 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 25 अगस्त 2014,
विश्वजीत सेन

मोदी का 'प्रेमतीर्थ'
युवावस्था में लिखी गई संवेदना से भरी उनकी यह कहानियां प्रेम और अनुराग के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाती हैं। नरेंद्र मोदी की नजर में मातृप्रेम ही समस्त प्रेम का स्रोत है और इसकी तुलना नहीं की जा सकती ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (24 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 24 अगस्त 2014,
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यथार्थ से निकलती है कृति
एक शब्द में इसका जवाब है कि अनुशासन। जब मैं बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था, तब मेरे एक शिक्षक ने कहा था कि अगर पैसे चले जाते हैं, तो तुम अपनी मेहनत से उसे हासिल कर सकते हो लेकिन अगर वक्त हाथ से निकल गया तो लाख कोशिशों के बावजूद वह वापस नहीं मिल सकता। यह मेरे लिए एक बड़ी सीख थी। मैं कोशिश करता हूँ कि एक-एक पल का इस्तेमाल करूँ ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कथोपकथन, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 24 अगस्त 2014,
अनंत विजय से स्मिता

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