वर्ष 8 माह 0 दिन 11
 भारतीय मूल्यों और संस्कृति में हमारी जड़ें हैं: लाजपत आहूजा     कविताएं समय को रचती हैं, समय में हस्तक्षेप करती हैं     साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला को स्वर्ण -सम्मान     गांव का किसान लेखक होगा अंतरराष्ट्रीय सम्‍मान से सम्मानित     श्री सत्य कॉलेज में 'सृजन सम्मान एवं काव्य समारोह' का आयोजन     माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में नरेन्द्र कोहली का उद्बोधन     प्रविष्टियाँ आमंत्रित   

     
आधुनिक वेताल कथा अतिक्रमण ये भी एक दृष्टिकोण समय-समय पर ओडिया-माटी बाअदब-बामुलाहिजा धारिणी सिनेमा के शिखर टेक-वर्ल्ड आखर-अनंत
जनमन
प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान
समाधान
जया केतकी
जया केतकी
बाअदब-बामुलाहिजा
फजल इमाम मलिक
फजल इमाम मलिक
धारिणी
विपिन चौधरी
विपिन चौधरी
सिनेमा के शिखर
प्रमोद कुमार पांडे
प्रमोद कुमार पांडे
आखर-अनंत
ओमप्रकाश कश्यप
ओमप्रकाश कश्यप
रोज़-रोज़
दयानंद पांडे
दयानंद पांडे


स्याह सफ़ेदआधुनिक वेताल कथाअतिक्रमणये भी एक दृष्टिकोणसमय-समय परओडिया-माटीझरोखाबाअदब-बामुलाहिजाधारिणीब्लॉग गाथासमांतरपुस्तक-संसारविचारार्थनया नज़रिया
<< 1 2 3 >>

कुलदीप कुमार कंबोज तो कहते हैं कि वह असली हैं पर ज़रा धमकी भरे अंदाज़ में!
आप की कोई और पिक्चर भी कहीं नहीं है। न घर-परिवार, न दोस्त-अहबाब न किसी और की। ऐसा अमूमन होता नहीं है। ऐसा होता है तो सिर्फ़ फ़र्जी प्रोफ़ाइलों के साथ। जिस तरह से आप रिएक्ट कर रहे थे अपनी टिप्पणी में इस तरह अमूमन फ़र्जी प्रोफ़ाइल वाले लोग ही ऐसी बेपरवाह, बेलगाम और बेअंदाज़ भाषा इस्तेमाल करते हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 23 अप्रेल 2014,
दयानंद पांडेय

भारतीय मूल्यों और संस्कृति में हमारी जड़ें हैं: लाजपत आहूजा
भोपाल। भारतीय मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति की जब भी बात होती है तो उसे संकीर्ण नजरिया माना जाता है। यह सही नहीं है। ये मूल्य तो शाश्वत है। भारतीय मूल्यों और संस्कृतियों में हमारी जड़ें हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (2 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 22 अप्रेल 2014,
पवित्र श्रीवास्तव

सामाजिक गतिशीलता के अवरोधक
प्रौद्योगिकी विकास का प्रारंभिक दौर उत्पादन प्रक्रिया में श्रम घटाने और उसको आरामदेय बनाने पर जोर देता था। जबकि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को मानवीय श्रम और उसके तकनीकी कौशल की ज्यादा परवाह नहीं होती। स्वचालीकरण की अधुनातन कोशिशें उत्पादन प्रक्रिया का शत-प्रतिशत मानवीकरण करने पर उतारू हैं। ऊपर से नवीन आविष्कारों पर समाज के मुट्टी-भर लोगों का नियंत्रण तथा उससे होने वाले लाभ का वर्ग विशेष तक सिमटकर रह जाना ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आखर-अनंत, (0 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 22 अप्रेल 2014,
ओमप्रकाश कश्यप

अनिल पुरोहित की कविता
0 टिप्पणी, कविता, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 अप्रेल 2014,
-

बुद्धिजीवी कहलाने वाले लोग इतिहास में बुद्धूजीवी दर्ज होंगे
वहां मीडिया को और समाज के लोगों को खुद होकर गंदी बातों का खतरा उजागर करते हुए उसके खिलाफ खुलकर सामने आना चाहिए। जब एक राजनीतिक दल के बयान के खिलाफ दूसरे राजनीतिक दल की तरफ से कुछ कहा जाता है, तो उसका वजन कम होता है। जब राजनीति का हिस्सा न रहने वाली बाकी ताकतें, अपनी विश्वसनीयता के साथ हिंसक जुबान के खिलाफ कुछ कहेंगी ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (5 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

टैगोर अपने समय से बहुत आगे थे
शांति निकेतन के माध्यम से भारत तथा बंगाल के नवयुवकों को यह संदेश दिया ‘‘ग्रामीण उद्योगों की संभावनाओं पर गौर करो’’। इसके अलावा कविता, कहानी, उपन्यास और निबंध लिखने के साथ-साथ उन्होंने ढ़ाई हजार गीत लिखे, उनमें सुर आरोपित किए। इनके द्वारा किए गए इस महान काम ने बंगाली मानसिकता को बालिग बनाया, बंगला सौंदर्यशास्त्र को ऐसा विशाल आयाम प्रदान किया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (37 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 20 अप्रेल 2014,
विश्वजीत सेन

मीडिया की सर्वव्यापी उपस्थिति से जीवंत हो रहा है लोकतंत्र
आज मीडिया क्रांति रातोरात आपको हिंदुस्तान के दिल में उतार सकती है। नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल की परिघटना को ऐसे ही समझिए। आज देश मनोहर पारीकर और माणिक सरकार को भी जानता है, अन्ना हजारे को भी पहचानता है। उसने राहुल गांधी की पूरी युवा बिग्रेड के चेहरों को भी मीडिया के माध्यम से ही जाना है। यानि मीडिया ने हिंदुस्तानी राजनीति में किसी युवा का नेता होना भी संभव किया है। मीडिया का सही, रणनीतिक इस्तेमाल इस देश में भी, प्रदेश में भी ओबामा जैसी घटनाओं को संभव बना सकता है। अखिलेश यादव को आज पूरा हिंदुस्तान पहचानता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, अतिक्रमण, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 20 अप्रेल 2014,
संजय द्विवेदी

लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव सुधार की जरूरत...
देश भर में जगह-जगह नेता हिंसक बातें कर रहे हैं, दूसरों को गंदी गालियां दे रहे हैं, और चुनाव प्रचार को लेकर एक हिंसक और बदबूदार माहौल खड़ा कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने कुछ नेताओं पर मामूली रोक लगाई है, लेकिन आज की गंदगी पर इससे कोई फर्क पड़ते नहीं दिख रहा है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 19 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

क्या शिया और सुन्नी इस्लाम में कभी मेल मिलाप होगा?
अगर शिया इस्लाम को सुन्नी मुसलमान स्वीकार करते हैं तो उन्हें पैग़म्बर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के खानदान से निकले आध्यात्मिक नेतृत्व को भी स्वीकार करना होगा और शिया इमामों को अपना आध्यात्मिक पेशवा स्वीकार करना होगा। दूसरी तरफ अगर शिया मुसलमान सुन्नी संस्करण को स्वीकार कर लें तो वो अपने आपको दिशाहीन पाएंगे, क्योंकि सुन्नी इस्लाम में कोई औपचारिक आध्यात्मिक नेता नहीं है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (19 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 19 अप्रेल 2014,
माइक ग़ौस

इवेन्ट्स का ब्यौरा चाहिए? इंटरनेट से लें मदद
हालांकि यहां पर देश के सात बड़े शहरों को ही कवर किया गया है लेकिन इसके दायरे में आने वाली कैटेगरीज दूसरों से ज्यादा हैं। इनमें बाकी चीजों के अलावा कुछ नई किस्म की इवेन्ट्स की सूचनाएं भी दिखीं जैसे तकनीक, बिजनेस, प्रोफेशनल, उद्यमी, फाइनेंशियल सर्विसेज, मानव संसाधन, सेल्स एंड मार्केटिंग इवेन्ट्स वगैरह। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, टेक-वर्ल्ड, (48 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 अप्रेल 2014,
बालेन्दु शर्मा दाधीच

कविताएं समय को रचती हैं, समय में हस्तक्षेप करती हैं
लखनऊ। हिन्दी और विश्व की तमाम भाषाओँ के सच्चे कवि अपने समय की सच्चाइयों से सीधी मुठभेङ़ करते हैं। ऐसे कवियों की कविताएं अँधेरे समय में भी रास्ता दिखाती हैं। वे आम जन को विकल्पहीन स्थितियों के बीच भी विकल्प के लिए प्रेरित करती हैं। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 अप्रेल 2014,
कौशल किशोर की रपट

फ़ेसबुक पर जातीय और धार्मिक जहर फैलाने वाले ऊर्फ़ नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे !
अपने ब्लाग सरोकारनामा पर इस बाबत एक टिप्पणी लिखी। यह दिव्य संदेश दंभी भंगी कालीचरन स्नेही के टट्टू बन कर मुझ पर टूट पड़े। मैं ने उन से भी उन की पहचान पूछी। अपनी पहचान बताने के बजाय वह मेरा मानसिक संतुलन नापने लगे वह। तो उन के पिता जी का नाम पूछा। तब वह हा हा करने लगे। और कि बाद में अपनी वाल से लाल जी निर्मल की टैग की हुई यह पोस्ट ही मिटा दी। जिस पर उन्हों ने लफ़्फ़ज़ी की थी। हालां कि लाल जी निर्मल की वाल पर वह पोस्ट अभी भी है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (16 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 अप्रेल 2014,
दयानंद पांडेय

यह आम मीडिया है, या महज राजनीति मीडिया?
उस पीढ़ी को हिंदुस्तान का आज का मीडिया बहुत ही सीमित दायरे में जानकारी देकर अधर में छोड़ दे रहा है। जिस तरह हिंदुस्तान का खेल क्रिकेट के बोझ से दबकर बाकी लगभग तमाम खेलों को बच्चों के स्तर पर खो सा चुका है, उसी तरह राजनीति में खबरों को दबाकर, कुचलकर, उन पर लगभग एकाधिकार कायम कर लिया है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (23 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

छत्तीसगढ़ के राजमुकुट पर चमकते हीरे सा बस्तर
देवशरणजी बहुत अच्छे ग़ज़ल गायक भी हैं। कच्चे धूल भरे रास्ते से वो हमें टेराकोटा शिल्पकारों के घर ले गए। टेराकोटा के शिल्पकार मिट्टी से घंटियों वाला हाथी, लैंप, मुखौटे और कई तरह का सजावटी सामान बनाते हैं। घंटियों से सजा हाथी इस कला की ख़ास पहचान है। इतने सुंदर पशु पक्षी, जानवरों को गढ़ने वाले कलाकारों के गोबर मिट्टी से बने कच्चे घर और फूस का छप्पर देख मन भर आया ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 अप्रेल 2014,
संतोष

साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला को स्वर्ण -सम्मान
खगड़िया। सुपरिचित साहित्यकार और कुण्डलियाकार श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला को उनके कुण्डलिया संग्रह 'काव्यगन्धा ' के लिए हिन्दी भाषा साहित्य परिषद,खगड़िया (बिहार) द्वारा स्वर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (51 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 अप्रेल 2014,
नन्देश निर्मल

माओवादी कायर हैं और सरकारें बहादुर!
माओवादी और नक्सलवादी कायर हैं तो हमारा भारतीय राज्य अपनी बहादुरी के सबूत कब देगा? रोज भारत मां के लाल आदिवासी, आम नागरिक, साधारण सैनिक और सिपाही मौत के घाट उतारे जा रहे हैं और जेड सुरक्षा में घूमते हमारे राजपुरूषों के लिए बस्तर हाशिए का विषय है। राष्ट्रीय मीडिया पूरे दिन अमेठी में राहुल गांधी के नामांकन पर झूम रहा है और वहां लुटाए गए पांच सौ किलो गुलाब के फूलों पर निहाल है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (20 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 अप्रेल 2014,
संजय द्विवेदी

मोदी की बीवी के मुद्दे पर अब लिखना ही पड़ रहा है
मोदी की निजी जिंदगी के चाल-चलन के मुकाबले कांग्रेस नेताओं के कुकर्म भयानक है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी की बीवी उनकी मंगलकामना करते हुए नंगे पैर जी रही हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता ऐसे भी हैं जिनकी औलाद अदालतों में डीएनए जांच से खून का रिश्ता साबित करती है, और ऐसे नेताओं के सेक्स वीडियो इंटरनेट पर लोगों को हक्का-बक्का कर देते हैं ... पढ़िए
0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (97 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 15 अप्रेल 2014,
सुनील कुमार

चुनावी बयार में बहते कुछ फ़ेसबुकिया नोट्स
लेकिन धर्मनिर्पेक्षता की दावेदार कांग्रेस या और पार्टियां अयोध्या मुद्दे को भूलने नहीं देना चाहतीं। इमाम बुखारी की अपील, कोबरा पोस्ट आदि के चोचले में फंसी पड़ी हैं। ऐसे ही कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल में जब नंदीग्राम और सिंगूर में किसान आंदोलनरत थे तब वहां की तत्कालीन वामपंथी सरकार उन का दमन कर रही थी ... पढ़िए
0 टिप्पणी, रोज़-रोज़, (28 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 15 अप्रेल 2014,
दयानंद पांडेय

कौन किस पर भारी
पहले उनके विरोधी कम थे, बाद में बढ़े। इसका अर्थ यह है कि पहले भी लोग असंतुष्ट थे, परन्तु अपना असन्तोष जाहिर नहीं करते थे। जब सुरक्षा बल आए, तब उनको लगा अब अपने असन्तोष को जाहिर करना चाहिए। इसमें जन-पक्षी या जन-विरोधी होने का प्रश्न नहीं था। लोगों का अधिकांश किशनजी से सहमत कभी नहीं थे। यह उनका आतंक था ... पढ़िए
0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 15 अप्रेल 2014,
विश्वजीत सेन

क्या इस जंग में सिर्फ मोहरा हैं मुसलमान?
भारत में गैर मुस्लिमों के साथ उनके संबंधों की जो ‘जिन्नावादी असहजता’ है, उस पर उन्हें लगातार ‘भारतवादी’ होने का मुलम्मा चढ़ाए रखना होता है। दूसरी ओर पाकिस्तान और पाकिस्तानी मुसलमानों से अपने रिश्तों के प्रति लगातार असहजता प्रकट करनी पड़ती है। मुस्लिम राजनीति का यह वैचारिक द्वंद्व बहुत त्रासद है। आप देखें तो हिंदुस्तान के हर मुसलमान नेता को एक ढोंग रचना पड़ता है ... पढ़िए
0 टिप्पणी, अतिक्रमण, (35 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 14 अप्रेल 2014,
संजय द्विवेदी

प्राण शर्मा की ग़ज़ल
0 टिप्पणी, छंद > ग़ज़ल, (49 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 13 अप्रेल 2014,
प्राण शर्मा

<< 1 2 3 >>

Everyday, New Posts, Like, News, Poet, Story, Gazal, Song, novel, blog, Article, music, lyrics, books, review,conference, training etc. On srijangatha Magazine


स्याह सफ़ेद पुस्तक-संसार नया नज़रिया विचारार्थ कभी नीम-नीम कभी शहद-शहद
जाग मछिन्दर गोरख आया
बुद्धिनाथ मिश्र
बुद्धिनाथ मिश्र
विचारार्थ
बृजकिशोर कुठियाला
बृजकिशोर कुठियाला
स्याह सफ़ेद
सुनील कुमार
सुनील कुमार
समय-समय पर
अखिलेश शुक्ल
अखिलेश शुक्ल
ओडिया-माटी
दिनेश माली
दिनेश माली
नया नज़रिया
जगदीश्वर चतुर्वेदी
जगदीश्वर चतुर्वेदी
अतिक्रमण
संजय द्विवेदी
संजय द्विवेदी