वर्ष 8 माह 11 दिन 18
 भाषाई सद्भावना के लिए काम रही मीडिया विमर्शः बृजमोहन     बिस्मिल्लाह खान की जन्मशती पर काशी से लंदन तक होगा समारोह     संगीत में जीवन के सभी संतापों के शमन का प्रबल सामर्थ्य होता है: डा अनिल सुलभ     24 लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला     हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रकरण : आत्मदाह के लिए विवश होंगे साहित्यकार     साहित्य सरहदों का मोहताज नहीं     हिन्दी चेतना अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
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बिस्मिल्लाह खान की जन्मशती पर काशी से लंदन तक होगा समारोह
भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जन्मशती वर्ष का आगाज नया अस्सीघाट पर होगा। सुबह से रात तक अनवरत चलनेवाले इस कार्यक्रम में गायन, वादन के साथ ही उस्ताद से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी लगाई जाएगी। डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 29 मार्च 2015,
डा. सोमा

क्या इसी को एकीकरण कहते हैं?
अपने दुश्मनों से निपटने में उनकी निष्ठुरता आदि मिथक में तब्दील हो चुकी है। भला, ऐसे आदमी से कौन यह उम्मीद करेगा कि वह पुलिस की मुखबिरी करेगा? लेकिन, वास्तविकता में बहुत कुछ ऐसा होता है, जिसकी कल्पना भी अविश्वसनीय लगती है। दूसरी ओर आपकी राजनीति ही जब सीमित दायरे में घूम फिर करती हो ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 28 मार्च 2015,
विश्वजीत सेन

नरेंद्र मोदी का डिजिटल भारत: समय तो अनुकूल है!
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

डॉ. राष्ट्रबंधु : बालसाहित्य का यायावर
मैं बच्चों के लिए कहानी-कविताएं लिख लेता था। हो सकता है इक्का-दुक्का समीक्षात्मक लेख भी लिखा हो। बालकहानियां अवश्य छपी थीं, मगर ऐसा कुछ नहीं था कि मैं बालसाहित्य समीक्षा के विशेषांक का अतिथि संपादन कर सकूं। दूसरी समस्या शिवकुमार गोयल जी से अपरिचय की थी। हालांकि उनको पढ़ता अर्से से रहा था, मगर उनके बालसाहित्य से मेरा कोई परिचय नहीं था। तीसरी एक और समस्या थी ... पढ़िए
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ओमप्रकाश कश्यप

भगतसिंह की सेक्युलर विरासत
बस किसी व्यक्ति का सिख या हिंदू होना मुसलमानों द्वारा मारे जाने के लिए काफी था और इसी तरह किसी व्यक्ति का मुसलमान होना ही उसकी जान लेने के लिए पर्याप्त तर्क था। जब स्थिति ऐसी हो तो हिंदुस्तान का ईश्वर ही मालिक है ... पढ़िए
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केसी त्यागी

विरासत का बल : अयोध्या प्रसाद खत्री
यह अलग पहचान बोली जानेवाली हिंदी की है, कभी-कभी सजर्नात्मक साहित्य में स्थानिकता के अपने उचित दबाव के चलते, इस बोली जानेवाली शैली का उपयोग लिखित साहित्य में भी देखने को मिलता है। बावजूद इसके यह माना जा सकता है कि विचार साहित्य की भाषा का लिखित रूप लगभग समान है। यह समान रूप विभिन्न शहरों से निकलनेवाले समाचार पत्रों की भाषा में सहज ही देखने को मिल सकता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जनमन, (21 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 मार्च 2015,
प्रफुल्ल कोलख्यान

जिंदल-बाल्को को मिट्टी के मोल कोयला खदानें नहीं...
देश की यह दौलत इनको मिट्टी के भाव मिल चुकी रहती। लेकिन पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोयला मंत्री रहते हुए जिस तरह से जनता का खजाना बंदरबांट किया था, उसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की वजह से सरकार चौकस है, और देश को इतनी कमाई होते दिख रही है जितनी कि मनमोहन सिंह के वक्त के सीएजी ने भी अपने अंदाज में नहीं बताई थी ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 मार्च 2015,
सुनील कुमार

अरविंद कुमार का नया इश्क है : अरविंद वर्ड पावर
हिंदी समाज को अरविंद कुमार का कृतज्ञ होना चाहिए कि उन्हों ने ऐसा अद्भुत कोश बनाया है.। ' वह लिखते हैं, ' इस कोश का एक उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इस में बोलचाल में प्रचलित बोलियों से आए शब्दों को भी जगह दी गई है। ऐसे शब्द भी काफ़ी हैं , जो उर्दू फ़ारसी अऱबी, अंगरेजी आदि से आ कर हिंदी में ज़ज्ब हुए हैँ। ऐसे किसी भी कोश को एक स्तर पर हिंदी की अद्भुत समावेशिता का संकलन होना चाहिए – यह कोश ऐसा है ... पढ़िए
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दयानंद पांडेय

हर भूखा आदमी बिकाऊ नहीं होता!
एक परिवार ऐसा भी था,जिसके सभी सदस्य उन्हें प्यार करने लगे थे। उनमें एक लड़की भी थी,जो उनसे उम्र में बड़ी थी । `गुनाहों का देवता' की नायिका सुधा वही कन्या थी ।इंटर में पढ़ते हुए उन्होने गांधीजी के आह्वान पर पढाई भी छोड़ दी थी। बीए में पढ़ते हुए उन्होंने पद्मकांत मालवीय की `अभ्युंदय' पत्रिका और इलाचन्द्र जोशी की `संगम' पत्रिका में सम्पादन किया । जोशी जी और उनकी पत्नी भारती जी को बहुत मानते थे ... पढ़िए
0 टिप्पणी, जाग मछिन्दर गोरख आया, (40 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 मार्च 2015,
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

जयन्त साहा की कविताएँ
0 टिप्पणी, कविता, (30 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 मार्च 2015,
जयंत साहा

संगीत में जीवन के सभी संतापों के शमन का प्रबल सामर्थ्य होता है: डा अनिल सुलभ
पटना। संगीत मानव-मन के सभी बिखरे तारों को समेट, लय बद्ध कर उसे आत्मा और परमात्मा के दिव्य-स्पंद से जोड़ता है। उसमें जीवन के सभी संतापों के शमन का प्रबल सामर्थ्य होता है। यह रोग-ग्रस्त प्राणियों के लिये दिव्य-औषधि है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से संगीत को अपने जीवन में स्थान देना चाहिये ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (34 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 24 मार्च 2015,
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खेत से लेकर इंसानी सेहत तक जहर के बाजार का हमला...
ये आंकड़े तो भारत में बनने वाले जहर के हैं, भारत के कारोबारियों का कहना है कि सरकार जहर के आयात को इतना बढ़ावा दे रही है, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इतने फायदे दे रही है कि भारत का कीटनाशक उपयोग खतरे में आ गया है। अब मतलब यह है कि भारत के जहर से परे दूसरे देशों का जहर भी जमीन और पानी से होकर हिन्दुस्तान पीढिय़ों के बदन में रोज घुस रहा है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (37 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 मार्च 2015,
सुनील कुमार

‘आम’ नहीं ‘खास’ हो गए ‘आप’
उन्होंने अपने ‘गणों’ को यह काम सौंप दिया जो अपने नेता की भक्ति में इतने बावले हुए कि उनको मर्यादाओं का ख्याल भी न रहा। सत्ता और ऐसी बहुमत वाली सरकार किसी में भी अहंकार भर सकती है। अब सही मायने में ‘पांच साल केजरीवाल’ का नारा एक हकीकत है। देखें तो किसी भी सत्ता को सवाल खड़े करने वाले लोग नहीं सुहाते ... पढ़िए
0 टिप्पणी, अतिक्रमण, (40 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 22 मार्च 2015,
संजय द्विवेदी

अफसर की ऐसी मौत की सीबीआई जांच जरूरी
मामले को राज्य के बाहर ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंप देना चाहिए। इससे एक तो सत्ता पर बैठे लोग जांच को प्रभावित करने के आरोपों से बचते हैं, और दूसरी तरफ जांच निष्पक्ष होने की एक संभावना बनती है। आज ताकतवर लोग जब किसी जुर्म के पीछे रहते हैं, तो उसमें ईमानदार जांच और असरदार अदालती कार्रवाई, किसी की भी गुंजाइश नहीं रहती है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (45 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 21 मार्च 2015,
सुनील कुमार

जयन्त साहा की कविताएँ
0 टिप्पणी, कविता, (53 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 20 मार्च 2015,
जयंत साहा

निज-निज पानीपत
दोस्तों के साथ मिलकर कम्पीटिटिव परीक्षा तथा उसके रिजल्ट के बारे में बहुत आलोचना करने के बाद कभी भी उन परीक्षाओं में बैठने का सपना तक नहीं देखा था ग्रेजुएशन से पहले और न ही उनके लिए कुछ प्रिपेरेशन भी की थी। क्या करेगा तुम प्रद्युम्न? इस प्रश्न का सटीक उत्तर भी नहीं था उसके पास। तो क्या उसने ऑफिसर होने का सपना देखा था उसने? न व्यापारी बनने का? न ही शिल्पी बनने का? पारादीप में ट्रेलर चलाने का सपना देखा था क्या ... पढ़िए
0 टिप्पणी, ओडिया-माटी, (47 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 20 मार्च 2015,
मूल : जगदीश मोहंती , अनुवाद : दिनेश माली

वो आचरण जो मनुष्य को अल्लाह के क़रीब ले जाते हैं
मैंने उस पर फ़र्ज़ कर दी है, हासिल कर सकता है उतना किसी और चीज़ से हासिल नहीं कर सकता और नावाफिल के द्वारा मेरा बंदा मेरे क़रीब हो जाता है। यहाँ तक के मैं उससे मोहब्बत करने लग जाता हूँ। और जब मैं उसे अपना दोस्त बना लेता हूँ तो उसका कान बन जाता हूँ जिन से वह सुनता है, उसकी आँखें बन जाता हूँ ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 19 मार्च 2015,
इमाम सैयद शमशाद अहमद नासिर

जो लोग मीडिया को देश की नब्ज मानते हैं, वे धोखे में...
उत्तर-पूर्व तो मानो चीनी मीडिया के भरोसे छोड़ दिया गया है। राष्ट्रीय होने का दावा करने वाले मीडिया में उत्तर भारत की एक-एक आगजनी, हर मौत, हर छोटी-बड़ी घटना राष्ट्रीय चैनलों के प्राइम टाईम पर भी आ जाती हैं, और बाकी देश की बड़ी घटनाएं भी धरी रह जाती हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (38 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 18 मार्च 2015,
सुनील कुमार

24 लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला
साहित्य अकादमी की हीरक जयंती के मौके पर सोमवार को 24 भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। कमानी सभागार में हुए आयोजन में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ त्रिपाठी ने अलग-अलग भाषाओं के लेखकों को सम्मानित किया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (61 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 17 मार्च 2015,
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बिना बात बतंगड़ बनाकर संसद में कांग्रेस बुरी फंसी
संसद के बाहर भी वह मुद्दों के बिना खाली हाथ बयान जारी करते दिख रही है। हमने पहले भी यह बात लिखी थी कि कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन को छत्तीसगढ़ कांग्रेस से यह सीखना चाहिए कि विपक्ष का काम कैसे किया जाता है। कांग्रेस को किसी मुद्दे को संसद के बाहर और संसद के भीतर बहुत बड़े-बड़े विशेषणों के साथ उठाने के पहले उसे ठोक-बजा लेना चाहिए ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (44 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 16 मार्च 2015,
सुनील कुमार

जयन्त साहा की कविताएँ
0 टिप्पणी, कविता, (69 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 16 मार्च 2015,
जयंत साहा

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