एक बेटी की विदा का शिलालेख!
क्यों कि तब1862 में ज़फ़र की आज़ादी की लगाई आग देश में बुझी नहीं और ब्रिटिश बहादुरों को तमाम जतन के बाद भी देश छोड़ कर जाना पड़ा था। तो क्या यह सरकार बहादुर शाह ज़फ़र की शहादत को, उस इतिहास को दुहराने की राह पर है? और उसी धुन में मगन निरंतर अपने दूध को काला बताने और जीत लेने की फ़िक्र में है? ... पढ़िए
आधे मौके महिलाओं के लिए मप्र से उठी एक अच्छी मिसाल
सरकारी तामझाम के साथ मुख्यमंत्री या मंत्रियों की मौजूदगी में एक साथ वे शादियां निपट गईं, तो समाज के गरीबों का पैसा बचा, या कर्ज लेने की नौबत बची। इसी तरह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों जगह लड़कियों और महिलाओं के लिए कई तरह की योजनाएं ऐसी शुरू हुई हैं, जो कि देश के दूसरे बहुत से राज्यों में नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में जगह देने के लिए उनकी उम्र सीमा में इतनी बड़ी छूट दी गई है, कि महिलाएं अपने बच्चों को बड़ा करने के बाद भी नौकरी में आने की कोशिश कर सकती हैं। ... पढ़िए
प्राण शर्मा की ग़ज़ल
काव्येतिहास में महेन्द्रभटनागर का रचना-जगत
दूसरे शब्दों में कहें तो वे नवजागरण की कर्मभूमि से रचनात्मक शक्ति का अवगाहन करते दिखाई देते हैं। निराला का रचनात्मक नवजागरण परवर्ती कवियों का मार्गदर्शन करता दृष्टिगत होता है, अतः डॉ. महेंद्रभटनागर का निराला-नवजागरण से प्रभावित होना स्वभाविक ही है। हिन्दी काव्य-साहित्य में यह एक नया मोड़ था। ... पढ़िए
भटकाव का शिकार माओवाद
लड़ाई की आंच अब बड़े नेताओं तक भी पहुंच रही है। इस घटनाक्रम की व्याख्या कई तरह से की जा सकती है। एक व्याख्या यह हो सकती है कि शस्त्र, इच्छाशक्ति आदि के मामले में सुरक्षा बल या माओवादियों के प्रतिस्पर्धी उन पर भारी पड़ रहे हैं। लेकिन माओवादियों के पास भी कोई कम बड़ा शस्त्र भंडार नहीं है। उनके लड़ाके भी कोई कम कुशल नहीं हैं। साथ ही वे एक खास विचारधारा से प्रभावित हैं, जो उनके लिए सुविधाप्रद बात है। ... पढ़िए
असगर अली इंजीनियर नहीं रहे
मुंबई। बड़े इस्लामिक विद्वान के रुप में पहचाने जाने वाले असगर अली इंजीनियर अब नहीं रहे। लंबी बीमारी से जूझते हुए मंगलवार को उनकी मौत हो गई। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 73 साल के इंजीनियर ने मंगलवार सुबह सांताक्रूज स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। ... पढ़िए
पाकिस्तानी चुनाव अभियान: आतंकवादी अपने उद्देश्यों में स्पष्ट हैं, लेकिन क्या हम भी हैं?
झारखण्ड में संताली फिल्मोद्योग को बढ़ावा देने की जरुरत-बाबू लाल मराण्डी
झारखण्ड। इण्डोर स्टेडियम दुमका में नेशनल संताली फिल्म महोत्सव -2013 समापन सत्र के अवसर पर उपरोक्त बातें जेवीएम सुप्रिमों सह राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री बाबू लाल मराण्डी ने कही। वतौर मुख्य अतिथि अपना उद्गार प्रकट करते हुए कहा श्री मराण्डी ने कहा तकनीकी दृष्टिकोण से उन्नत बनाते हुए फिल्म के बाजार निर्माण व आम लोगों तक इसकी पहुँच बनाने की जरुरत है ... पढ़िए
या तो कांग्रेस का आक्रामक घमंड बदलेगा, या फिर अगले चुनाव में...
इस बात पर भी किसको भरोसा होगा कि सोनिया गांधी एक मनाही सुनकर भी मनमोहन सिंह जैसे आधारहीन नेता को बर्दाश्त करने पर बेबस होंगी। इसलिए अभी भी हमारा यही मानना है कि यूपीए और कांग्रेस के भीतर आज जो कुछ हो रहा है वह या तो सोनिया की मर्जी है, या फिर वे उसके लिए सहमत हैं। इससे कम इस पार्टी और गठबंधन में और कुछ नहीं हो सकता। आज हालत यह है कि यूपीए के दो केबिनेट मंत्रियों पर बड़ी-बड़ी तोहमत अदालत में लग रही है और सीबीआई के मामले में नाम जुड़ रहा है, इसके बावजूद मंत्रिमंडल की कोई बैठक नहीं हुई, यूपीए गठबंधन की कोई बैठक नहीं हुई ... पढ़िए
रीतिकालीन कविता का राजनीतिक पक्ष
जंगल में स्वतंत्र रहता है। इससे ज्यादा चिन्ता मैथिलीशरण गुप्त के पास भी नहीं थी। स्वाधीनता के महत्व का गान कर रहे थे दीनदयाल गिरि। ऐसी कविता और ऐसे काल को रामचंद्र शुक्ल के कह देने से गरियाने का काम पिछले सौ साल से हो रहा है। ये कवि तो अपनी अंग्रेजी राज की पहचान कर रहे हैं, ... पढ़िए
कांग्रेस की झुलसी चमड़ी के लिए मरहम, और भाजपा के लिए सबक
चुनावी आंकड़े हकीकत से अलग भी रहते हैं, और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के कपूत येदियुरप्पा ने यह जीत अपनी पिछली पार्टी से छीनकर, तश्तरी पर धरकर कांग्रेस को तोहफे में दी है। इसलिए इसे लेकर कांग्रेस को कोई खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए। और यह भी तय है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को कर्नाटक की आज की जीत से कोई बड़ा फायदा भी नहीं मिलने वाला है, बल्कि कर्नाटक के भाजपाई भ्रष्टाचार जैसा कोई मुद्दा बाकी देश में यूपीए-विरोधी राज्यों में नहीं रहने वाला है ... पढ़िए
छाया भी साथ छोड़ देती है
छत्तीसगढी़ फिल्मों के लिए सिनेमाघर सबसे बड़ी जरूरत
रायपुर। छत्तीसगढ़ी फि ल्मों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता सिनेमाघरों की है। अभी करीब 36 सेंटर है इस·की संख्या 150-200 हो जाए तो छत्तीसगढ़ी सिनेमा का उत्थान हो जायेगा। उक्त विचार सिनेमा के सौ साल और छत्तीसगढ़ी फिल्म विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। ... पढ़िए
दो आसमानों के बीच-एक
भारतीय दर्शन:स्वरूप एवम परम्परा1
क्या प्रकांड पंडित होना इतना बड़ा पाप है?
कबीर के काव्य रूपों, पदावली, साखी और रमैनी का जो ब्यौरा, विस्तार और विश्लेषण आचार्य परशुराम चतुर्वेदी ने परोसा है, और ढूंढ ढूंढ कर परोसा है, वह आसान नहीं था। फिर बाद में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सरीखों ने कबीर को जो प्रतिष्ठा दिलाई, कबीर को कबीर बनाया, वह आचार्य परशुराम चतुर्वेदी के किए का ही सुफल और विस्तार था, कुछ और नहीं। ... पढ़िए
कौवा
कौवे के इस उत्पात से बचने के लिए उस दिन से उपयुक्त कार्रवाई करने की योजना बनायी गयी। कौवे के साथ निपटने के लिए छात्रावास में मोहन और मधु को नियुक्त किया गया। जय-विजय द्वारा विष्णु द्वार को सभी संकटों से रक्षा करने की तरह मोहन-मधु ने भी धनुष-तीर लेकर कौवे से छात्रावास के अन्न-व्यंजन के यज्ञ की रक्षा की। ... पढ़िए
कोर्ट पीएम के हिस्से का काम भी करे, और ऐसे मंत्री को तुरंत हटाए
लेकिन सरकार है कि वह इसे गलत तक नहीं मान रही है। इन दोनों मामलों को देखें तो लगता है कि जब सरकार का ऐसा रूख है तो संसद का क्या मतलब है? उस संसद की अब क्या जरूरत है जिसमें विपक्ष के बहिष्कार का हम अब भी विरोध करते हैं, और बार-बार कहते हैं कि संसद के हर पल का इस्तेमाल विपक्ष को सरकार के गलत काम उजागर करने में करना चाहिए। अब हमारे मन का एक हिस्सा हमारे ही मन के दूसरे हिस्से से सवाल करता है कि जब सरकार का यह हाल है ... पढ़िए
`ऋतुराज एक पल का' गीत संग्रह का लोकार्पण
देहरादून। हिन्दी के मूर्धन्य गीत-कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र के भारतीय ज्ञानपीठ से सद्यःप्रकाशित, नये भावबोध के गीतों के संग्रह ‘ऋतुराज एक पल का’ का लोकार्पण दिल्ली के सुप्रसिद्ध इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में हुआ। इंडियन ऑयल के सहयोग से इंटरनेशनल मेलोडी फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि सिक्किम के राज्यपाल और अंग्रेज़ी के प्रतिष्ठित लेखक श्री बाल्मीकि प्रसाद सिंह, आइएएस थे ... पढ़िए
बच्चों की आड़ ले रहे हैं माओवादी
इसलिए आप उसकी प्रामाणिकता पर शक नहीं कर सकते। उसी खबर में यह जिक्र है कि पश्चिम बंगाल समेत पाँच राज्यों में माओवादियों ने 3000 बच्चो को बाल सेना में भरती की है। इस खबर ने राष्ट्रसंघ तक को परेशानी में डाल दिया है। ”आनन्द बाजार पत्रिका“ के संवाददाता राहुल राय के अनुसार राष्ट्रसंघ महासचिव वान-कि-मून ने अपने वार्षिक रिपोर्ट में इस प्रकरण का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सतर्क किया है। ... पढ़िए
सल्फ़ी विचारधारा में महिलाओं की स्थिति क़ैदियों के जैसी है
क्यों कि तब1862 में ज़फ़र की आज़ादी की लगाई आग देश में बुझी नहीं और ब्रिटिश बहादुरों को तमाम जतन के बाद भी देश छोड़ कर जाना पड़ा था। तो क्या यह सरकार बहादुर शाह ज़फ़र की शहादत को, उस इतिहास को दुहराने की राह पर है? और उसी धुन में मगन निरंतर अपने दूध को काला बताने और जीत लेने की फ़िक्र में है? ... पढ़िए0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 19 मई 2013,
दयानंद पांडेय
आधे मौके महिलाओं के लिए मप्र से उठी एक अच्छी मिसाल
सरकारी तामझाम के साथ मुख्यमंत्री या मंत्रियों की मौजूदगी में एक साथ वे शादियां निपट गईं, तो समाज के गरीबों का पैसा बचा, या कर्ज लेने की नौबत बची। इसी तरह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों जगह लड़कियों और महिलाओं के लिए कई तरह की योजनाएं ऐसी शुरू हुई हैं, जो कि देश के दूसरे बहुत से राज्यों में नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में जगह देने के लिए उनकी उम्र सीमा में इतनी बड़ी छूट दी गई है, कि महिलाएं अपने बच्चों को बड़ा करने के बाद भी नौकरी में आने की कोशिश कर सकती हैं। ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (2 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 19 मई 2013,
सुनील कुमार
प्राण शर्मा की ग़ज़ल
0 टिप्पणी, छंद > ग़ज़ल, (2 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 19 मई 2013,
प्राण शर्मा
काव्येतिहास में महेन्द्रभटनागर का रचना-जगत
दूसरे शब्दों में कहें तो वे नवजागरण की कर्मभूमि से रचनात्मक शक्ति का अवगाहन करते दिखाई देते हैं। निराला का रचनात्मक नवजागरण परवर्ती कवियों का मार्गदर्शन करता दृष्टिगत होता है, अतः डॉ. महेंद्रभटनागर का निराला-नवजागरण से प्रभावित होना स्वभाविक ही है। हिन्दी काव्य-साहित्य में यह एक नया मोड़ था। ... पढ़िए0 टिप्पणी, मूल्याँकन, (44 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 18 मई 2013,
वीरेन्द्र आस्तिक
भटकाव का शिकार माओवाद
लड़ाई की आंच अब बड़े नेताओं तक भी पहुंच रही है। इस घटनाक्रम की व्याख्या कई तरह से की जा सकती है। एक व्याख्या यह हो सकती है कि शस्त्र, इच्छाशक्ति आदि के मामले में सुरक्षा बल या माओवादियों के प्रतिस्पर्धी उन पर भारी पड़ रहे हैं। लेकिन माओवादियों के पास भी कोई कम बड़ा शस्त्र भंडार नहीं है। उनके लड़ाके भी कोई कम कुशल नहीं हैं। साथ ही वे एक खास विचारधारा से प्रभावित हैं, जो उनके लिए सुविधाप्रद बात है। ... पढ़िए0 टिप्पणी, आलेख, (10 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 18 मई 2013,
विश्वजीत सेन
असगर अली इंजीनियर नहीं रहे
मुंबई। बड़े इस्लामिक विद्वान के रुप में पहचाने जाने वाले असगर अली इंजीनियर अब नहीं रहे। लंबी बीमारी से जूझते हुए मंगलवार को उनकी मौत हो गई। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 73 साल के इंजीनियर ने मंगलवार सुबह सांताक्रूज स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। ... पढ़िए0 टिप्पणी, हलचल, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 17 मई 2013,
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पाकिस्तानी चुनाव अभियान: आतंकवादी अपने उद्देश्यों में स्पष्ट हैं, लेकिन क्या हम भी हैं?
दूसरी ओर पाकिस्तान एक राज्य के रूप में और हम पाकिस्तानी क़ौम के रूप में एक गहरे दलदल में खुद को महसूस करते हैं और इस परिदृश्य में विभिन्न समस्याओं और असमंजसों का सामना कर रहे हैं। हमारे पास इस खतरे से निपटने के लिए एक स्पष्ट रणनीति नहीं है क्योंकि हमारे बीच इस बात पर सहमति भी नहीं है कि ये एक खतरा है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (6 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 17 मई 2013,
बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ
झारखण्ड में संताली फिल्मोद्योग को बढ़ावा देने की जरुरत-बाबू लाल मराण्डी
0 टिप्पणी, हलचल, (10 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 16 मई 2013,
दुमका से अमरेन्द्र सुमन
या तो कांग्रेस का आक्रामक घमंड बदलेगा, या फिर अगले चुनाव में...
इस बात पर भी किसको भरोसा होगा कि सोनिया गांधी एक मनाही सुनकर भी मनमोहन सिंह जैसे आधारहीन नेता को बर्दाश्त करने पर बेबस होंगी। इसलिए अभी भी हमारा यही मानना है कि यूपीए और कांग्रेस के भीतर आज जो कुछ हो रहा है वह या तो सोनिया की मर्जी है, या फिर वे उसके लिए सहमत हैं। इससे कम इस पार्टी और गठबंधन में और कुछ नहीं हो सकता। आज हालत यह है कि यूपीए के दो केबिनेट मंत्रियों पर बड़ी-बड़ी तोहमत अदालत में लग रही है और सीबीआई के मामले में नाम जुड़ रहा है, इसके बावजूद मंत्रिमंडल की कोई बैठक नहीं हुई, यूपीए गठबंधन की कोई बैठक नहीं हुई ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 16 मई 2013,
सुनील कुमार
रीतिकालीन कविता का राजनीतिक पक्ष
जंगल में स्वतंत्र रहता है। इससे ज्यादा चिन्ता मैथिलीशरण गुप्त के पास भी नहीं थी। स्वाधीनता के महत्व का गान कर रहे थे दीनदयाल गिरि। ऐसी कविता और ऐसे काल को रामचंद्र शुक्ल के कह देने से गरियाने का काम पिछले सौ साल से हो रहा है। ये कवि तो अपनी अंग्रेजी राज की पहचान कर रहे हैं, ... पढ़िए0 टिप्पणी, मूल्याँकन, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 15 मई 2013,
मैनेजर पाण्डेय
कांग्रेस की झुलसी चमड़ी के लिए मरहम, और भाजपा के लिए सबक
चुनावी आंकड़े हकीकत से अलग भी रहते हैं, और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के कपूत येदियुरप्पा ने यह जीत अपनी पिछली पार्टी से छीनकर, तश्तरी पर धरकर कांग्रेस को तोहफे में दी है। इसलिए इसे लेकर कांग्रेस को कोई खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए। और यह भी तय है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को कर्नाटक की आज की जीत से कोई बड़ा फायदा भी नहीं मिलने वाला है, बल्कि कर्नाटक के भाजपाई भ्रष्टाचार जैसा कोई मुद्दा बाकी देश में यूपीए-विरोधी राज्यों में नहीं रहने वाला है ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 14 मई 2013,
सुनील कुमार
छाया भी साथ छोड़ देती है
0 टिप्पणी, कविता, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 14 मई 2013,
राजेन्द्र उपाध्याय
छत्तीसगढी़ फिल्मों के लिए सिनेमाघर सबसे बड़ी जरूरत
रायपुर। छत्तीसगढ़ी फि ल्मों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता सिनेमाघरों की है। अभी करीब 36 सेंटर है इस·की संख्या 150-200 हो जाए तो छत्तीसगढ़ी सिनेमा का उत्थान हो जायेगा। उक्त विचार सिनेमा के सौ साल और छत्तीसगढ़ी फिल्म विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। ... पढ़िए0 टिप्पणी, हलचल, (31 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 13 मई 2013,
रायपुर से तापेश जैन
दो आसमानों के बीच-एक
सकुशल घर लौटना भी चुनौतीपूर्ण होता। गंतव्य तक पहुंचने में महीनों, कभी-कभी तो पूरा वर्ष लग जाता था। यात्रा के बीच मौसम की मार भी असर करती। कभी आंधी-तूफान तो कभी बरसात राह रोक लेती। समुद्री यात्राओं की सफलता तो मौसम की मेहरबानी बगैर मानो असंभव ही थी। पुराने ज्योतिषी, भविष्यवक्ता असल में अच्छे मौसम विज्ञानी होते थे। वे खुले आसमान को ताककर मौसम का मिजाज भांप लेते। हवाओं का रुख देख अपने अनुभव-विवेक के बाद ही कोई समाधान देते थे। फिर भी अनिश्चितता तो थी। अनचीन्हे हजार संकट। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आखर-अनंत, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 13 मई 2013,
ओमप्रकाश कश्यप
भारतीय दर्शन:स्वरूप एवम परम्परा1
इस अतिवाद का अपने पक्ष में यह तर्क है कि ज्ञान और विज्ञान का वास्तविक स्वरूप सार्वभौमिक होता है और उसके आगे 'भारतीय' अथवा 'पाश्चात्य' जैसे विशेषणों का लगाया जाना बिल्कुल बेमतलब है; किन्तु फिर भी यदि 'भारतीय' शब्द का प्रयोग होता है तो वह एक असाधारण प्रयोग है जो कि 'फिलासफी' शब्द के प्रचलित अर्थ का मूलत: निषेध करता है। पर यह सब सच नहीं है; और अतिवादी के तर्क में ज्यादा दम भी नहीं है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, मूल्याँकन, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 13 मई 2013,
वारीन्द्र कुमार वर्मा
क्या प्रकांड पंडित होना इतना बड़ा पाप है?
कबीर के काव्य रूपों, पदावली, साखी और रमैनी का जो ब्यौरा, विस्तार और विश्लेषण आचार्य परशुराम चतुर्वेदी ने परोसा है, और ढूंढ ढूंढ कर परोसा है, वह आसान नहीं था। फिर बाद में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सरीखों ने कबीर को जो प्रतिष्ठा दिलाई, कबीर को कबीर बनाया, वह आचार्य परशुराम चतुर्वेदी के किए का ही सुफल और विस्तार था, कुछ और नहीं। ... पढ़िए0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 12 मई 2013,
दयानंद पांडेय
कौवा
कौवे के इस उत्पात से बचने के लिए उस दिन से उपयुक्त कार्रवाई करने की योजना बनायी गयी। कौवे के साथ निपटने के लिए छात्रावास में मोहन और मधु को नियुक्त किया गया। जय-विजय द्वारा विष्णु द्वार को सभी संकटों से रक्षा करने की तरह मोहन-मधु ने भी धनुष-तीर लेकर कौवे से छात्रावास के अन्न-व्यंजन के यज्ञ की रक्षा की। ... पढ़िए0 टिप्पणी, ललित निबंध, (34 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 12 मई 2013,
मूल असमिया:डॉ. बिरिंचि कुमार बरुवा, अनुवाद- डॉ. भूपेन्द्र राय चौधरी
कोर्ट पीएम के हिस्से का काम भी करे, और ऐसे मंत्री को तुरंत हटाए
लेकिन सरकार है कि वह इसे गलत तक नहीं मान रही है। इन दोनों मामलों को देखें तो लगता है कि जब सरकार का ऐसा रूख है तो संसद का क्या मतलब है? उस संसद की अब क्या जरूरत है जिसमें विपक्ष के बहिष्कार का हम अब भी विरोध करते हैं, और बार-बार कहते हैं कि संसद के हर पल का इस्तेमाल विपक्ष को सरकार के गलत काम उजागर करने में करना चाहिए। अब हमारे मन का एक हिस्सा हमारे ही मन के दूसरे हिस्से से सवाल करता है कि जब सरकार का यह हाल है ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (15 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 12 मई 2013,
सुनील कुमार
`ऋतुराज एक पल का' गीत संग्रह का लोकार्पण
देहरादून। हिन्दी के मूर्धन्य गीत-कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र के भारतीय ज्ञानपीठ से सद्यःप्रकाशित, नये भावबोध के गीतों के संग्रह ‘ऋतुराज एक पल का’ का लोकार्पण दिल्ली के सुप्रसिद्ध इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में हुआ। इंडियन ऑयल के सहयोग से इंटरनेशनल मेलोडी फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि सिक्किम के राज्यपाल और अंग्रेज़ी के प्रतिष्ठित लेखक श्री बाल्मीकि प्रसाद सिंह, आइएएस थे ... पढ़िए0 टिप्पणी, हलचल, (28 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 11 मई 2013,
देहरादून से रपट
बच्चों की आड़ ले रहे हैं माओवादी
इसलिए आप उसकी प्रामाणिकता पर शक नहीं कर सकते। उसी खबर में यह जिक्र है कि पश्चिम बंगाल समेत पाँच राज्यों में माओवादियों ने 3000 बच्चो को बाल सेना में भरती की है। इस खबर ने राष्ट्रसंघ तक को परेशानी में डाल दिया है। ”आनन्द बाजार पत्रिका“ के संवाददाता राहुल राय के अनुसार राष्ट्रसंघ महासचिव वान-कि-मून ने अपने वार्षिक रिपोर्ट में इस प्रकरण का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय को सतर्क किया है। ... पढ़िए0 टिप्पणी, आलेख, (27 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 11 मई 2013,
विश्वजीत सेन
सल्फ़ी विचारधारा में महिलाओं की स्थिति क़ैदियों के जैसी है
एक मुसलमान धर्मशास्त्री थीं जो बारहवीं सदी में हलब में रहती थीं। उन्होंने हनफी मसलक (पंथ) अपने पिता से पढ़ा और उनकी जमा की हुई हदीसें उन्हें याद थीं और दोनों बाप बेटी ने मिलकर शरई फतवे जारी किए। अगर हम इतिहास में और अधिक अंदर तक जाएं तो हमें महिलाओं में कई प्रबुद्ध औरतें मिल जाएंगीं। सोलहवीं सदी में रहने वाली कुछ महिलाएं इस्लामी शरीयत में अच्छी पकड़ रखती थीं। उनमें से एक तो मुफ़्ती के पद तक भी पहुंचीं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (28 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 10 मई 2013,
मूल-रैना फ्रज, अनुवाद-न्यु एज इस्लाम एडिट डेस्क
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