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 ‘ऊ कसम खा के झूठ बोलै ले’     'कतई हाशिए पर नहीं' विमोचित     भूटान में ब्लागर्स मिले     आल इंडिया रेडियो में सर्वभाषा कवि-सम्मेलन– 2015     सुधर जाओ परसाई     हेमंत स्मृति कविता सम्मान उपन्यास और कविता जीवन और समाज की धड़कन है : भारत भारद्वाज     वह दिन दूर नहीं जब विश्व के आँगन में हिंदी 'तुलसी चौरा' की तरह अवश्य स्थापित होगी : मृदुला सिन्हा   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
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नवनैतिकता के आयाम : गमे इश्क भी, गमे रोजगार भी
अधिकतर लोगों के लिए इसका अर्थ है, रोजगार। लेकिन, परेशान करनेवाला तथ्य यह है कि औद्योगिक और विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि से रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावे आजीविका से बंचित रह जाने की स्थिति, रोजगारविहीन लोगों की योग्यताओं के विकास, महत्त्व और आत्मसम्मान को भी नष्ट कर देती है ... पढ़िए
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प्रफुल्ल कोलख्यान

पड़ोस की मौतों को अनदेखा करने वालों के लिए दो बातें
फौजी जरूरतों को देखते हुए इस बात को एक बड़ी कामयाबी मान रही है कि भारतीय इतिहास में पहली बार गणतंत्र दिवस पर बराक ओबामा भारत आ रहे हैं। लेकिन जब वे भारत की जनता के पूछे गए सवालों को देखने वाले हैं, तो भारत के जागरूक लोगों को ट्विटर और दूसरे तरीके से अमरीकी राष्ट्रपति से वे तमाम सवाल करने चाहिए जो कि अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, और दूसरे देशों की कब्रों से नहीं उठ सकते ... पढ़िए
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सुनील कुमार

‘ऊ कसम खा के झूठ बोलै ले’
कोलकाता। वरिष्ठ शायर कैसर शमीम की अध्यक्षता में मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन दक्षिण कोलकाता के सनफ्लावर गार्डेन कम्युनिटी हाल में ‘कारवां’ की ओर से किया गया ... पढ़िए
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कल्याणकारी समाज का स्वप्न और मानवाधिकार3 - एक
यह समाज में सदगुणों की प्रतिष्ठा तथा मानवमात्र के उनके प्रति सम्मान-भाव का द्ययोतक है। शुभता को प्राप्त करने का रास्ता क्या है? इस बारे में कन्फ्यूशियस स्पष्ट था। उसके अनुसार केवल शासन की शुभता से काम चलनेवाला नहीं है। इस प्रश्न के उत्तर में यह पूछने पर कि शुभता क्या है? कन्फ्यूशियस का कहना था, ‘शुभता प्राणिमात्र के कल्याण की वांछा है। यदि कोई व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है, तो उसको चाहिए कि दूसरे व्यक्तियों के आत्मनिर्भर बनने में मदद करे ... पढ़िए
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ओमप्रकाश कश्यप

'कतई हाशिए पर नहीं' विमोचित
रायपुर। 21 जनवरी को वरिष्ठ कथाकार और पत्रकार परितोष चक्रवर्ती की पुस्तक ’कतई हाशिए पर नहीं’ का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रो. हरिमोहन के हाथों हुआ । लगभग 268 पृष्ठों की यह किताब श्री चक्रवर्ती द्वारा अपने पत्रकार जीवन के दौरान विभिन्न विषयों पर लिखे गए आलेखों, साक्षात्कारों, संस्मरणों और पुस्तक समीक्षाओं का संकलन है ... पढ़िए
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डिजिटल इंडिया यानी असल सूचना क्रांति के मुहाने पर हम
नैशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क, जिस पर करीब 35 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाने वाली है, ग्रामीण जनता को इंटरनेट सुपरहाइवे पर ले आएगा। डिजिटल सेवाओं के सार्थक प्रयोग के लिए डिजिटल शिक्षा और जागरूकता भी बहुत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार का 'दिशा' नामक कार्यक्रम इसमें हाथ बँटाएगा और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को डिजिटल साक्षरता की ओर भी ले जाएगा ... पढ़िए
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

कुरान में ईशनिंदा के लिए सजा नहीं
सऊदी अरब में अपने इस्लाम के वहाबी स्वरूप के अलावा किसी भी धर्म के पालन की बिल्कुल इजाजत नहीं है। पाकिस्तान का मामला एक मिसाल है, क्योंकि वहां ईशनिंदा विरोधी कानून का सर्वाधिक कठोर स्वरूप है। यह तुलनात्मक रूप से ज्यादा पुरानी बात नहीं है और राजनीतिक एजेंडे की उपज है ... पढ़िए
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फरीद ज़कारिया

गणपति की ‘नई दस्तावेज’
गणपति की या यूँ कहिए माओवादी पार्टी की तमाम गलतियों की जड़ इसी गलत मूल्यांकन में निहित है। आज जब भारतीय पूँजीवाद अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक ताकत बन चुका है तब यह मानना कि यहाँ उत्पादन के सम्बन्ध में अर्द्धसामंती तथा अर्द्धऔपनिवेसिक है, कहाँ जायज है? गणपति इस सच्चाई को देखने में असमर्थ हैं तथा पार्टी में आए सारे क्षरण के लिए अन्यत्र कारण ढूंढ़ते हैं ... पढ़िए
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विश्वजीत सेन

भूटान में ब्लागर्स मिले
लखनऊ। तक भूटान की राजधानी थिम्पू-पारो में आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में परिकल्पना सम्मानों का वितरण किया गया। कृष्ण कुमार यादव को सर्वोच्च सार्क शिखर सम्मान, डॉ. राम बहादुर मिश्र को साहित्य भूषण सम्मान, रणधीर सिंह सुमन व डॉ. विनय दास को क्रमशः सोशल मीडिया सम्मान और कथा सम्मान, कुसुम वर्मा को लोक-संस्कृति सम्मान, डॉ. अशोक गुलशन को हिन्दी गौरव सम्मान, सूर्य प्रसाद शर्मा को साहित्य सम्मान तथा ओम प्रकाश जयंत व विष्णु कुमार शर्मा को क्रमशः साहित्यश्री सम्मान व सृजनश्री सम्मान, विश्वंभरनाथ अवस्थी को नागरिक सम्मान प्रदान किए गए ... पढ़िए
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पूरी दुनिया की तरह भारत में भी सहनशीलता कसौटी पर
हम आज यहां छू रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में जो लोग भी ऊंचे ओहदों पर, या महत्व की जगहों पर पहुंचते हैं, उनको सार्वजनिक छानबीन के लिए खुला रहना ही पड़ता है। गांधी और नेहरू तक ऐसी जांच पड़ताल से परे नहीं रहे, और उन पर लिखी गई किताबों में उनके सेक्स जीवन से लेकर पे्रम प्रसंगों तक सभी बातों पर लिखा गया। इतिहास के शिवाजी जैसे लोगों पर भी इतिहासकारों ने जो लिखा, उसका भी जमकर राजनीतिक और क्षेत्रीय विरोध हुआ ... पढ़िए
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सुनील कुमार

अनमोल क्षण
इससे समय की बचत होती है। यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाता है। ये सारी बातें जो बच्चे लिखते थे, खोखली नजर आ रहीं थी। इसकी वजह एक ही थी, जिसे अंग्रेजी में बोरडम और हिन्दी में बोरियत कहते हैं। बोरियत का अर्थ है बैठे-ठाले बेफजूल बातें सोचकर खिन्न होना, दिमाग को खंगालकर निरर्थक विचारों को उबाल देना, चित्त को अव्यवस्थित कर चिंता की कंटीली झाड़ियों में उलझाना, मन को फुरसतिया समझकर इधर-उधर दौड़ाकर थकान पैदा करना ... पढ़िए
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भूपेंद्र कुमार दवे

पैग़म्बर की तौहीन पर हिंसा करने का हक़ आपको किसने दिया?
अयातुल्लाह खुमैनी ने रश्दी सहित इस पुस्तक के प्रकाशन से जुडे सभी लोगों के विरुद्ध मृत्यदंड का फतवा जारी किया था। साथ ही पश्चिम को भी चेताया कि हम पैगम्बर का अपमान नहीं करते और आप भी ऐसा नहीं कर सकते। इसके साथ ही एक रुझान आरम्भ हो गया कि पश्चिम में जो भी इस्लाम विरोधी दिखे, उसकी निंदा की जानी चाहिये और यह आज तक चल रहा है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (10 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 23 जनवरी 2015,
अफरोज आलम साहिल

आल इंडिया रेडियो में सर्वभाषा कवि-सम्मेलन– 2015
भुवनेश्वर। ऑल इंडिया रेडियो द्वारा भुवनेश्वर के भंज कला मंडप में 15 जनवरी को ‘सर्वभाषा कवि सम्मेलन (नेशनल सिम्पोजियम ऑफ पोएट्स) आयोजित किया गया जिसमें 22 भारतीय भाषाओं के उत्कृष्ट कवियों तथा उनके अनुवादकों की कविताओं का प्रस्तुतिकरण हुआ ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (49 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 22 जनवरी 2015,
दिनेश माली

समझ गए हैं न आप
अनुपम संगीत मंडली को बुक करने के लिए सच्चिदानंद जी स्वयं गए। उनके पूछने पर संगीत मंडली के निदेशक अनोखे लाल ने बताया, "उसकी पार्टी शादी पर गाने-बजाने के लिए पाँच सौ पौंड लेती है।" ... पढ़िए
0 टिप्पणी, लघुकथा, (28 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 22 जनवरी 2015,
प्राण शर्मा

पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद
किसी एक राजनीतिक विचारधारा या दल से सम्बद्ध कर कुंठित कर देने का हर संभव प्रयास किया गया है। यह उनके चिंतन के लिये नहीं वरन् देश पर, समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के लिये बहुत हद तक बंधनकारी सिद्ध हुआ है तथा उक्त चिंतन से जो लाभ अपेक्षित था वह नहीं मिल पाया है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, पुस्तकायन, (23 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 21 जनवरी 2015,
सुरेश कुमार पंडा

देश भर के भाजपा नेताओं के लिए किरण बेदी नाम का संदेश
अपने राजनीतिक अस्तित्व को जिस तरह बचाने में लगे हैं, उससे ऐसा लगता है कि भारतीय राजनीति में नीति-सिद्धांत और विचारधारा अस्थाई रूप से निलंबित हैं, और भूकंप में जमीन के भीतर की चट्टानें हिलने के बाद अब तक बाहर की जमीन पूरी तरह थम नहीं पाई है। यह मौका बाकी पार्टियों के लिए भी अपने घर सम्हालने का भी है, और अपने काम के तौर-तरीकों को सुधारने का भी है। जिस तरह आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने अपनी जिंदगी की सबसे बुरी नौबत देख ली थी ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 21 जनवरी 2015,
सुनील कुमार

निज-निज पानीपत
देशमुख अंधेरे के भीतर खड़ा रहा। महाराष्ट्र के मराठावाड़ा अंचल में एक छोटा, बहुत छोटा शहर है जालना। अनुन्नत, अशिक्षित बस्ती में देशमुख का बचपन और यौवन बीता। औरंगाबाद से बड़ा शहर नहीं देखा था उसने मैट्रिक पास करते समय तक। कभी भी शिवसेना, दलित पंथ अथवा कांग्रेस की राजनीति में घुसा नहीं था वह। बहुत ब्रिलिएन्ट लड़का था देशमुख, मराठावाड़ा विश्वविद्यालय में ... पढ़िए
0 टिप्पणी, ओडिया-माटी, (24 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 20 जनवरी 2015,
मूल : जगदीश मोहंती , अनुवाद : दिनेश माली

वह तुलसी, वह कबीर और थे, हिप्पोक्रेसी का मारा, सत्ता का चाटुकार यह लेखक कुछ और!
घर-घर घूम-घूम कर दाना-दाना भिक्षा मांगते थे फिर कहीं भोजन करते थे। शायद वह अगर अकबर के दरबारी बन गए होते तो रामचरित मानस जैसी अनमोल और विरल रचना दुनिया को नहीं दे पाते। सो उन्हों ने दरबारी दासता स्वीकारने के बजाय रचना का आकाश चुना। आज की तारीख में तुलसी को गाली देने वाले, उन की प्रशंसा करने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे पर तुलसी का यह साहस किसी एक में नहीं मिलेगा ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 20 जनवरी 2015,
दयानंद पांडेय

कल्याणकारी समाज का स्वप्न और मानवाधिकार2 - एक
जो योग्य थे, वे अपने कौशल से स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध कर उच्च वर्ग में सम्मिलित हो सकते थे। सोलोन द्वारा निर्मित संविधान को एथेंस सहित पूरे यूनान में सराहा गया। उस संविधान में संशोधन का अगला काम क्लेस्टींस की ओर से किया गया। क्लेस्टींस ने निर्वाचन की प्रणाली में सुधार कर, शासन को गणतांत्रिक स्वरूप प्रदान करने की कोशिश की। उसने एथेंस की न्याय प्रणाली में भी सुधार किए ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आखर-अनंत, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 20 जनवरी 2015,
ओमप्रकाश कश्यप

मीडिया-अध्ययन के पैमाने तय करने की पहल समझदारी
सबसे अच्छा है यह सोच ठीक नहीं है। आज तो समाज सेवा के काम में भी पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रहती है, और वह आमतौर पर मददगार पाई भी जाती है। अब कोई यह कहे कि क्या मदर टेरेसा, या बाबा आमटे ने समाज सेवा में कोई डिग्री ली थी, तो यह कुतर्क होगा। आमतौर पर काम को बेहतर बनाने वाली शिक्षा पाने में हिचक नहीं होनी चाहिए ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (20 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 19 जनवरी 2015,
सुनील कुमार

दहेज
समाजसेवा के रूप में एल.आई.सी. और शादी-ब्याह का भी काम भी कर लिया करते थे। मृणालबाबू ने जब पंडितजी से चर्चा की, तो पंडितजी ने फौरन मृणालबाबू को अपनी पोटली से निकालकर संस्कारवान, सुंदर, सुशील, सुसभ्य कन्या का प्रस्ताव थमा दिया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, लघुकथा, (54 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 19 जनवरी 2015,
जयंत साहा

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