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आप मत मानिए, मंदिर, गिरिजा, मजार, मस्जिद, गुरुद्वारा पर बंद कीजिए यह जहरीली, हिंसक जुबान!

जांच होती भी है कभी कभार तो बस सुरक्षा जांच होती है। जो वहां का जिला प्रशासन करता है। यही बात मैंने काशी के विश्वनाथ मंदिर में भी देखी है। या किसी भी मंदिर में यही सुरक्षा जांच देखता हूं, जो वहां का प्रशासन करता है। मंदिर के लोग नहीं। बड़े-बड़े सेक्युलरिस्ट यथा राजा दिग्विजय सिंह, लालू प्रसाद यादव इस गोरखनाथ मंदिर में आ कर इन के चरण छूते हैं। अखबारों में ऐसी फोटुएं छपी मैं ने देखी हैं। दूसरा मंदिर है डोमिनगढ़ के पास बसियाडीह का मंदिर
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कविता में अभियान, गद्य में शासन

मोदी पर लिखनेवाले कई लेखकों की मंशा भी वहीं पहुंचने की है, लिहाजा वो भक्तिभाव से लेखन कर रहे हैं। हो सकता है कि इस तरह के लेखन से उनको लाभ मिल जाए लेकिन साहित्य या राजनीतिशास्त्र को वो कोई स्थायी महत्व की पुस्तक नहीं दे पाएंगे। किताबों की इस भीड़ के बीच लंबे समय तक पत्रकार रहे लेंस प्राइस की किताब- द मोदी इफेक्ट, इनसाइड नरेन्द्र मोदी’ज़ कैंपेन टू ट्रांसफॉर्म इंडिया प्रकाशित हुई
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इतिहास रच रही हैं ये मुस्लिम लड़कियां

कारी हाशिमुल कादरी बताते हैं मदरसे में महानगर के मुगलपुरा, करुला, मकबरा, मंडी चौक सहित कई मोहल्लों से लड़कियां तालीम हासिल करने आती हैं। हर साल की तादाद बढ़ रही है। इन्हें हिफ्ज, आलिम, कारी और मुफ्ती बनने की तालीम दी जा रही है
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उड़ने वाला घोड़ा

राजकुॅवर ने उस बूढ़ी से पूॅछा: माता जी मैं बहुत दिनों से भूखा हूॅ कुछ खाने को मिलेगा। तब उस बूढ़ी ने कहाःबेटा मैं तुमको भोजन तो करा दूॅगी!इसके एवज में तुमको मेरे जानवरों को चराने जॅगल ले जाना पड़ेगा। राजकुॅवर ने भर पेट भोजन किया और उस बूढ़ी के जानवरों को चराने जॅगल की ओर चला गया
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बयालीस बरस की बेहोशी के बाद की मौत से उठे सवाल

दिमाग से मर चुके एक आदमी के परिवार ने उसके हाथों को अफगानिस्तान के एक ऐसे जख्मी को दान किया जिसके दोनों हाथ कट चुके थे। और अब लंबे ऑपरेशन के बाद वे हाथ फिर से एक चलते-फिरते जिंदा शरीर में काम आ रहे हैं। क्या लोगों की स्थायी बेहोशी, या कोमा, या दिमागी मौत की हालत ने उनके अंग दूसरों के काम नहीं आने चाहिए
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फेसबुक पर खबरें! मीडिया के लिए अवसर या चुनौती?

यह सुविधा इसी के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं, यहाँ पर अहमदाबाद, बेंगलुर, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, नयी दिल्ली और पुणे के बस एवं मेट्रो मार्गों की भी सूचना मिलेगी। गूगल मैप्स का इस्तेमाल एंड्रोइड और आईओएस आधारित स्मार्टफोनों के साथ-साथ डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटरों पर भी किया जा सकता है
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धर्म की सत्ता और सत्ता का धर्म

सभ्यता में आधुनिक चेतना के समावेश के बाद से शिक्षा का एक वैश्विक आयाम सर्वदा आकांक्षित रहा है। इसी आकांक्षा के कारण शिक्षा के शिखर संस्थानों को विश्वविद्यालय कहा जाता है। आज जीवन के अन्य प्रसंगों में भूमंडलीकरण की प्रक्रिया को, विश्व-स्तरीय जनविरोध के बावजूद, निर्बाध चलाने की कोशिश की जा रही है, राष्ट्र बोध सिकुड़ रहा है। अद्भुत यह कि 'राष्ट्र बोध' का दायरा सिकुड़ रहा है और 'भारत बोध' का दायरा बढ़ रहा है
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मोदी का पहला साल, एक विदेशी मोर्चा और एक देशी मोर्चा बड़े मुद्दे

खासकर बर्बाद आखिरी पांच बरस के बाद एक राजनीतिक और शासकीय शून्य की नौबत में प्रधानमंत्री बने। और जैसा कि आसमानी हवाओं के बीच शून्य बनने पर वहां हवा आंधी बनकर दाखिल होती है, मोदी के साथ कुछ वैसा ही हुआ। छोटी-छोटी बातों पर उनकी खामियां देखने के पहले हम यह याद करना चाहेंगे कि जिस नेता ने केन्द्र सरकार में या पार्टी के केन्द्रीय ढांचे में एक दिन भी काम नहीं किया था
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जंगलमहल की विधवाएँ

उनके पति का दाहिना पैर जंगल में हाथी द्वारा खदेड़े जाने पर टूट गया था। उसके बाद उनके पैर की शल्य चिकित्सा हुई, जिस दौरान उनके पैर में लोहे की पट्टी लगाई गई। तीन वर्षों पूर्व कदमखंडी गांव से पश्चिम, कंसावती नदी केे किनारे मिट्टी के नीचे से जो कंकाल मिला था, उसके भी दाहिने पैर में लोहे की पट्टी लगी हुई मिली थी। इसके अलावे नरकंकाल के दाँत भी झरना के पति के दाँत से मिलते-जुलते थे
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कारगिल की घाटी

जम्मू-दर्शन का वर्णन लेखिका ने अत्यंत ही सुंदर भाषाशैली में किया है, रघुनाथ मंदिर की भव्य प्राचीन स्थापत्य कला, कई मंदिरों के छोटे-बड़े सफ़ेद कलात्मक ध्वज, वहाँ की सड़कें, वहाँ की दुकानें, वाहनों की कतारें, फुटपाथिए विक्रेता, बाजार की दुकानों के बाहर का अतिक्रमण, रेस्टोरेंट यहाँ-वहाँ पड़े कचरे का ढेर ...... जहां-जहां लेखिका की दृष्टि पड़ती गई, उन्होंने अपनी नयन रूपी कैमरे ने सारे दृश्य को कैद कर लिया
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महाकवि पंत की जयंती

पटना। कोमल भावों के स्तुत्य कवि थे सुमित्रा नंदन पंत। प्रकृति और उसके मोहित कर देने वाले सौंदर्य से उन्होंने अपनी कविता-सुंदरी का श्रृंगार किया। जीवन में रस का संचार करने वाली तथा जीवन के विविध रंगों को समझने में सहायता पहुंचानेवाली उनकी रचनाएं आज भी पाठक-समुदाय को मोहित करती हैं
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समाज की सतायी औरतों की प्रेरणा

पिता के सहयोग से शिक्षामित्र की अदनी सी नौकरी पा लेती है और अपनी तथा अपने मां-बाप की ज़रूरतों को ढोने लगती है। अपने भाइयों के आगे हाथ फैलाने में उसे अपमान महसूस होता है और मर्द जाति की अपने आसपास फैली सत्ता में घुटन। उस का प्रेम-प्रसंग गांव-जवार में बदनामी नाम से विज्ञापित होता हुआ उस के भाइयों तक भी जा पहुंचता है
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पीएम के स्वागत में अफसरों की पोशाक पर नोटिस, और उससे जुड़ी कुछ बातें

केवल सरकारी शिष्टाचार के नियमों और परंपराओं तक सीमित रखना चाहते हैं। मई-जून के महीने में भी जब इस गर्म देश के इसी गर्म प्रदेश में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पहुंचते हैं, तो चिलचिलाती धूप में भी खुले विमानतल पर अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे बंद गले के कोट या जॉकेट में रहें, और ऐसे स्वागत से परे भी सरकार के नियमित कामकाज में बहुत से लोग अपनी पसंद से भी इस किस्म की औपचारिक पोशाक में रहते हैं जो कि इस देश के मौसम के ठीक खिलाफ जाती है
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नीलामी के सारे रिकॉर्ड टूटे

न्यूयार्क। मशहूर कलाकार पाब्लो पिकासो का चर्चित तैल-चित्र ‘द वीमेन आफ अल्जीयर्स’ (अल्जीयर्स की औरतें) न्यूयार्क में 17.9 करोड़ डालर से अधिक राशि में बिका। इसने अब तक कला नीलामी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इसे इस सदी की सबसे उल्लेखनीय नीलामी करार दिया जा रहा है
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इस्लाम और यूरोप

आज भी बौद्ध धर्म को श्रद्धा से देखने वालों की संख्या ईसाई या इस्लाम मतावलंबियों से अधिक ही होगी। लेकिन कोई उन्हें चुनौती के रूप में नहीं देखता, क्योंकि बौद्ध मत के विस्तार में भी दूसरे मतों का निषेध नहीं होता। ईसाई और इस्लाम मत के प्रसार में एक नैतिक आदेश के साथ द्वेष और हिंसा भी घुली-मिली रही है और इसलिए वे एक-दूसरे के लिए चुनौती बने रहे
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मरते हैं भूमिपुत्र, खुश हैं यमराज

एक गाँव में एक कॉलेज का अध्यापक है, जो सप्ताह में मुश्किल से पाँच घंटे क्लास में जाता है (पढाता क्या है, यह उसके छात्र ही बताएँगे!), और हर महीने नियमित रूप से डेढ़ लाख रुपये वेतन पाता है। रिटायर होने पर पेंशन अलग से उसे निश्चिन्त करता है। दूसरी ओर एक किसान है,जो दिन-रात जाड़ा-गर्मी एककर मुश्किल से अपने परिवार को एक शाम खिला पाता है
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बाल मजदूरी के मौजूदा कानून और नए प्रस्तावित कानून का हकीकत से लेना-देना नहीं

निगाहों के सामने के इन बाल मजदूरों से परे के ऐसे करोड़ों बाल मजदूर हिन्दुस्तान में हैं जो कि कारखानों में, गंदी जगहों पर, खतरों के बीच, जहरीली हवा और पानी में बंधुआ मजदूर की तरह काम करते हैं। हिन्दुस्तान की हालत ऐसी है कि बंधुआ बाल मजदूरों की भलाई के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी को नोबल पुरस्कार मिला है। जाहिर है कि इस मोर्चे पर काम करने को इतना अधिक होगा
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आधुनिक हिन्दी के एक युग के प्रणेता थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी : डॉ अनिल सुलभ

पटना। आधुनिक हिन्दी साहित्य में अपने अतुल्य अवदानों से आचार्यवर्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने एक ऐसा कीर्ति-स्तम्भ स्थापित किया, जिससे हिन्दी साहित्य के इतिहास में, उनके साधना काल को ‘द्विवेदी युग’ के रूप में स्मरण किया जाता है। विज्ञजन यह जानते हैं कि आज की खड़ी बोली हिन्दी जो रूप प्राप्त कर सकी, और जिसके कारण अपनी अल्पायु में हीं यह भारतवर्ष की ही नही, अपितु विश्व की आदरणीया भाषाओं में प्रतिष्ठित हो गयी
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ब्लॉगिंग को 'साहित्य' कहलाने की अनावश्यक बेताबी

हिंदी ब्लॉगिंग के अधिकांश मंचों पर तथाकथित उपलब्धियों, खुशफहमियों और प्रचारात्मक बिंदुओं पर आधारित मुद्दे हावी हो जाते हैं। ऐसे मंचों पर प्रायः ईमानदार समालोचना और तटस्थ मूल्यांकन का अभाव रहता है। इतने वर्षों बाद ब्लॉगिंग की वाहवाही करते रहने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अंततः हम यह प्रचार उन्हीं लोगों के बीच कर रहे हैं जो स्वयं ब्लॉगर हैं या हिंदी से जुड़े हैं। हिंदी ब्लॉगिंग की वास्तविकताएं उनसे छिपी नहीं हैं
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बेतरतीब ज़िन्दगी....

वही पत्नी को पसन्द नहीं था। उसे शिक़ायत रहती कि घर में काग़ज़ बिखरे रहते हैं। उसे यह भी शक़ रहता कि इस उम्र में उसके शेरों में रोमांस कहां से आता है। कौन है उसकी प्रेरणा? पत्नी को उर्दू भाषा से भी एलर्जी थी। वह समझाने का यत्न भी करता कि ग़ज़ल में उर्दू के लफ़्ज़ ख़ुद-ब-ख़ुद चले आते हैं। मगर पत्नी को न समझना था न समझी
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पाकिस्तान की ताजा हिंसा और भारत के लिए सबक

यह लगता है कि किसी एक बात के कितने तरह के सही और गलत मतलब निकाले जा सकते हैं, और एक धर्म मोहब्बत भी सिखा सकता है, और उन्हीं शब्दों के दूसरे मतलब निकालकर नफरत से लहू भी फैलाया जाता है, फैलाया जा रहा है। आज इस्लाम के नाम पर इराक से लेकर अफगानिस्तान तक, और सीरिया से लेकर पाकिस्तान तक, यमन और अफ्रीका के कई देशों तक जिस तरह के जुल्म ढाए जा रहे हैं, जिस तरह से बच्चों और महिलाओं से बलात्कार हो रहा है
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