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 नवगीत महोत्सव - 2014     लमही से लुम्बिनी     मीडिया में मिट रहा सच और झूठ का फर्क : केदारनाथ सिंह     विनय उपाध्याय को पं.बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिलभारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान     मीडिया विमर्श का नया अंक एकात्म मानववाद पर केन्द्रित     पत्रकारिता और भाषा की चुनौतियां पर परिचर्चा सम्पन्न     साहित्य की दुनिया का भी एक सबाल्टर्न है- विश्वनाथ त्रिपाठी   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
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आप इतने मासूम हैं कि मुस्लिम आतंकवादी शब्द समझ में नहीं आ रहा
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दयानंद पांडेय

नवगीत महोत्सव - 2014
लखनऊ। विभूति खण्ड स्थित 'कालिन्दी विला’ के परिसर में दो दिवसीय 'नवगीत महोत्सव - 2014' का शुभारम्भ हुआ। 'अनुभूति', 'अभिव्यक्ति' एवं 'नवगीत की पाठशाला' के माध्यम से वेब पर नवगीत का व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु प्रतिबद्ध 'अभिव्यक्ति विश्वम' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल अपनी रचनात्मकता एवं मौलिकता के लिए जाना जाता है, बल्कि नवगीत के शिल्प और कथ्य के विविध पहलुओं से अद्भुत परिचय कराता है ... पढ़िए
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अवनीश सिंह चौहान

साइबर-सेंधमारी से दुनिया को ब्लैकमेल करना इतना आसान?
इसे देखते हुए पहले तो कुछ सिनेमाघरों ने फिल्म का प्रदर्शन रद्द कर दिया था, लेकिन अब खुद सोनी ने इसकी रिलीज रोक दी है। इसे अमरीका के इतिहास की सबसे बड़ी साइबर-धमकी माना जा रहा है, और कुछ विश्लेषकों का यह कहना है कि आज अगर मनोरंजन-कारोबार की एक काल्पनिक कहानी पर खफा होकर अमरीका की एक सबसे बड़ी कंपनी पर ऐसा हमला हो सकता है ... पढ़िए
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सुनील कुमार

इंटरनट अपनाने के लिए प्राइवेसी खोना ज़रूरी क्यों है
अचानक कितना आर्थिक लाभ हुआ जिसे आपने बड़े जतन से सेपरेट अकाउंट में रखा हुआ है, यह तथ्य भले ही आपके घरवाले न जानें लेकिन बहुत संभव है कि गूगल उसे जानता हो। शायद आपने अपने किसी ईमेल संदेश में किसी से इसका जिक्र किया हो। आपने किसी बड़े लेनदेन पर टैक्स बचा लिया है या फिर जाने−अनजाने में किसी गलत इंसान से संपर्क कर बैठे हैं या फिर क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट करके किसी दूसरे शहर में आ बैठे हैं तो कम से कम गूगल से दूर रहिए ... पढ़िए
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

उदास मौसम के खिलाफ
गैस पीडि़त परिवारों को बीमारियों की विरासत मिली है। नई पीढ़ी में शारीरिक और मानसिक तकलीफें बरकरार हैं। ऐसे में कई सवाल मन को घेरते हैं। इतने मुश्किल हालात से निकले लोग अब कैसे हैं, उनके मन में इस पूरी घटना और इसके परिणामों को लेकर क्‍या चल रहा है। हो सकता है कुछ लोग यह भी सोचें कि अब इस पूरे मामले की पड़ताल करने की ज़रूरत ही क्‍या है ... पढ़िए
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दीपाली शुक्ला

लमही से लुम्बिनी
रायपुर। भारत के दो महान् विभूतियों कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद जन्म स्थली लमही (वाराणसी) और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी (नेपाल) में 7 दिवसीय 10 वाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन आगामी मई, 2015 में किया जायेगा। ... पढ़िए
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सुकमा में माओवादी हमला
इसीलिए त्वरित गति से वे सुकमा हमले को अंजाम दे पाए। माओवादियों ने इस हमले में मानव-ढ़ाल का भी इस्तेमाल किया जो आखिरकार उनकी रक्षा नहीं कर सका। 13 सी.आर.पी. जवान मारे गए, 12 सी.आर.पी. जवान घायल हुए। शहीद जवानों में दो अफसर भी शामिल थे। माओवादियों को बावजूद मानव ढाल के मैदान छोड़ना पड़ा ... पढ़िए
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विश्वजीत सेन

क्या यह इस्लाम है? पेशावर की एक बिलकती मां का सवाल
जो समझते हैं कि इस्लाम इस तरह की कायरतापूर्ण कार्यवाईयों की अनुमति देता है वह भ्रम का शिकार हैं। "बदला लेना निश्चित रूप से एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। लेकिन इतने छोटे बच्चों की हत्या करके किस तरह किस गलती का बदला लिया जा सकता है? यदि आप के भाई की किसी ने हत्या कर दी है और आप किसी और के बच्चे को जाकर मार दें तो इससे कौन सा बदला पूरा हो गया? ... पढ़िए
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सुल्तान शाहीन

डॉ. रमेश चन्द्र महरोत्रा : भाषाविज्ञान के साधक
विगत पचास वर्षों में, मुझे मेरे जिन प्राध्यापकों, सहयोगियों, मित्रों और शिष्यों ने पत्र लिखे, उनमें से चयनित पत्रों का संग्रह पत्र-लेखकों के नाम के क्रम से डॉ. अनूप सिंह ने सम्पादित करके प्रकाशित कराया है। इस संग्रह में 8-10 महानुभावों को छोड़कर अधिकांश लोगों के एक-दो पत्र ही स्थान पा सके हैं। डॉ. अनूप सिंह ने इस संग्रह में डॉ. रमेश चन्द्र महरोत्रा के 8 पत्रों को संकलित किया है। मैं अपनी वर्तमान मनोदशा में इन्हीं पत्रों का सहारा लेकर महरोत्रा जी से जुड़ी यादों को शब्दाकार देने का प्रयास करूँगा ... पढ़िए
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प्रो. महावीर सरन जैन

मीडिया में मिट रहा सच और झूठ का फर्क : केदारनाथ सिंह
अलवर। ''मीडिया में सच और झूठ का अंतर मिटता जा रहा है। आज मीडिया का विभाजन चुनौती भरा है। साहित्य और मीडिया का संबंध काफी गहरा रहा है। पत्रकारिता ने हिन्दी भाषा के कोश के कलेवर को विस्तारित किया है। पर वर्तमान में 'पेड' न्यूज सबसे बड़ी चुनौती है। इसने सच्ची खबरों के बीच फासले खड़े कर दिये हैं।'' यह कहना था साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि एवं भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू के मानद प्रो. केदारनाथ सिंह का ... पढ़िए
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गौतम सिंह 'नोएडा'

विनय उपाध्याय को पं.बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिलभारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान
भोपाल। हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित किए जाने के लिए दिया जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिलभारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष ‘कला समय’ (भोपाल) के संपादक श्री विनय उपाध्याय को दिया जाएगा। ... पढ़िए
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संजय द्विवेदी

पाकिस्तान की स्कूल पर आतंकी हमले के सबक
इस्लाम के नाम पर दुनिया के बहुत से देशों में आतंकी हमले हो रहे हैं, और ऐसा करने वाले लोग अलग-अलग देशों के मुस्लिम लोग हैं, जो कि इस्लाम की तरह-तरह की व्याख्या करते अपनी हिंसा को जायज ठहरा रहे हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया भारत से कुछ दूर है, और पाकिस्तान एकदम लगा हुआ है, और भारत पर पाकिस्तानी मामलों का असर अधिक होता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (27 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 17 दिसम्बर 2014,
सुनील कुमार

छोटी सी बात है!
0 टिप्पणी, कविता, (32 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 17 दिसम्बर 2014,
अर्चना राजहंस मधुकर

उन्हें भारत से नफरत क्यों है?
क्यों कुछ लोगों और दलों को अपनी राजनीति दुकान उजड़ने का खतरा दिखता है। देश में समस्याएं बहुत हैं किंतु ज्यादातर हमने स्वयं पैदा की हैं। अपने देश और उसकी माटी के प्रति कम होते प्यार, राष्ट्रीयता की क्षीण हो रही भावनाएं हमें गलत मार्ग पर ले जाती हैं। यह साधारण नहीं है कि हमारे वतन में पैदा हो रही पौध किसी धार्मिक अतिवादी संगठन के आह्वान पर किसी दूसरे देश जमीन पर जाकर जंग में शामिल हो जाती है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, अतिक्रमण, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 16 दिसम्बर 2014,
संजय द्विवेदी

क्या ममताजी अपने कथन के नतीजों को समझ रहीं हैं?
आज के दिन तक जब शारदा के विरूद्ध जनमत तैयार है और घोटाले में संलिप्त तृणमूल सदस्य जेल जा रहे हैं, तब भी ममता अपनी पार्टी के लोगों के खिलाफ एक बार भी मुंह नहीं खोली। इसमें कुणाल घोष अपवादस्वरूप हैं जो ममता के तुगलकी शासन पर मन्तव्य करने के कारण जेल गए। इसलिए यह मामला घोटाले से नहीं बल्कि तृणमूल के अन्तर्कलह से जुड़ा है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 16 दिसम्बर 2014,
विश्वजीत सेन

धृतराष्ट्र आंखों से महरूम थे, मगर यह न समझो कि मासूम थे
प्लेटफार्म नंबर एक और दो को मिला कर यह सवा किलोमीटर की लंबाई बनती है। तो यह रिकार्ड तो फर्जी हुआ। आंख में धूल झोंकना हुआ। तीसरे यात्रियों को जो असुविधा होती है इतना लंबा चलने में, इस की भी रेल प्रशासन को कुछ खबर है? स्वस्थ आदमी भी चलते-चलते थक जाए। साथ में जो सामान हो तो आदमी खच्चर बन जाए ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (31 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 15 दिसम्बर 2014,
दयानंद पांडेय

म्युनिसिपल-पंचायत चुनावों से ईमानदारी शुरू होने की संभावना
शहरी मतदाताओं को जो सबसे छोटे नेता चुनने होते हैं, वे पार्षद रहते हैं, और एक ही चुनाव में ऐसे मतदाताओं को महापौर या पालिका अध्यक्ष के लिए भी वोट डालना होता है। म्युनिसिपल के चुनाव अंग्रेजों के समय से लोग देखते आ रहे हैं, और लोगों ने अच्छे और बुरे, भ्रष्ट और ईमानदार, मेहनती और निकम्मे, सभी किस्म के पालिका अध्यक्ष, महापौर, या पार्षद देखे हुए हैं। हमारी सलाह महज इतनी है कि ऐसे लोगों को चुनें, जो कि भ्रष्ट न हों ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (23 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 15 दिसम्बर 2014,
सुनील कुमार

मीडिया विमर्श का नया अंक एकात्म मानववाद पर केन्द्रित
भोपाल। जनसंचार के सरोकारों पर केन्द्रित त्रैमासिक पत्रिका 'मीडिया विमर्श' का नवीनतम अंक 'भारतीयता का संचारक' बाजार में आते ही राजनीति और मीडिया के क्षेत्र में चर्चित हो गया है। राष्ट्रवादी विचारधारा के स्तम्भ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन और पत्रकारीय कौशल पर उम्दा सामग्री इस अंक में है। उनके विचार दर्शन 'एकात्म मानववाद' को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (40 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 14 दिसम्बर 2014,
लोकेंद्र सिंह

फलित ज्योतिष और वैज्ञानिकता
इस विषय में मत है कि भौतिक वैज्ञानिकों के साथ मिलकर, आधुनिक यन्त्रों की सहायता से ज्योतिष के शास्त्रीय नियमों की पुनः जाँच कर अनुपयोगी, अवास्तविक एवं भ्रम जगाने वाले तत्वों की पहचान कर उनका उपयोग बन्द कर देना चाहिये। वे उसी नियम, आधार को उपयोगी मानते हैं जिनसे सटीक भविष्यवाणी की जा सके तथा सभी ज्योतिषी एक ही निष्कर्ष पर पहुँच सकें। भविष्यकथन में समरूपता की आवश्यकता निरूपित करना महथा जी का मन्तव्य है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (44 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 14 दिसम्बर 2014,
सुरेश कुमार पंडा

क्या असीमित है कविता का संसार?
जनसरोकार और लोकचेतना तो कविता के आवश्यक तत्व हैं। हमारे दौर के युवा कवियों ने कई जनान्दोलन नहीं देखा है। उनके सारे विचार और अवधारणाएं पढ़ने से समझकर निर्मित हुई हैं। हां, कुछ कवि हैं जो छात्र आन्दोलन की पृष्ठभूमि से आए हैं। मैं स्वयं लंबे समय तक छात्र-संगठन से जुड़ा रहा हूं। वामपंथी सांस्कृतिक आन्दोलनों में मेरी सक्रियता रही है। इसी से हमारी एक समझ विकसित हुई है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कथोपकथन, (41 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 14 दिसम्बर 2014,
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देश में इतनी साम्प्रदायिक और धार्मिक आक्रामकता ठीक नहीं
आज भी देश में सोचने-विचारने वाला तबका यह सोच रहा है कि नरेन्द्र मोदी जिस दरियादिली की बातें अपने भाषणों में करते हैं, उससे ठीक उल्टा चलने वाले अपने साथियों को वे क्यों नहीं रोक पा रहे हैं? संसद के भीतर उनको अपनी साध्वी-मंत्री के आपराधिक बयान पर अफसोस जाहिर करना पड़ा, और उसके बाद अब उनके दूसरे सांसद मानो उससे भी अधिक आक्रामक, और विविधता वाले बयान देकर अपनी हमलावर मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (50 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 13 दिसम्बर 2014,
सुनील कुमार

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