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 साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला को स्वर्ण -सम्मान     गांव का किसान लेखक होगा अंतरराष्ट्रीय सम्‍मान से सम्मानित     श्री सत्य कॉलेज में 'सृजन सम्मान एवं काव्य समारोह' का आयोजन     माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में नरेन्द्र कोहली का उद्बोधन     प्रविष्टियाँ आमंत्रित     पंकज सुबीर वनमाली कथा सम्मान से अलंकृत     कलाप्रदर्शनी ने मन को मोहा   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
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आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
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रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
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साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला को स्वर्ण -सम्मान
खगड़िया। सुपरिचित साहित्यकार और कुण्डलियाकार श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला को उनके कुण्डलिया संग्रह 'काव्यगन्धा ' के लिए हिन्दी भाषा साहित्य परिषद,खगड़िया (बिहार) द्वारा स्वर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया है। ... पढ़िए
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नन्देश निर्मल

माओवादी कायर हैं और सरकारें बहादुर!
माओवादी और नक्सलवादी कायर हैं तो हमारा भारतीय राज्य अपनी बहादुरी के सबूत कब देगा? रोज भारत मां के लाल आदिवासी, आम नागरिक, साधारण सैनिक और सिपाही मौत के घाट उतारे जा रहे हैं और जेड सुरक्षा में घूमते हमारे राजपुरूषों के लिए बस्तर हाशिए का विषय है। राष्ट्रीय मीडिया पूरे दिन अमेठी में राहुल गांधी के नामांकन पर झूम रहा है और वहां लुटाए गए पांच सौ किलो गुलाब के फूलों पर निहाल है ... पढ़िए
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संजय द्विवेदी

मोदी की बीवी के मुद्दे पर अब लिखना ही पड़ रहा है
मोदी की निजी जिंदगी के चाल-चलन के मुकाबले कांग्रेस नेताओं के कुकर्म भयानक है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी की बीवी उनकी मंगलकामना करते हुए नंगे पैर जी रही हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता ऐसे भी हैं जिनकी औलाद अदालतों में डीएनए जांच से खून का रिश्ता साबित करती है, और ऐसे नेताओं के सेक्स वीडियो इंटरनेट पर लोगों को हक्का-बक्का कर देते हैं ... पढ़िए
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चुनावी बयार में बहते कुछ फ़ेसबुकिया नोट्स
लेकिन धर्मनिर्पेक्षता की दावेदार कांग्रेस या और पार्टियां अयोध्या मुद्दे को भूलने नहीं देना चाहतीं। इमाम बुखारी की अपील, कोबरा पोस्ट आदि के चोचले में फंसी पड़ी हैं। ऐसे ही कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल में जब नंदीग्राम और सिंगूर में किसान आंदोलनरत थे तब वहां की तत्कालीन वामपंथी सरकार उन का दमन कर रही थी ... पढ़िए
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दयानंद पांडेय

कौन किस पर भारी
पहले उनके विरोधी कम थे, बाद में बढ़े। इसका अर्थ यह है कि पहले भी लोग असंतुष्ट थे, परन्तु अपना असन्तोष जाहिर नहीं करते थे। जब सुरक्षा बल आए, तब उनको लगा अब अपने असन्तोष को जाहिर करना चाहिए। इसमें जन-पक्षी या जन-विरोधी होने का प्रश्न नहीं था। लोगों का अधिकांश किशनजी से सहमत कभी नहीं थे। यह उनका आतंक था ... पढ़िए
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विश्वजीत सेन

क्या इस जंग में सिर्फ मोहरा हैं मुसलमान?
भारत में गैर मुस्लिमों के साथ उनके संबंधों की जो ‘जिन्नावादी असहजता’ है, उस पर उन्हें लगातार ‘भारतवादी’ होने का मुलम्मा चढ़ाए रखना होता है। दूसरी ओर पाकिस्तान और पाकिस्तानी मुसलमानों से अपने रिश्तों के प्रति लगातार असहजता प्रकट करनी पड़ती है। मुस्लिम राजनीति का यह वैचारिक द्वंद्व बहुत त्रासद है। आप देखें तो हिंदुस्तान के हर मुसलमान नेता को एक ढोंग रचना पड़ता है ... पढ़िए
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संजय द्विवेदी

प्राण शर्मा की ग़ज़ल
0 टिप्पणी, छंद > ग़ज़ल, (27 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 13 अप्रेल 2014,
प्राण शर्मा

सिने-संगीत इंद्र का घोड़ा है : पं. नरेंद्र शर्मा
परंपरागत सुगम शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, रंगमंच-संगीत, रवींद्र संगीत, इत्यादि नयी-पुरानी शैलियों का तो आधार लिया ही जाता है, अरबी और पाश्चात्य सुगम संगीत से भी प्रेरणा ग्रहण की जाती है। कभी-कभी तो ऐसा भी देखने में आता है कि एक ही आधार पर दो-चार संगीतकार कई एक संगीत-रचनाएँ तैयार कर डालते हैं ... पढ़िए
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एक महत्वहीन थप्पड़
अब अगर कांग्रेस पार्टी विमान अपहरण करने वाले को अपना उम्मीदवार बनाती है, समाजवादी पार्टी दर्जनों हत्याओं की जिम्मेदार कही जाने वाली फूलन को अपना उम्मीदवार बनाती है, तो जनता के मन की नाराजगी भी किसी तरह सामने आ सकती है। ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी के लोगों को कुछ नाराजगी झेलनी पड़ रही है ... पढ़िए
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सुनील कुमार

सपना ठहरा सा
वे उसे मणिपुरी, कथकली और बैले शैलियों में भी पारंगत करना चाहते थे। नृत्यालय में नृत्य की इन शैलियों का भी अभ्यास कराया जाता था। शारदा को कब इंकार था। वह उसके खाने, पीने, सोने-जागने का पूरा ध्यान रखती थी। अब गुँजन को पढ़ाई को अलविदा कहना होगा। आठ-आठ घंटे के नृत्य अभ्यास में वह पढ़ाई लायक रह ही कहाँ जाती है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कहानी, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 12 अप्रेल 2014,
संतोष

मीडिया के दिल भी हारमोनियम जैसे हैं जो बजते-बजते किसी पत्थर की चोट से टूट जाते हैं
हमें कुछ बात करनी है l और जो संपादक कहते कि अभी तो अखबार के काम का समय है l' तो मालिकान कहते, ’फिर बाद में हमारे पास समय नहीं होगा l आप फौरन आइए।' आज व कल की अखबारी दुनिया में ज़मीन आसमान का फ़र्क है l लेखक ने उस समय व आज की अखबारी व्यवस्था की आपस में तुलना करते हुये इससे जुड़ी हर समस्या व हकीकत की बारीकियां अपने इस उपन्यास में दिखाई हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (41 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 12 अप्रेल 2014,
दयानंद पांडेय

पाकिस्तानः पंजाब के बारे में बढ़ती चिंताएं
सत्ता प्रतिष्ठान में भी मतभेद की एक विस्तृत श्रृंखला निर्माणाधीन है इसलिए इस्लामाबाद में एक उच्च सरकारी अधिकारी ने आफ दि रिकॉर्ड ये खुलासा किया कि सैकड़ों तालिबान को रिहा किया जा रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री हाउस से सावधानी के साथ बताया गया कि सिर्फ डेढ़ दर्जन ''असैन्य'' तालिबानियों को रिहा किया गया है। सरकार द्वारा जारी किए गए अग्रिम सफाई देने वाले बयान से हालांकि एक नई और काफी हद तक महत्वपूर्ण शब्दावली सामने आई है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (10 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 11 अप्रेल 2014,
मुजाहिद हुसैन

अब मोदी के खिलाफ बुद्धिजीवियों का प्रलाप
संघ परिवार तो लोकतंत्र की मुक्ति के लिए लड़ने वाला परिवार रहा है जबकि हमारे बुद्धिजीवी संघर्ष की वेला में शुतुरमुर्गी शैली में रेत में सिर छिपा कर लुप्त हो जाते हैं। आज मोदी को कारपोरेट समर्थक बताकर कोसने वालों की नजर में सोनिया गांधी और उनके नामित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कैसे कारपोरेट विरोधी नजर आने लगे हैं? मनमोहन सिंह ही इस देश में मनुष्य विरोधी आर्थिक नीतियों के प्रेरणाश्रोत और प्रारंभकर्ता हैं ... पढ़िए
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संजय द्विवेदी

सड़क हादसे घटने चाहिए, और मौतें थमनी चाहिए...
जिंदगी को बचाने के लिए, उसकी कोशिशों के लिए, उसके लिए जागरूकता पैदा करने के लिए किसी मौके की राह देखने की जरूरत नहीं रहती। आज छत्तीसगढ़ की सरकार सड़कों पर हिफाजत को लेकर मौजूदा कानूनों को कड़ाई से लागू करने की बात भी नहीं कर सकती, क्योंकि जनता का एक बड़ा तबका इस धोखे में रहता है कि लापरवाही उसका पैदाइशी हक है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 11 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

गांव का किसान लेखक होगा अंतरराष्ट्रीय सम्‍मान से सम्मानित
कैनेडा। उत्तरी अमेरिका की प्रमुख त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’ व ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउन्डेशन-अमेरिका’ द्वारा प्रारंभ किये गये साहित्यकारों और साहित्य के सम्मानों के नाम घोषित कर दिये गये हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (58 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 10 अप्रेल 2014,
पंकज सुबीर की रपट

देश में नये फासीवादी उभार की तैयारी
समीर विश्वास से मेरा सवाल है कि एक चिकित्सक और एक नागरिक अधिकार कार्यकत्र्ता होने के नाते इस घटना पर उनका वक्तव्य क्या है? क्या माओवादियों ने जायज किया घात लगाकर इन 14 लोगों को मारकर? वे महज रोड आपेनिंग आपरेशन में भाग लेने जा रहे थे। वे भी गरीब के बाल बच्चे थे जो अपनी सेवा शत्र्तों को पूरी करने के लिए कार्यरत थे ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (32 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 10 अप्रेल 2014,
विश्वजीत सेन

हिन्दुस्तानी मतदाता के फैसले के पैमाने हैरान करने वाले..
लोग कांग्रेस के उम्मीदवार से नफरत करते हों, लेकिन राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हों। अमरीका जैसे देश में जो राष्ट्रपति शासन प्रणाली है उसमें देश में दो बड़ी पार्टियों के दो बड़े नेता पहले से भावी राष्ट्रपति के रूप में पेश किए जाते हैं, और आम जनता वोट सीधे देती है। लेकिन भारत में लोग पहले सांसद चुनते हैं, फिर वे सांसद अपनी पार्टी के संसदीय दल के मुखिया चुनते हैं, और फिर वे मुखिया किसी गठबंधन के मुखिया की शक्ल में अगले प्रधानमंत्री को चुनते हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 9 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

कथा सेबी के काले दूध और सोनिया-मन मोहन-चिदंबरम के रचे लाक्षागृह की!
बात समझने में ज़रा नहीं पूरी आसानी हो जाएगी। बस थोड़ी सी तब्दीली यहां इस कहानी में यह और है कि उस लतीफ़े में तो सिर्फ़ लड़का कुतर्की और मनबढ़ था और उस कि उस की मम्मी उस को शह दे रही थी। पर यहां तो मम्मी खुद बेटे को न सिर्फ़ कुतर्क सिखा रही हैं बल्कि बेटे को तोते की तरह निरंतर रटाती जा रही हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 8 अप्रेल 2014,
दयानंद पांडेय

संकटमोचक प्याज
यह सब बताते हुये भक्त के आँखो से आंसू बहने लगा। नारद जी पसीज गये और बोले -‘‘तुम धन्य हो भक्त, तुम अपने घर का सबसे कीमती सामान मुझे समर्पित कर रहे हो। मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ, जो चाहो वह वरदान मांग लो।‘‘ भक्त तपाक से बोला - ‘‘आपका दिया हुआ मेरे पास सब कुछ है यदि वरदान देना ही है तो आठ-दस क्विंटल प्याज ही दे दीजिये महराज ... पढ़िए
0 टिप्पणी, व्यंग्य, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 8 अप्रेल 2014,
वीरेन्द्र ‘सरल‘

अकाल के अनुभवों से रूबरू कराती किताब : रूखी-सुखी
मोगरी के रामा भाई ने बताया कि एक बार उन्दअर काल पडा़ था। उस साल चूहे बहुत बढ़ गए थे। चूहों ने सारी फसल खा ली। अनाज भी चूहे खा गए। इसीलिए इसे उन्द र काल कहते हैं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (46 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 7 अप्रेल 2014,
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बाबरी स्टिंग ऑपरेशन, नीयत के बजाय दर्ज बातें महत्वपूर्ण
अब कोबरापोस्ट का स्टिंग ऑपरेशन अगर लोगों की बातचीत से यह सुबूत सामने रखता है, कि यह विध्वंस इन्हीं तमाम संगठनों का सोचा-समझा काम था, तो यह कोई अधिक सनसनी फैलाने वाला काम नहीं है। अब अगर भाजपा इस बात की शिकायत चुनाव आयोग में कर रही है कि इस स्टिंग ऑपरेशन को चुनावी मौके पर रोका जाए, ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (53 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 7 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

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