SrijanGatha

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अन्तरराष्ट्रीय मंच


<< 1 2 >>

सम्मानित हुए श्री आनंद नारायण सिन्हा

जबलपुर। विवेचना रंग मंडल द्वारा म. प्र.साहित्य अकादमी, भोपाल के प्रभारी निदेशक श्री आनंद नारायण सिन्हा ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किए गए
पढ़िए ...

सपनों का सिनेमा

सारा सिनेमा गडमड हो जाता है। टुकड़ों-टुकड़ों में बंटी कहानी वाला सिनेमा। कुछ-कुछ कहानियां ऐसी जिन के टुकड़े कैमरा क़ैद नहीं कर पाता। कुछ दृश्यों को निर्देशक समझ नहीं पाता। तो कुछ को पटकथा लेखक पहले ही निकाल बाहर फेंक देता है। कि इस से तो सिनेमा स्लो हो जाएगा। और सब को फास्ट चाहिए। बिलकुल कसा हुआ। चाहे सिनेमा हो, चाहे औरत, चाहे प्रेम। क्या इसी लिए कहते हैं कि कथा और पटकथा नदी के दो छोर हैं। कथा इस पार, पटकथा उस पार
पढ़िए ...

सीता और भगत सिंह को इंसाफ दिलाने के मुकदमे

इस याचिका पर अंतिम सुनवाई मई 2013 में न्यायमूर्ति शुजात अली खान ने की थी। उन्होंने इस मामले को एक बड़े पीठ को सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया था। 17 दिसंबर 1928 को हुई इस घटना की सुनवाई के लिये भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने नवंबर में लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी
पढ़िए ...

हिंदी सिनेमा की दस बेहतरीन कॉमेडी फिल्में

प्रियदर्शन की इस फिल्म के बाद फिल्मकारों को जैसे कॉमेडी फिल्म बनाने का कोई नुस्‍खा मिल गया। खुद प्रियदर्शन इस फिल्म के बाद इसी शैली की कई फिल्में बनायीं। इस फिल्म में अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का हास्य नौसिखए लोगों द्वारा किडनैपिंग का एक अधकचरा प्लान बनाकर पैसे कमाने की मानसिकता से उपजता है
पढ़िए ...

श्याम शर्मा बने राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की सलाहकार समिति के अध्यक्ष

बिहार। बिहार के वरिष्ठ कलाकार व कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना के पूर्व प्राचार्य श्याम शर्मा को राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, दिल्ली के सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की अनुशंसा पर श्री शर्मा को यह दायित्व दिया गया है
पढ़िए ...

गांगेय डॉल्फिन गंगा के स्वास्थ्य का दर्पण है

इसका मांस भी बिकता है जिसे निम्न वर्ग के लोग खाते हैं। वैसे इसका मांस स्वादिष्ट नहीं होता है। इसके तेल को लेकर एक भ्रांति भी है कि यह दर्द-निवारक है। किन्तु इसका कोई भी प्रमाणिक तथ्य सामने नहीं आया है। मछली के चारे के रूप में इसके तेल के प्रयोग बन्द करने से इसका शिकार स्वतः ही बंद हो जायेगा
पढ़िए ...

बलात्कार की शिकार, अदालत से निराश युवती की खुदकुशी

यह बात अगर सही है तो भी अटपटी इसलिए नहीं है कि भारतीय समाज में अधिकांश लोग ऐसी महिला को ठीक यही नसीहत देने में लगे रहते हैं, और परिवार के भीतर बच्चों के यौन शोषण से लेकर कामकाज की जगह पर महिला के शोषण, या महिला के साथ हुए किसी भी तरह के सेक्स-अपराध को लेकर लोगों का रूख यही रहता है कि बात को बढ़ाने से महिला की ही बदनामी होगी। इसी रूख के चलते सौ सेक्स-अपराधों से किसी एक की ही पुलिस रिपोर्ट होती होगी
पढ़िए ...

पाठकों की वापसी का मेला

हाल ही में दिल्ली में खत्म हुए विश्व पुस्तक मेला से पाठकों की कमी की बात गलत साबित होती है । एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में नौ दिनों तक चले इस विश्व पुस्तक मेले में करीब बारह लाख पुस्तक प्रेमी पहुंचे थे । नौ दिन में बारह लाख यानि तकरीबन करीब एक लाख से ज्यादा पुस्तक प्रेमी हर दिन । काफी दिनों के बाद पुस्तक मेले में ये भी देखने को मिला कि लोग कतार में खड़े होकर हॉल में प्रवेश कर रहे थे । शनिवार और रविवार को तो कतार काफी लंबी थी लेकिन सप्ताह के अन्य दिनों में भी लोग पंक्तिबद्ध होकर मेले में पहुंच रहे थे
पढ़िए ...

विचारहीन राजनीति और परिवर्तन का स्वप्न

यह सुनिश्चित करने से होता है कि लोककल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं का कार्यावन नियमानुसार हो रहा है अथवा नहीं। इसके लिए सरकार कुछ नागरिक संस्थाओं का गठन करती है; और स्वयं मुख्य कार्यकारी संस्था की भूमिका निभाती है। उसका दायित्व लोगों की रोजमर्रा की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। दीर्घायामी योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वन इस बात पर निर्भर करता है, कि हम कैसा समाज चाहते हैं
पढ़िए ...

लड़ाई

समाचार पत्र में भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध मुख्यमंत्री की सक्रियता से रंगीन हो गए तो जनता का एक़ वर्ग खुश भी दिखाई दिया । मुख्यमंत्री ने अपनी टोपी सीधी करते हुए आनन - फानन में प्रेस कांफ्रेंस बुला ली । पत्रकारों को इन्विटेशन के साथ भव्य पंडाल सज गया । पंडाल का ठेका जिस ठेकेदार को दिया गया , वह वही था जो पिछली सरकार की ठेकदारों की लिस्ट से ठेका -बदर किया जा चुका था क्योंकि कुछ वर्ष पहले एक़ स्कूली समारोह के आयोजन के समय उसके द्वारा लगाये गए टेंट में आग लग गयी
पढ़िए ...

राज्य सरकारें म्युनिसिपलों के लिए दानदाता बनना छोड़ें...

कदम-कदम पर गाडिय़ों को रूककर जांच करानी पड़ती थी। उसका खत्म होना तो ठीक हुआ, लेकिन उसके बाद से म्युनिसिपल अनुदान के लिए राज्य सरकारों पर इस तरह मोहताज हो गई हैं कि मानो वे चंदा मांगते किसी के दरवाजे खड़ी हों। हमारा मानना है कि पश्चिमी देशों की तरह स्थानीय म्युनिसिपल को न सिर्फ टैक्स, बल्कि योजना बनाने, और कमाई बढ़ाने के अधिकार बहुत अधिक मिलने चाहिए, और इसी से स्थानीय लीडरशिप की कल्पनाशीलता का उपयोग हो सकेगा
पढ़िए ...

<< 1 2 >>

Everyday, New Posts, Like, News, Poet, Story, Gazal, Song, novel, blog, Article, music, lyrics, books, review,conference, training etc. On srijangatha Magazine

जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे

जाग मछिन्दर गोरख आया
बुद्धिनाथ मिश्र
बुद्धिनाथ मिश्र
विचारार्थ
बृजकिशोर कुठियाला
बृजकिशोर कुठियाला
स्याह सफ़ेद
सुनील कुमार
सुनील कुमार
समय-समय पर
अखिलेश शुक्ल
अखिलेश शुक्ल
ओडिया-माटी
दिनेश माली
दिनेश माली
नया नज़रिया
जगदीश्वर चतुर्वेदी
जगदीश्वर चतुर्वेदी
अतिक्रमण
संजय द्विवेदी
संजय द्विवेदी