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संपादकीय
पाठकीयता का भविष्य
- जयप्रकाश मानस
क्या ऐसा कहना गलत होगा कि कंप्यूटर जिस संस्कृति (?)
को मनुष्य के विकास के नाम पर दिन-प्रतिदिन नये-नये उपमानों के
साथ रच रहा है उसमें मनुष्य को उसके बुनियादी रूप से मनुष्य
होने से च्युत किया नही किया जा रहा है । आप कह सकते हैं कैसे
?
तो वह ऐसे कि कंप्यूटर ने वैश्विकता की आड़ में स्थानीय बोध और
उसके प्रति नैतिक उत्तरदायित्व के सवालों और हलों को लेकर
सोचने की शक्ति और संघर्ष को भोथरा किया है । इस स्थानीय बोध
के नकार में भाषा, अस्मिता, निजी मान्यता, विश्वास और शुचिता
भी सम्मिलित है जिसके हताहत होने की चेष्टाओं को नकारा नहीं जा
सकता है। मनुष्य के भीतर मनुष्यता की अनुभूति का दायरा छोटा
हुआ है । शायद भस्मासुरी प्रवृत्ति इसी का नाम है।

कहानी
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माँ
पढ़ती है
-
एस.आर.हरनोट
माँ
के सिरहाने ऊपर की ओर भीत पर एक कील में लकड़ी का चकौटा टंगा
है। उस पर ढिबरी रखी है। छत तक धुँए
ने एक लम्बी लकीर बना दी है। बिजली चली जाने पर
माँ
इसे जला लिया करती होंगी। कमरे में बीड़ी की बास पसरी है।
चारपाई के नीचे देखता
हूँ
तो
वहाँ
भी कई-कुछ
चीज़ें
बिखरी हैं। अधबुझी बीड़ी के टुकड़े।
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तरकीब
-
लंदन से तेजेन्द्र शर्मा
की कहानी
पिछले
पच्चीस सालों से समीना एक ही तो काम करती आई है-अदनान के कारनामों पर हैरान होती रही है। यह हैरानी अलग
क़िस्म की है। सोच रही है कि कैसा इन्सान है उसका पति
इन्सान
है भी या नहीं। क्या कोई अपने छोटे से पुत्र को सिर्फ़ इसलिये
थप्पड़ मार सकता है क्योंकि उसको दाल चावल खाने हैं?

लघुकथा
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चार लघुकथायें
-
पाठक
परदेशी

संस्कार
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ग़ैर-टिकाऊ अविकास
-
नोम चॉम्स्की
माना
जाता है कि व्यापार धन-संपत्ति बढ़ाता है। शायद
बढ़ाता हो,
शायद ना बढ़ाता हो,
लेकिन बढ़ाता है या नहीं यह आप तब तक नहीं जान सकते
जब तक आप व्यापार की लागतों को नहीं गिन लेते,
उन लागतों सहित जिन्हें नहीं गिना
जाता,
जैसे कि प्रदूषण की लागत। जब कोई वस्तु एक जगह से दूसरी जगह ले
जाई जाती है
तो उससे प्रदूषण पैदा होता है।
इसे बाहरी बात - अप्रासंगिक - कहा जाता है;
आप ऐसी
बातों को गिनती में नहीं लेते। इसी श्रेणी में संसाधनों का
क्षरण है,
यानी आप कृषि
विकास के लिए संसाधनों का दोहन करते हैं। फिर सैनिक लागतें
हैं।....

व्यंग्य
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तीन व्यंग्य
-
आर.के.भंवर
◙
अख़बार
न निकालने वाले
-
वीरेन्द्र जैन

संस्मरण
◙
काका अरगरे का जाना
-
जया केतकी

पुस्तकायन
◙
वर्ल्ड्स एट वार
-
एन्थोनी
◙
जीवन का इतिहास यही है
-
नथमल झँवर
◙
सुर्खियाँ,यादेः
-
संजय द्विवेदी
◙
अलाव
-
हिमांशु द्विवेदी

ग्रंथालय में (ऑनलाइन किताबें)
◙
कविता कोश
-
ललित कुमार
◙
सर्वेश्वरदयाल और उनकी पत्रकारिता
-शोध-
संजय द्विवेदी
◙
सैरन्ध्री
- खंडकाव्य -
मैथिलीशरण गुप्त
◙ होना
ही चाहिए आँगन
- कविता -
जयप्रकाश मानस
◙
प्रिय कविताएँ -
भगत सिंह सोनी

हलचल
(देश विदेश की
सांस्कृतिक खबरें)
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"प्रवासी
आवाज"
का
विमोचन
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नासिरा शर्मा को कथा (यू.के.) सम्मान
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कौन कुटिल खल कामी’ का लोकार्पण
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विजयराज चौहान की किताब का विमोचन
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अ.भा.प्रदर्शनी में अवधिया का चयन
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उपाध्याय को शिमेंगर लेडर फेलोशिप
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लंदन में कार्टून प्रदर्शनी उद्घाटित
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प्रताप सोमवंशी का नागरिक सम्मान


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