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प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के तृतीय वार्षिक समारोह का सीधा प्रसारण देखिए
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मानव हो मानव बने रहो

0 टिप्पणी, कविता, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 28 जनवरी 2012,
बीनू भटनागर

मन करता है...

0 टिप्पणी, कविता, (26 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 27 जनवरी 2012,
सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

सलमान रश्दी का विरोध और तेजाबी मानसिकता

सलमान रूशदी के खिलाफ हर जगह बयानीबाजी होना यह दर्शाता है कि किस कदर भारतीय मुस्लिम संवर्ग पर कट्टरपंथ की मानसिकता हावी है। कट्टरपंथी की मानसिकता के प्रचार-प्रसार में विदेशी हथकंडा है। ... पढ़िए
1 टिप्पणी, राष्ट्र-चिंतन, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 जनवरी 2012,
विष्णु गुप्त

कैसे सम-विधान की यह कैसी सालगिरह?

देश के एक तबके को आज़ादी की सालगिरह, संविधान की सालगिरह, बरसी की तरह लगती है। अपने को गांधीवादी कहने वाले लोगों से लेकर अपने को माओवादी कहने वाले अनगिनत लोगों तक का कहना है कि हिंदुस्तान का लोकतंत्र बोगस हो ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 जनवरी 2012,
सुनील कुमार

तेजपुर में साहित्य सम्मलेन संपन्न

तेजपुर । प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'हिंदी साहित्य सम्मलेन', असम) ने अपना 19 वाँ वार्षिक अधिवेशल गत २५25 दिसम्बर को तेजपुर महाविद्यालय के सभागार में मनाया l सम्मलेन की अध्यक्षता तेजपुर विश्वविध्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष तथा सम्मलेन के अध्यक्ष डॉ. अनंत कुमार ... पढ़िए
1 टिप्पणी, हलचल, (26 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 जनवरी 2012,
तेजपुर से रीता सिंह 'सर्जना' की रपट

आज़ादी का त्योहार

1 टिप्पणी, कविता, (75 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 26 जनवरी 2012,
महेंद्र भटनागर

टूटने लगता है हर एक ताना-बाना

11 टिप्पणियाँ, छंद > ग़ज़ल, (76 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 जनवरी 2012,
प्राण शर्मा

कश्मीर में शिक्षा तार-तार

प्रभावों और मंदी पर असर को देखते हुए, इन्हें भी संज्ञान में लिया गया। अस्थिरता की वजह से कश्‍मीर में परिचालन प्रभावित हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही बड़ा झटका लगा है। घाटी में विरोध प्रदर्शन की वजह से ... पढ़िए
0 टिप्पणी, इनदिनों, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 जनवरी 2012,
सैयद रक्षंदा सुमन

प्रेमचंद रंगशाला के लिए ही कुर्बान हुए थे कवि कन्‍हैया?

कन्हैया जी ने ही हम नौजवानों का परिचय पहली बार ब्रेख्त, नेरुदा और नाजिम से कराया। ब्रेख्त पर होने वाली यह छोटी सी गोष्ठी कई माने में बहुत महत्‍वपूर्ण रही। यह वह समय था, जब पटना में भी एब्सर्ड नाटक हो ... पढ़िए
0 टिप्पणी, शेष-विशेष > कला, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 जनवरी 2012,
अरुण कमल

मुसाफ़िर

बड़े ध्यान से मैंने अपनी गठरी को टटोला , वक़्त ने उस पर धुल के रंगों को ओढा दिया था .... उसमे ज्यादातर जगह, मेरे अपने दुःख और तन्हाई ने घेर रखी थी और कुछ अपनी - परायी यादे भी थी ... पढ़िए
1 टिप्पणी, कहानी, (52 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 25 जनवरी 2012,
विजय सप्पति

'हिन्द स्वराज’ के बहाने विचार पर मंथन

लखनऊ । गाँधी के जीवन वृत, परस्पर संबंध व किसी घटना पर केन्द्रित अनेकों फ़िल्में, उपन्यास, नाटक रचे गये हैं पर कहानी को सुनाने व दिखाने की अपेक्षा विचारों को दिखाने का प्रयास पहली बार नाटककार-निर्देशक राजेश कुमार अपनी आगामी प्रस्तुति ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (37 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 24 जनवरी 2012,
संजय कुमार की रपट

एक पत्र जस्टिस काटजू जी के लिए

वास्तव में आपने आते ही पत्रकारों के मानसिक स्तर के बारे में जितनी बातें कही थी वह अक्षरशः सत्य है। आपकी ये भी अपेक्षा सही है कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया को भी प्रेस कोंसिल के अंदर में लाया जाय और इसे ‘मीडिया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, मीडिया, (19 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 24 जनवरी 2012,
पंकज कुमार झा

दर्जनों हत्याओं से जुड़े रहे हत्यारे की किताब, विमोचन

लेकिन जिस अपराधी का पुराना रिकॉर्ड ऐसे किसी साहित्य का न रहा हो, और जिसके नाम पर इतने बड़े-बड़े अपराधों की एक मील लंबी लिस्ट पुलिस से अदालत तक चली हुई हो, उसके लिखे हुए को छापना और उसका विमोचन करके ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (39 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 24 जनवरी 2012,
सुनील कुमार

प्रेम

1 टिप्पणी, कविता, (28 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 24 जनवरी 2012,
सजन कुमार मुरारका

थर्ड थियेटर के जनक बादल सरकार

जाहिर सी बात है कि कुशल और अनुभवी कलाकार-निर्देशिका डॉ. साधना भटनागर ने कहानी, संवाद,भाव भंगिमाओं पर कलाकारों से ठीक से काम करवाया है।1561 यानी बल्लभपुर के शासकों की वंश परंपरा की कथा वस्तु एक प्रकार से सुगठित कोलाज की शक्ल ... पढ़िए
0 टिप्पणी, सिनेमा के शिखर, (46 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
प्रमोद कुमार पांडेय

सूरीनाम में विश्व हिन्दी दिवस

सूरीनाम। इस वर्ष भी 10 जनवरी 2012 को पारामारिबो में भारतीय राजदूतावास ने सूरीनाम के हिंदी प्रेमियों व विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ विश्व हिंदी दिवस मनाया। इस दौरान सूरीनाम के विद्यार्थियों ने हिंदी पर अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (31 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
सूरीनाम से रपट

शब्दों की शिलाकृति:धूप का टुकड़ा

यूस्टेन की जानी मानी साहित्यकारा इला प्रसाद की कवितायें मानव संघर्षों के इतिवृत्त को लक्षित करती हुई आगे बढ़ती हैं, जहाँ सुख के क्षण और दुःख के क्षण भी हैं । वहाँ अश्रु भी है, मन का खिलना भी है, मुरझाना ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (26 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
देवी नागरानी

उत्सव के आईने में हमारा अक्स

जयपुर साहित्य उत्सव का एक अपना एजेण्डा है, जिसे मूर्त रूप देने पूरे वर्ष तमाम आयोजक कार्य करते हैं। यह याद रखा जाना चाहिए कि भारत के प्रभुता सम्पन्न वर्ग में अंग्रेजी की जैसी भूमिका है, वैसी हिन्दी या किसी भारतीय ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (31 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
डॉ. उदयन वाजपेयी

सरकारी नौकरी की सोच

जब परिवार की बारी आई तो बताया कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई हो रही है। मैंने उनसे जिज्ञासावश पूछा कि बच्चे गांव में ही पढ़ते हैं, तो उनका जवाब था, नहीं। बच्चे तो 20 किमी दूर इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने जाते ... पढ़िए
0 टिप्पणी, व्यंग्य, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
राजकुमार साहू

ऎसे उत्सवों को सुधारा जाए

लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनके स्थानीय प्रतिनिधियों की साहित्य उत्सव की रणनीति को नजरअंदाज करना भी गलत होगा। क्या यह सही नहीं है कि इस तरह के उत्सवों में पश्चिमी संस्कृति और अंग्रेजी लेखकों का ही वर्चस्व होता है? क्या यह ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (16 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 23 जनवरी 2012,
रामशरण जोशी

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