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साहित्य, संस्कृति व भाषा का अन्तरराष्ट्रीय मंच


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आलोचना से बचती युवा पीढ़ी

नए विमर्श को स्थान नहीं मिलता है । मोहन राकेश, कमलेश्वर और राजेन्द्र यादव का जब कहानी की दुनिया में डंका बज रहा था तो सभी एक दूसरे की रचनाओं पर लिख रहे थे । उसका लाभ तीनों को मिला था और वो लगातार चर्चा में बने रहे थे । युवा लेखक क्यों नहीं अपने साथियों पर गंभीरता से लिखते हैं इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए । ऐसा प्रतीत होता है कि युवा पीढ़ी अपने साथियों पर आलोचनात्मक टिप्पणियों से बचना चाहती है
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माओवादी ही लगे स्वीकारने, उनकी रीढ़ टूट गई

2009 के 20 अक्टूबर को प. मिदनापुर के सांकराइल थाने पर सनसनीखेज हमला हुआ। हमला करने आए माओवादियों ने दो पुलिसवालों की हत्या भी की। एक राष्ट्रीयकृत बैंक पर उनलोंगों न डाका भी डाला। सांकराइल थाना के ओ.सी. को उनलोगों ने अगवा भी किया पर बाद में उन्हें युद्ध अपराधी मान कर रिहा कर दिया
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छत्तीसगढ़ में बस्तर निलंबित लोकतंत्र का अफसरी टापू

बस्तर के बेकाबू अफसरों को लोकतांत्रिक समझ और जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया गया है। हम पहले भी लिख चुके हैं कि बस्तर एक निलंबित लोकतंत्र से गुजर रहा है और वह अफसरों के प्रशासन वाला एक स्वायत्तशासी टापू बना दिया गया है। ऐसे अफसरों को यह माकूल बैठता है कि वहां के पत्रकार बाहरी दुनिया को हालात न बताएं, और बाकी दुनिया वहां न आए, लेकिन इससे नक्सल हिंसा खत्म नहीं होगी, आदिवासियों पर सरकारी जुल्म बेधड़क बढ़ते चलेगा, जिससे नक्सली वहां अधिक जनाधार पाते चलेंगे
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क्षेत्रीय दलों के लगातार कब्जे और राष्ट्रीय दलों पर दबाव

केन्द्र चलाने के लिए आज भाजपा को किसी और पार्टी की जरूरत नहीं है, लेकिन राज्यों में जगह-जगह अपने पैर जमाने के लिए उसे क्षेत्रीय दलों की जरूरत है, और इसीलिए वह अभी तक गठबंधन की सरकार में सहयोगियों को साथ लेकर चल रही है। यह एक और बात है कि हाल ही में यह चर्चा शुरू हुई है कि अगले आम चुनाव के पहले भाजपा आन्ध्र और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में अपने आपको इतना मजबूत बना लेना चाहती है
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मिथकीय चरित्रों से हिंदी को परहेज क्यों

हिंदी के विचारधारा युक्त साहित्यकार अमिष त्रिपाठी को लाख खारिज करें लेकिन उन्होंने अपना एक पाठक वर्ग तैयार किया और अपने तमाम साक्षात्कार में वो भगवान शंकर के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर बात करते हैं । अमिष इस हिंदू देवी देवता पर बात करने से बिल्कुल नहीं हिचकते हैं । उन्हें इस बात की भी चिंता नजर नहीं आती है कि हिंदू देवी देलताओं के चरित्र पर बात करनेवालों को संघी मान लिया जाता है । वो बेबाक होकर कहते हैं कि आज उनके पास जो कुछ भी है वो बाबा भोलेनाथ की कृपा से है
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पांच राज्यों की जनता का एक ही फैसला, पंजा मरोड़कर रख दिया

भाजपा तो आने वाले महीनों में उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्यों के चुनाव को लेकर एक तैयारी में जुटी हुई है, और उसे आज के नतीजों से एक बड़ी ताकत भी मिलेगी। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के इन नतीजों से एक ऐसी नसीहत मिल सकती है, जिसका न आज उसके पास कोई इस्तेमाल बचा है, और न ही उसके भीतर किसी नसीहत को सुनने की चाहत भी दिखती है। आज टीवी पर कांग्रेस का कोई प्रवक्ता ये कहते सुनाई पड़ रहा था कि कांग्रेस राख से भी उठकर खड़ी होने की ताकत रखती है
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गर्भ गृह

यूनिवर्सटी में पढाई करते समय वह कूकी की रुम-मेट थी बहुत ही स्मार्ट और साथ ही साथ स्वतंत्र विचारधारा की भी। एक दिन कूकी की अनुपस्थिति में उसने पता नहीं अनिकेत को क्या कह दिया था कि जब वह अपने गाँव से लौटी तो अनिकेत ने उससे कहा था, "कूकी, आज मेरा मन तुम्हारे चरण-स्पर्श करने का हो रहा है
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जमीन तले के पानी सरीखे हिंसा दूर तक जाती है...

योरप के शांत देशों में भी नवनाजीवादी नस्लभेदी सड़कों पर हैं और फिर हिटलर के नामलेवा खबरों में हैं। इस तरह इस्लामी आतंकवाद ऐसे हिंसाग्रस्त देशों में तो मुस्लिमों को ही मार रहा है, वह बाकी देशों में भी मुस्लिमों को शक से लाद रहा है। साम्प्रदायिक ताकतें ऐसा ही ध्रुवीकरण चाहती भी हैं, लेकिन सभ्य और समझदार लोकतंत्र वाले देश अपनी पूरी ताकत से ऐसी नौबत से जूझ रहे हैं और इसीलिए लंदन में एक मुस्लिम मेयर चुना जा रहा है
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अंगूर नहीं खट्टे, छलांग लगी छोटी

बुद्ध की इस तपोस्थली में जन्मे अज्ञेय मशहूर हो जाए, पर देवेंद्र कुमार एक अच्छे किंतु अ-मशहूर कवि हो कर रह गए। उन की कमजोरी यह थी कि अच्छी कविता तो वह कर लेते थे, कवि होने की रद्दी दुकानदारी भी नहीं कर पाते थे। शायद इस लिए वह एक तो कवि सम्मेलनों में मंच पर नहीं जाते थे। या कभी-कभार जो स्थानीय मंचों पर पकड़ ले जाए गए
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एक हत्या पर बिहार में जंगलराज तो तीन हत्या पर गुजरात में क्या?

बैठे-ठाले गुजरात की कमियां जनचर्चा का सामान बन गईं। इसके बाद कल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मोदी के सोमालिया वाले बयान को सही साबित करने के लिए एक पत्रिका का कवर पेज मीडिया के सामने पेश किया जिसमें केरल के कुपोषण पर एक रिपोर्ट थी, और एक मरणासन्न बच्चा मां की गोद में बड़ी कमजोर हालत में दिख रहा था। अब पत्रिका का यह पुराना अंक भाजपा के तर्क में काम आ पाता, इसके पहले ही लोगों को यह याद पडऩे लगा कि यह तस्वीर तो पहले कहीं देखी हुई है
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'विशाल भारत को अपने में समेटने का प्रयास करता है कुंभ' - 'वैचारिक महाकुंभ' के अंतिम दिन पीएम मोदी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के ग्राम निनौरा में सिंहस्थ कुंभ के दौरान हो रहे तीन-दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ का समापन शनिवार को हुआ। इस मौके पर पीएम मोदी ने सिंहस्थ महाकुंभ का मेनिफेस्टो जारी किया
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हरियाणा पुलिस की नाकाबिलीयत पर रिपोर्ट, बाकी राज्य भी सोचें

इसके अलावा भी देश भर में जगह-जगह पुलिस ने अल्पसंख्यकों की बहुत ही कम मौजूदगी को लोग फिक्र की बात मानते हैं कि किसी तनाव की हालत में पुलिस में बहुसंख्यक तबके की बहुतायत एक खतरनाक असंतुलन पैदा करती है। लेकिन यह बात सिर्फ पुलिस में काम करने वाले लोगों के जाति और धर्म की नहीं है। भारत में कई बार यह बात उठी है कि पुलिस जितने राजनीतिक दबाव में काम करती है, वह एक खतरनाक बात है। पुलिस का इंसाफ का नजरिया अपनी खुद की कुर्सी तले दब जाता है
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बहुत याद आएंगें जोगेन्द्र पॉल

केन्या में वो अंग्रेजी पढ़ाते थे और एक लंबे अंतराल के बाद वो भारत लौटे और महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक कॉलेज में चौदह साल तक प्रिंसिपल रहे और उसके बाद उन्होंने नौकरी नहीं की और पूर्णकालिक लेखक बनकर दिल्ली में रहने के लिए चले आए। जोगेन्द्र पॉल का पहला संग्रह उन्नीस सौ इसठ में छपा –धरती का काल। इस संग्रह में नैरोबी के इनके प्रवास के दौरान वहां के जीवन को केंद्र में रखकर लिखी गई कहानियां हैं
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गर्भ गृह

रुखसाना, वन्स आइ हेव डन ए मिस्टेक। आई फक्ड ए गर्ल, वन आफ माइ स्टूडेन्ट एंड आलसो द मॉडल फॉर वन आफ माइ पेंटिंग्स। उस लड़की की बाद में शादी हो गई और अभी वह अपने परिवार के साथ खुशीपूर्वक रहती है। वह लड़की उस घटना को भूल चुकी थी। आज के समय यह घटना कोई मायने नही रखती है। फिर भी तबस्सुम को ब्लैकमेल करने वाले मिलिटरी आफिसर ने उस लड़की को बहलाया-फुसलाया और मेरे विरुद्ध खड़ा कर दिया
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दो आस्थाएँ

सुनते हैं, उन्‍होंने संन्‍यासी की कृपा से यहीं बैठकर वाग्‍देवी को सिद्ध किया और लोक में बड़ा यश और धन कमाया था। पंडितजी के पितामह और पिता भी बड़े नामी-गिरामी हुए, रजवाड़ों में पुजते थे। पंडित देवधरजी को यद्यपि पुरखों का सिद्ध किया हुआ बीजमंत्र नहीं मिला, फिर भी उन्‍होंने अपने यजमानों से यथेष्‍ट पूजा और दक्षिणा प्राप्‍त की। बीज मंत्र इसलिए न पा सके कि वह उत्‍तराधिकार के नियम से पिता के अंतकाल में उनके बड़े भाई धरणीधरजी को ही प्राप्‍त हुआ था
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सामाजिक जनतंत्र के सवाल

किसी यात्री की कद-काठी औसत भारतीय पुरुष की नहीं भी हो सकती है, वह या तो औसत से अधिक लंबा या नाटा हो सकता है। या फिर महिला होने के कारण उस की कद-काठी औसत भारतीय पुरुष की नहीं है। भीड़ में उसे खुद शारीरिक कष्ट तो होता ही है, सहयात्रियों की असुविधा का कारण बनने के कारण उनकी हिकारत झेलता हुआ/ झेलती हई मानसिक कष्ट भी भोगता/ भोगती है। इसी तरह पढ़े-लिखे लोगों की भीड़ में निरक्षर या भिन्न भाषा-भाषियों के साथ सफर कर रहे यात्री भी मानसिक कष्ट में पड़ते हैं। इसी तरह से विश्लेषण को आगे जारी रखने पर विभिन्न तरह की विषमताओं के आधार पर होनेवाले सामाजिक बरतावों को समझा जा सकता है
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वैचारिक महाकुंभ 12 से ग्राम निनौरा में प्रधानमंत्री सहित देशी विदेशी विद्वजन विभिन्न विषयों पर देंगे उद्बोधन

सिंहस्थ का सार्वभौमिक संदेश देने के लिए तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वैचारिक महाकुंभ का आयोजन उज्जैन के समीप निनौरा ग्राम में 12 से 14 मई तक किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय वैचारिक महाकुंभ का उद्घाटन 12 मई को प्रात: 10 बजे होगा। उद्घाटन सत्र में प्रात: 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ। मोहन भागवत स्वामी श्री अवधेशानंदगिरि जी, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान एवं लोबसंग सन्गे के उद्बोधन होंगे
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अदालती कार्रवाई से परे सोनिया पर हमले आत्मघाती साबित होंगे

एनडीए सरकार बनने के बाद से अब तक हम लगातार यह देखते आ रहे हैं कि केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार, इन दोनों में भाजपा की भागीदार रहने के बावजूद शिवसेना दोनों सरकारों की हर गलती पर सार्वजनिक रूप से बोलते आ रही है, और यह इन दोनों सरकारों को बड़ी गलतियों को दुहराने से बचने का एक मौका भी है
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शब्द और सनसनी

प्रत्येक शब्द अनेकार्थी होता है। वाक्य में, अन्य शब्दों के साथ मिलकर वह विशिष्ट संदर्भों को अभिव्यक्त करने लगता है। इसलिए व्याकरण में शब्दार्थ के साथ शब्द–शक्ति का महत्त्व भी बताया गया है। संदर्भ के अनुसार शब्द के विशिष्ट अर्थ को रचना में उभारकर, उसकी मदद से अपने मंतव्य को स्पष्ट कर देना ही लेखकीय सफलता है। आशय है कि विमर्श के दौरान शब्द अपनी अर्थवत्ता या अर्थवत्ताओं को आमतौर पर बड़े अर्थ यानी सर्जनात्मकता के निमित्त बलिदान कर देता है। रचना में ढलने के लिए शब्द की ओर से यह कुर्बानी जरूरी है। जैसे अनेक बूंदें एक–साथ मिलकर महासागर को जन्म देती हैं
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‘मनमौजी’ की पुस्तक “भोजपुरी रामायण” का लोकार्पण

पटना। वरिष्ठ कवि सिपाही पाण्डेय ‘मनमौजी’ के, राम-कथा पर आधारित भोजपुरी प्रबंध-काव्य, ‘भोजपुरी रामायण’ का लोकार्पण, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित एक समारोह में किया गया
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आदि तीर्थंकर ऋषभ के कठोर तप से जुड़ा है अक्षय तृतीया : गणि राजेन्द्र विजय

वह दिन होता है बैशाख शुक्ला-3 का, अक्षय तृतीया का । या यों कहें भगवान ऋषभ की बारह महीने की तपस्या की पूर्णा इति का दिन। राजकुमार श्रेयांस को इस बात का अनुताप भी होता है कि अज्ञानता के कारण भगवान को इतने कष्ट उठाने पड़े और तपश्चर्या से गुजरना पड़ा। वह तत्काल गवाक्ष से उतरकर महलों से नीचे आकर भगवान के चरणों में नतमस्तक होता है और आप श्री को भिक्षा के लिए राजमहल में पधारने की विनती करता है
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